‘कानून बनाने में सरकार बार-बार हो रही बेनकाब’, जयराम ठाकुर का सुक्खू सरकार पर हमला

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कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति नियुक्ति कानून पर हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत; बोले- बहुमत से कानून बन सकता है, संविधान से ऊपर कोई नहीं

एएम नाथ। शिमला। पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति की नियुक्ति में सरकार के हस्तक्षेप से संबंधित कानून को उच्च न्यायालय द्वारा रद्द किए जाने के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि सरकार बार-बार ऐसे कानून और फैसले ले रही है, जिन्हें न्यायिक समीक्षा में चुनौती मिल रही है।

जयराम ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री खुद को कानून का जानकार बताते हैं, लेकिन सरकार द्वारा बनाए जा रहे कई कानून न्यायालय की कसौटी पर टिक नहीं पा रहे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने अपनी राजनीतिक यात्रा विश्वविद्यालय से ही शुरू की थी, शायद इसलिए वह अब भी विश्वविद्यालय की राजनीति से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं।

‘विश्वविद्यालयों को विभागों की तरह चलाने की कोशिश’

नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार विश्वविद्यालयों को स्वायत्त संस्थानों की बजाय सरकारी विभागों की तरह संचालित करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय का फैसला सरकार की इस सोच को एक बार फिर झटका है।

जयराम ठाकुर ने कहा कि विपक्ष विधानसभा के भीतर कई बार सरकार को आगाह करता रहा है कि ऐसे कानून न बनाए जाएं, जो संविधान और न्यायिक समीक्षा की कसौटी पर खरे न उतरें। उनके मुताबिक, जब विधानसभा से पारित कानून न्यायालय में रद्द होते हैं तो इससे केवल सरकार की छवि ही प्रभावित नहीं होती, बल्कि विधानसभा की गरिमा पर भी सवाल खड़े होते हैं।

पेंशन और प्रमोशन के मामलों का भी दिया हवाला

जयराम ठाकुर ने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब सरकार को न्यायालय से झटका लगा हो। उन्होंने पूर्व विधायकों की पेंशन समाप्त करने के लिए बनाए गए कानून का हवाला देते हुए कहा कि उसे हाईकोर्ट ने अवैध करार दिया था।

उन्होंने कर्मचारियों के प्रमोशन के अधिकार से जुड़े मामले और पंचायत चुनावों को लेकर न्यायालय से मिले फैसलों का भी उल्लेख किया। उनका आरोप था कि सरकार फैसले लेते समय संवैधानिक सीमाओं और न्यायिक प्रक्रिया का पर्याप्त ध्यान नहीं रख रही है।

‘बहुमत से कानून पारित हो सकता है, संविधान से ऊपर नहीं’

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सरकार को यह समझना होगा कि विधानसभा में बहुमत के आधार पर कानून पारित किया जा सकता है, लेकिन संविधान से ऊपर कोई नहीं है।

उन्होंने मुख्यमंत्री पर पद की मर्यादा और विधानसभा की गरिमा का ध्यान नहीं रखने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार को कानून बनाते समय संवैधानिक प्रावधानों और न्यायिक समीक्षा की संभावनाओं को गंभीरता से ध्यान में रखना चाहिए।

जयराम ठाकुर ने कहा कि बार-बार न्यायालय में सरकार के फैसलों को चुनौती मिलना इस बात का संकेत है कि कानून बनाने की प्रक्रिया में संवैधानिक पहलुओं पर अधिक गंभीरता से विचार करने की जरूरत है।

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