एक दर्जन् सडक़े बुरी तरह टूटी, और इतनी ही उखड़ का कर गड्डों का रूप धारण कर गई : कद्दू की फसल पूरी तरह तवाह, धान की फसल व पशूओं के लिए लगाए बाजरे को नुकसान

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गढ़शंकर में जलभराव में लगातार कमी आने से लोगो ने ली राहत, लेकिन
डीसी ने अधिकारियों को साथ लेकर प्रभावित क्षेत्रों को किया दौरा
गढ़शंकर : गढ़शंकर में बारिश के बंद होने के बाद लोगो व किसानों ने राहत की सांस ली और जलभराव में भी लगातार कमी आ रही है। उधर 66 केवी के बिजली घर में घुसा पानी निकालने के बाद बिजली सप्लाई नार्मल हो गई है। लेकिन जलभराव कम होने के बाद गढ़शंकर में हुई तवाही की तस्वीरें भी साहमने आने लगी है। उधर जिलाधीश कोमल मित्तल ने एसएसपी सरताज सिंह चाहल, एसडीएम जशनप्रीत कौर गिल व तपन भनोट व अन्य अधिकारियों के साथ विभिन्न प्रभावित स्थलों का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया और संबंधित विभागों को राहत कार्यो को लेकर निर्देश दिए।
गढ़शंकर व हिमाचल प्रदेश की शिवालिक की पहाडिय़ों से उतरा तेज गति का पानी यहां दो दर्जन गावों में घुसने के बाद काफी लोगो के घरों में पानी भरने से समान खराब हुया है। वहीं गांव नंगलां कह तीनों संपर्क सडक़ों के टूटने, हैवोवाल से श्री अनंदपुर साहिब रोड़ की सडक़ के वह जाने सहित एक दर्जन से ज्यादा सडक़े टूट गई और कई जगह तो पचास पचास फुट से ज्यादा का कटाव हुया है। इसके ईलावा एक दर्जन से ज्यादा सडक़े उखड़ गई है और उन्में गहरे गड्डे बन गए है।
सबसे ज्यादा झाटका किसानों को लगा है यहां नंगलां के किसान सोढ़ी सिंह सहित करीव आधा दर्जन किसानों के टियुबवैलों के बोर पानी भरने से खराब हो गए है। मार्केअ कमेटी के पूर्व चैयरमेन मोहन सिंह थियाड़ा ने बताया कि उनके गांव नंगला में ही तीन किसानों के टियुबवैलों के बोर पानी भरने से खराब हो गए है। एक बोर का किसानों को दोबारा दस लाख खर्च करना पड़ेगा। इसके ईलावा काफी गावों में खड़ी धान की फसल को नुकसान हुया है तो काफी जगह खेतों में पानी अभी भी खड़ा है और उसे निकलने के लिए कोई रास्ता नहीं है। अव घूप पडऩे से गर्मी से वह फसल खराब होने की अशंका बनी हुई है। इसके ईलावा कंडी क्षेत्र के गावों धान छोड़ लगाए कद्दू की फसल पूरी तरह तवाह हो गई है। गांव रामपुर बिल्ड़ों के किसान जेबी सेखों ने बताया कि धान को छोड़ हमने कद्दू खेतों में हमने लगाया था। लेकिन भारी बारिश और अवैध माईनिंग के चलते पानी का तेज वहाव खेतों में आने से फसल पूरी तरह बरवाद हो गई है। सरकार को तुरंत किसानों को राहत देने के लिए कम से कम पचास हजार प्रति एकड़ मुआवजा देना चाहिए।
कंडी संघर्ष कमेटी के कनवीनर दर्शन सिंह मट्टू ने बिभिन्न गावों में जाकर जायजा लेने के बाद कहा कि कनैल निकट बासू खड्ड ने तवाही मचाई। जिसके पीछे नजायज माईनिंग और राजसव विभाग की मिलीभुगत से चोओं पर किए नजायज कबजे मुख्य कारण बने। उन्होंने सरकार से खेतों मे खराब हुई फसल, सब्जियों व पशूओं के हरे खरे के बरवाद होने का तुरंत मुआवजा देने की मांग की
तहसीलदार तपन भनोट : गढ़शंकर में स्थिति समान्य है, जलभराव लगातार कम हो रहा है। इस समय बाढ़ आने को कोई खतरा नहीं है। धान का ज्यादा नुकसान नहीं हुया। खेतों में खड़े बाजरे, कद्दू की फसल का नुकसान हुया है। जिसके लिए पटवारियों की डयुटी लगाई है। पूरी रिर्पोट तैयार की जा रही है।

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