गढ़शंकर, 1 जून : जीआईजेड-जीपीएस रिन्यूएबल प्रोजेक्ट और वर्टीवर प्राइवेट लिमिटेड की ओर से गढ़शंकर के गांव गढ़ी में फसलों के अवशेषों के प्रबंधन संबंधी कार्यशालाएं आयोजित कर किसानों को जागरूक किया गया।
ये कार्यशालाएं वर्टीवर प्राइवेट लिमिटेड द्वारा किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से आयोजित की जा रही हैं। “भारत में बायोमास आधारित जीवाश्म ईंधन के विकल्पों के माध्यम से वायु गुणवत्ता में सुधार” नामक यह प्रोजेक्ट जीआईजेड और जीपीएस रिन्यूएबल के बीच सरकारी-निजी भागीदारी का हिस्सा है। यह पहल हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश में जर्मन फेडरल मिनिस्ट्री फॉर इकनॉमिक कोऑपरेशन एंड डेवलपमेंट (BMZ) द्वारा वित्तपोषित बहु-राज्यीय प्रोजेक्ट के अंतर्गत चलाई जा रही है।
जानकारी देते हुए बताया गया कि भारत में हर साल लगभग 500 मिलियन टन फसलों की पराली/नाड़ पैदा होती है, जिसका बड़ा हिस्सा समय, मजदूरी और अन्य संसाधनों की कमी के कारण जला दिया जाता है। इससे न केवल वायु प्रदूषण बढ़ता है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता और लाभकारी सूक्ष्मजीवों को भी नुकसान पहुंचता है।
कार्यशाला के दौरान किसानों ने बढ़ती खेती लागत, मशीनों की सीमित उपलब्धता, स्टोरेज ढांचे और बाजार संपर्क जैसी चुनौतियों पर भी चर्चा की। किसानों ने बेलर और सुपर सीडर जैसी मशीनों की सस्ती उपलब्धता, सरकारी सब्सिडी और समय पर पराली एकत्र करने संबंधी सवाल भी उठाए।
फील्ड एसोसिएट मनदीप कौर ने सत्रों के दौरान इन-सीटू और एक्स-सीटू दोनों प्रकार की फसल अवशेष प्रबंधन तकनीकों की जानकारी दी। उन्होंने सुपर सीडर, हैप्पी सीडर, मल्चर और बेलर मशीनों के उपयोग के साथ-साथ बायो एनर्जी और कम्प्रेस्ड बायोगैस से जुड़ी संभावनाओं पर भी विस्तार से प्रकाश डाला।
