करोड़पति चपरासी पर बड़ा एक्शन: DM के निर्देश पर FIR, अब कुर्क होगी इल्हाम और अर्शी की पूरी संपत्ति!

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पीलीभीत। बीसलपुर के जनता इंटर कालेज के चपरासी ने इल्हाम शम्सी ने डीआइओएस दफ्तर में संबद्ध रहकर न सिर्फ वेतन बिल बनाने का पटल देखा बल्कि सरकारी खजाने में सेंधमारी कर पत्नी अर्शी के खाते में 1.01 करोड़ रुपये एनईएफटी से ट्रांसफर करा दिए।

आरोपित ने 98 ट्रांजेक्शन के माध्यम से यह पूरा खेल किया। बैंक शाखा प्रबंधक ने जब यह पूरा मामला प्रशासनिक अधिकारियों को बताया तो भी विभागीय अधिकारियों ने इतनी लंबी अवधि तक आरोपित के विरुद्ध कार्रवाई तक नहीं कर पाई।

डीएम ने सख्ती बरतते हुए मामले की सीडीओ की अध्यक्षता वाली कमेटी से जांच कराई, जिसमें आरोप तय होने पर गबन के आरोपित इल्हाम व उसकी पत्नी अर्शी खातून पर प्राथमिकी पंजीकृत की गई। यह प्राथमिकी डीआइओएस की ओर से कराई गई, जिसमें उसने सारे आरोपों को खुद स्वीकार कर लिया। इससे पहले आरोपित को निलंबित किया जा चुका है।

डीएम ने आरोपित की संपत्ति की अलग से जांच कराने के निर्देश दिए। साथ ही सभी विभागों को इस तरह की आंतरिक जांच कराने के लिए निर्देशित किया, जिससे किसी तरह की गड़बड़ी न रहे। माध्यमिक शिक्षा विभाग से शासकीय सहायता प्राप्त जनता इंटर कालेज बीसलपुर में इल्हाम शम्सी की नियुक्ति चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के तौर पर हुई थी।

शासनादेश के अनुसार, उसे मूल पद पर ही काम करना चाहिए था मगर, ऐसा नहीं हुआ। वह जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में लिपिकीय कार्य करने लगा था। बैंक आफ बड़ौदा के रिकार्ड के अनुसार, उसने वर्ष छह जून 2024 में अपनी पत्नी अर्शी खातून का बचत खाता खुलवाया था। इसके बाद अधिकारियों से अपनी पत्नी के बैंक खाते में धनराशि भेजने की स्वीकृति 12 जून 2024 को करा ली।

आरोपित ने पहली बार 12 सितंबर को उस खाते में एक लाख रुपये ट्रेजरी से ट्रांसफर कराए थे, उसी दिन दूसरी बार भी एक लाख रुपये ट्रांसफर हुए। इसके बाद प्रत्येक महीने दो से छह बार तक ट्रेजरी से रकम आती रही। 17 दिसंबर 2025 तक उसके खाते में 98 ट्रेजरी से रकम आई, जोकि 1.01 करोड़ रुपये थी। आरोपित ने 17 दिसंबर 2025 तक 36.41 लाख रुपये यूपीआइ के माध्यम से निकाल लिए।

इस लेनदेन पर बैंक प्रबंधन को शक हुआ, क्योंकि बचत खाता खुलवाते समय अर्शी खातून को नौकरपेशा दर्शाया गया ना ही व्यापारी। ऐसे में हर महीने एक लाख रुपये से अधिक रुपये ट्रेजरी से आने पर शक गहराया। डीएम ने सीडीओ राजेंद्र श्रीवास की अध्यक्षता में कमेटी बनाकर जांच कराई। कमेटी ने अपनी जांच में माना कि आरोपित ने गड़बड़ी करके गबन किया।

इस मामले में कमेटी ने डीआइओएस व लिपिक विमल कुमार को भी आंतरिक दोषी माना। डीआइओएस को पर्यवेक्षणीय रूप से दोषी माना, जबकि विमल कुमार को अपना लागिन आइडी व पासवर्ड यूज करने देने के लिए दोषी माना। इसके बाद डीआइओएस ने आरोपित इल्हाम को शनिवार को निलंबित कर दिया था।

इसके बाद रविवार को डीएम के निदे्रश पर उन्होंने आरोपित और उसकी पत्नी के विरुद्ध गबन करने, लोकसेवक के विश्वासघात करने, कूटरचित दस्तावेज बनाने और आनलाइन जाली दस्तावेज बनाकर प्रयोग करने के मामले में प्राथमिकी पंजीकृत कराई। अब आरोपित के विरुद्ध पुलिस जांच शुरू हो गई। डीएम ने आरोपित की संपत्ति की एक अलग जांच कराने के निर्देश दिए हैं। इससे पूरे मामले में स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपित ने धोखाधड़ी और गबन करके कितनी कमाई की।

डीआइओएस की मानें तो-आरोपित ने कुबूल की गलती, अधिकारी दोषमुक्त

बिल और टोकन जेनरेशन का काम देखता था। आरोपित ने 12 नवंबर से लेकर दिसंबर 2025 तक 98 ट्रांजेक्शन करके 1.01 करोड़ 95,135 रुपये खाते में वेतन मद से बेनिफिशरी मद में गलत तरीके से बनाकर तात्कालीन डीआइओएस और वर्तमान डीआइओएस को धोखे में रखकर गड़बड़ी कर ली। इस मामले में डीआइओएस ने प्राथमिकी में लिखाया कि आरोपित ने अपनी गलती को स्वीकार कर लिया। साथ ही अन्य किसी कर्मचारी या अधिकारी के शामिल न होने की बात भी कही।

सहकर्मी की प्रयोग करता था लागिन आइडी व पासवर्ड

इल्हाम शम्सी को आरोपित को वेतन बिल बनाने जैसा महत्वपूर्ण काम सौंप दिया गया। आरोपित ने सहकर्मी विमल कुमार के आइडी और लागिन का प्रयोग किया, जिससे कि उससे बिलों में गड़बड़ी करके सरकारी खजाने में सेंधमारी कर दी।इस लिहाज से वह भी आंशिक रूप से दोषी हैं। हैरानी यह है कि आरोपित को नियम विरुद्ध लिपिकीय कार्य दिया गया था।

डीआइओएस कार्यालय में संबद्ध गबन के आरोपित इल्हाम शम्सी व उसकी पत्नी अर्शी खातून के विरुद्ध प्राथमिकी पंजीकृत कराई गई। आरोपित की संपत्तियों की जांच करने के लिए भी कमेटी बनाई गई। अन्य विभागों के अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि वे भी अपने विभागों की आंतरिक जांच करा लें। अगर कोई मामला सामने आता है तो उनको भी दोषी मानते हुए कार्रवाई की जाएगी।

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