ओमान में युवती ने जानवरों से भी बदतर काटी जिंदगी : तनख्वाह तो दूर, उसके पास जो पैसे थे, वे भी छीन लिए

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लुधियाना :  ज़िले की एक लड़की, जो अच्छी नौकरी और उज्ज्वल भविष्य का सपना लेकर मस्कट (ओमान) गई थी, ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि वहां के हालात किसी नर्क से कम नहीं थे। निर्मल कुटिया सुल्तानपुर लोधी पहुंची इस लड़की ने बताया कि विदेश जाने के उसके सपने ने उसे ऐसी नर्क भरी ज़िंदगी में धकेल दिया, जिससे निकलना उसके लिए बेहद मुश्किल हो गया था।

उसने बताया कि वह अप्रैल महीने में घर की मजबूरी के चलते क्लिनिकल काम के दो साल के वीज़ा पर ओमान गई थी। उसे 30 से 40 हज़ार रुपये तनख्वाह देने का वादा किया गया था, लेकिन वहां पहुंचते ही उसका पासपोर्ट छीन लिया गया और उसे क्लिनिक में काम देने की बजाय गैरकानूनी तरीक़े से उसकी मर्ज़ी के ख़िलाफ़ दूसरे कामों के लिए मजबूर किया गया। विरोध करने पर उसे बेचने या जान से मारने की धमकियां दी जाती थीं। उससे दिन-रात लगातार काम लिया जाता, खाने की उचित व्यवस्था नहीं थी और आराम के लिए भी वक्त नहीं दिया जाता था। तनख्वाह तो दूर, उसके पास जो पैसे थे, वे भी छीन लिए गए।

यह स्थिति तब बदली जब राज्यसभा सांसद संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने विदेश मंत्रालय से संपर्क किया और उनके प्रयासों से लड़की को ओमान से सुरक्षित वापस लाया गया। पीड़िता के साथ पहुंचे उसके परिवार ने बताया कि जब लड़की ओमान में इस तरह फंसी हुई थी, तब पूरा परिवार गहरे सदमे में था और उन्हें कहीं से भी कोई मदद नहीं मिल रही थी। उन्होंने राज्यसभा सांसद संत सीचेवाल का धन्यवाद किया और एजेंट के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

इस मौके पर संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने कहा कि जब तक लड़कियों को धोखे से इन देशों में भेजने वाले गिरोहों पर सख्ती से रोक नहीं लगाई जाती, तब तक हालात नहीं सुधर सकते। उन्होंने भारतीय दूतावास, विदेश मंत्रालय और उन सभी का धन्यवाद किया जिन्होंने इस लड़की को घर वापसी में मदद की। साथ ही उन्होंने पंजाब के लोगों से अपील की कि कृपया किसी अनजान एजेंट या सलाह पर अपनी बेटियों को उन देशों की ओर न भेजें, जहां उनकी ज़िंदगी नर्क बन जाती है।

ओमान के हालात लड़कियों के रहने लायक नहीं : पीड़िता

पीड़िता ने बताया कि ओमान के हालात लड़कियों के रहने लायक नहीं हैं। वहां जिन कामों के लिए बुलाया जाता है, वे काम नहीं दिए जाते और मर्ज़ी के खिलाफ अन्य काम कराए जाते हैं। दिनभर काम कराने के बाद ठीक से खाने को नहीं दिया जाता और आराम के लिए केवल 3 से 4 घंटे ही मिलते हैं।

 

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