H1B वीजा धारकों के लिए बड़ी राहत, अमेरिका ने जारी की नई गाइडलाइन : इसके बावजूद अमेरिका में रह रहे भारतीय टेंशन में चल रहे

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वॉशिंगटन: अमेरिका की ट्रंप सरकार की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि एच-1बी वीजाके लिए बढ़ाया गया 1 लाख डॉलर का वार्षिक शुल्क मौजूदा वीज़ा धारकों पर लागू नहीं होगा। इसके बाद भी ऐसे वीजा धारकों की चितांए और आशंकाएं कम नहीं हो रहीं हैं। पिछले वित्त वर्ष में सबसे ज्यादा करीब 71 फीसदी एच-1बी वीज़ा भारतीय पेशेवरों को जारी किए गए। लिहाजा सबसे बड़े लाभार्थी समूह भारतीय ही हैं और इसलिए इसमें किसी भी तरह के बदलाव से सबसे ज्यादा चिंतित भी यही लोग हैं। एच-1बी वीज़ा अमेरिका में बैंक, बीमा कंपनियों, एयरलाइंस, औद्योगिक प्रतिष्ठान, स्वास्थ्य सेवा प्रदाता, निर्माता, होटल उद्योग और टेक कंपनियों में विशेष कुशलता वाले प्रवासी कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए तीन वर्ष के लिए जारी किया जाने वाला एक अस्थायी वीजा है। इसकी अवधि छह वर्ष तक बढ़ाई जा सकती है।

एच-1बी वीज़ा के बाद अमेरिका में स्थायी निवासी का कानूनी अधिकार पाने के लिए ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करना होता है लेकिन इसकी लाइन इतनी लंबी है कि आवेदकों को इसे हासिल करने के लिए 20 साल से भी अधिक की प्रतीक्षा करनी पड़ सकती है। इस बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से वार्षिक वीजा शुल्क बढ़ाकर 1 लाख डॉलर करने की घोषणा से भारत और अमेरिका दोनों ही जगह की टेक कंपनियों और वहां काम कर रहे पेशेवरों में हड़कंप मच गया।

अमेरिका में एच-1बी वीजा धारकों की प्रतिक्रिया :

मैंने जब ऐसे ही कुछ एच-1बी वीजा धारकों से संपर्क कर जानना चाहा कि आखिर वे वीजा शुल्क में बढ़ोतरी से मिली छूट के बावजूद चिंतित क्यों हैं, तो इनकी अलग अलग प्रतिक्रिया देखने को मिली। कैलिफोर्निया में वेब होस्टिंग क्षेत्र की एक अग्रणी अमेरिकी कंपनी “गो डैडी” में पिछले चार साल से कार्यरत बेंगलुरू की गायत्री ने कहा, ‘चिंता हमेशा ही रहती है। ट्रंप सरकार प्रवासियों के प्रति जिस तरह का रवैया दिखा रही है, उससे हमेशा ही खतरा महसूस होता है। कब ये क्या नियम लेकर आ जाएंगे कहना मुश्किल है।’ गायत्री स्टूडेंट वीजा पर अमेरिका आने के बाद अब एच-1बी वीजा पर हैं। स्टेटस चेंज होने के बाद वीजा धारक को अपने देश जाकर वहां अमेरिकी दूतावास से स्टैंपिंग करानी पड़ती है। लिहाजा वो भी इसके लिए भारत जाना चाहती हैं, पर हाल में जो कुछ हुआ है, उसे देखकर उन्हें यह चिंता सता रही है कि कहीं उन्हें वापसी में अमेरिका में प्रवेश में कोई दिक्कत नहीं हो जाए।

भारतीय समुदाय की प्रतिक्रिया

बेहद अफसोस की बात है कि यहां आकर स्थायी रूप से बस चुके भारतीय समुदाय के लोग ट्रंप्र शासन के एच 1बी वीजा शुल्क बढ़ाए जाने के फैसले को ग़लत नहीं मान रहे। शायद इसके पीछे उनकी यह सोच काम कर रही है कि जितने अधिक प्रवासी आएंगे उनके लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। अमेज़न, City Group, जेपी मॉर्गन चेस और ब्लूमबर्ग जैसी नामी गिरामी कंपनियों में उच्च पदों पर बैठे भारतीय मूल के कई लोगों से जब मैंने यह जानना चाहा कि उन्हें ट्रंप के फैसले के खिलाफ लॉबियिंग करनी चाहिए क्योंकि वह अब अमेरिका के मतदाता हैं तो इनमें से अधिकतर ने यही कहा कि रोजगार के अवसर कम हो रहे हैं। हर जगह एआई का इस्तेमाल करने का दबाव डाला जा रहा है ऐसे में कल को हमारे लिए ही नौकरी रहेगी कि नहीं पता नहीं। ऐसे में और लोग यहां आ गये तो हालात और विषम हो जाएंगे।

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