एसवाईएल मुद्दे पर सीएम सैनी के साथ चर्चा ….सीएम मान ने हरियाणा को पंजाब का भाई बताया

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चंडीगढ़ : पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने काफी समय से लंबित सतलुज-यमुना लिंक (एसवाईएल) नहर के मुद्दे पर मंगलवार को ”सौहार्दपूर्ण माहौल में” चर्चा की।

दोनों मुख्यमंत्रियों ने निर्णय लिया कि अब दोनों राज्य सरकारों के अधिकारी इस विवादित मुद्दे पर चर्चा करेंगे तथा वार्ता में प्रगति से उन्हें अवगत कराएंगे।

चंडीगढ़ के एक होटल में हुई यह बैठक एक घंटे से अधिक समय तक चली।

बाद में दोनों मुख्यमंत्रियों ने संयुक्त प्रेसवार्ता की। मान ने हरियाणा को पंजाब का ‘शत्रु नहीं, भाई’ बताया।

मान ने यह भी कहा कि लंबे समय से लंबित मुद्दे का समाधान होना चाहिए। हालांकि उन्होंने इस बात पर जोर दिया, ”किसी का हक नहीं मरना चाहिए, न ही पंजाब का, न ही हरियाणा का।”

एसवाईएल नहर का मुद्दा पिछले कई वर्षों से दोनों राज्यों के बीच विवाद का मुख्य कारण रहा है।

पिछले साल मई में उच्चतम न्यायालय ने दशकों पुराने विवाद के सौहार्दपूर्ण समाधान के लिए दोनों राज्यों को केंद्र के साथ सहयोग करने का निर्देश दिया था।

हाल में शीर्ष अदालत ने इस मामले को सुनवाई के वास्ते अप्रैल में सूचीबद्ध किया है।

सैनी ने प्रेसवार्ता में कहा कि चर्चाएं बहुत ही सकारात्मक माहौल में हुईं और ”जब चर्चाएं अच्छे माहौल में होती हैं तो उनसे सार्थक परिणाम भी निकलते हैं”।

उन्होंने कहा, ”यह बैठक उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुसार की गई थी।”

इससे पहले भी केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सी आर पाटिल की अध्यक्षता में एक बैठक हुई थी और सकारात्मक माहौल में बातचीत हुई थी।

सैनी ने आज कहा, ”हमने फैसला किया है कि आगामी दिनों में हमारे अधिकारी बैठक करेंगे और इस मामले पर चर्चा करेंगे। उन चर्चाओं से जो भी मुद्दे सामने आएंगे, उन्हें हम दोनों के समक्ष रखा जाएगा। हम बैठेंगे और उन पर आगे कदम उठाएंगे।”

गुरु नानक देव की शिक्षा ‘पवन गुरु, पानी पिता, माता धरत महत’ का जिक्र करते हुए सैनी ने कहा कि उनकी शिक्षाएं हमारा मार्गदर्शन करती हैं।

‘पवन गुरु, पानी पिता, माता धरत महत’ का तात्पर्य है- हवा, पानी, धरती) को ईश्वर की देन मानकर उनका आदर करना चाहिए।

मान ने भी कहा, ”जैसा कि मुख्यमंत्री (सैनी) साहब ने कहा कि गुरुओं की ‘बानी’ (वाणी) हमारा मार्गदर्शन कर रही है। हम भाई कन्हैया जी की संतान हैं, जिन्होंने युद्ध में शत्रुओं को भी पानी पिलाया था। हरियाणा हमारा शत्रु नहीं, बल्कि हमारा भाई है।”

गौरतलब है कि नौवें सिख गुरु, गुरु तेग बहादुर के शिष्य भाई कन्हैया ने आनंदपुर साहिब की लड़ाई में अपने कंधे पर एक ‘मश्क’ (पानी से भरी चमड़े की थैली) रखी थी और बिना किसी भेदभाव के घायलों को पानी पिलाया था।

मान ने कहा कि जहां तक ​​जल मुद्दे का सवाल है, यह आने वाले समय में विश्व का मुद्दा बनने जा रहा है।

उन्होंने कहा, ”जहां आज की बैठक की बात है तो मैंने अपना पक्ष रखा, उन्होंने (सैनी ने) अपना पक्ष। अब हमें कागजात लाने की ज़रूरत नहीं है। हमें यह बात इतनी अच्छी तरह याद है। यहां तक कि जब भी हम किसी समारोह में मिलते हैं, तो हम इसी मुद्दे पर बात करते हैं।”

बैठक के नतीजों पर पंजाब के मुख्यमंत्री ने कहा कि निर्णय लिया गया है कि दोनों राज्यों के अधिकारी इस मुद्दे पर चर्चा करने के लिए नियमित रूप से बैठकें करेंगे।

उन्होंने कहा कि वह माननीय उच्चतम न्यायालय की किसी भी तारीख का इंतजार नहीं करेंगे और यह भी संभव है कि अधिकारी महीने में 3-4 बार बैठकें करें।

मान ने कहा कि दोनों राज्यों के अधिकारी इस मुद्दे पर अपने-अपने मुख्यमंत्रियों को रिपोर्ट देंगे।

उन्होंने कहा, ”अधिकारियों से रिपोर्ट मिलने के बाद हम (दोनों मुख्यमंत्री) फोन पर बात कर सकते हैं। यह जरूरी नहीं है कि हम बैठक में ही सारी चर्चा करें।”

उन्होंने कहा, “दोनों भाई हैं। दोनों 1966 में अलग हो गये। अब पानी का मुद्दा चल रहा है।”

हरियाणा को 1966 में पंजाब से अलग करके एक अलग राज्य बनाया गया था।

जब पंजाब द्वारा नहर के निर्माण के बारे में पूछा गया, तो मान ने पानी की उपलब्धता के पुनर्मूल्यांकन पर जोर देते हुए पलटवार किया, ”आप नहर में क्या छोड़ेंगे? क्या आप नहर में जूस छोड़ेंगे?”

इस अवसर पर पंजाब के जल संसाधन मंत्री बरिंदर कुमार गोयल, हरियाणा की सिंचाई मंत्री श्रुति चौधरी, पंजाब के मुख्य सचिव के.ए.पी. सिन्हा, हरियाणा के मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव राजेश खुल्लर एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

एसवाईएल नहर की परिकल्पना दोनों राज्यों के बीच रावी और ब्यास नदियों के पानी के प्रभावी बंटवारे के लिए की गई थी। परियोजना में 214 किलोमीटर लंबी नहर की परिकल्पना की गई है जिसमें 122 किलोमीटर हिस्सा पंजाब में और शेष 92 किलोमीटर हरियाणा में बनाया जाना था।

हरियाणा ने अपने क्षेत्र में परियोजना पूरी कर ली है, लेकिन 1982 में काम शुरू करने वाले पंजाब ने इसे रोक दिया।

शीर्ष अदालत ने 1996 में हरियाणा द्वारा दायर मुकदमे में 15 जनवरी 2002 को उसके पक्ष में फैसला दिया था और पंजाब सरकार को एसवाईएल नहर का अपना हिस्सा बनाने का निर्देश दिया था।

पंजाब सरकार का कहना है कि राज्य के पास दूसरों के लिए अतिरिक्त पानी नहीं है और वह सिंधु नदी के पानी में ”अपने उचित हिस्से” की मांग कर रही है।

हरियाणा सरकार भी नदियों के पानी में अपना हिस्सा मांग रही है और उसका दावा है कि उसे एसवाईएल नहर का निर्माण न होने के कारण वह हिस्सा नहीं मिल रहा।

 

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