केंद्र सरकार के परिसीमन के प्रस्ताव के विरोध में कांग्रेस, कहा- जनता का ध्यान भटकाने का हथियार

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नई दिल्ली: कांग्रेस ने रविवार (5 मार्च) को महिला आरक्षण कानून के कार्यान्वयन से संबंधित मोदी सरकार के परिसीमन प्रस्ताव पर तीखा हमला करते हुए कहा कि यह कदम बड़े और अधिक आबादी वाले राज्यों को लाभ पहुंचाएगा, जबकि अन्य राज्यों का प्रभाव कम करेगा।

साथ ही इसे ‘जनता का ध्यान भटकाने का हथियार’ बताया।  प्रमुख विपक्षी दल ने यह भी आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यह दावा करके लोगों को ‘गुमराह’ कर रहे हैं कि प्रस्तावित बदलावों के तहत लोकसभा में दक्षिणी राज्यों की संख्या कम नहीं होगी, जबकि इससे अधिक आबादी वाले राज्यों और अन्य राज्यों के बीच सीटों की संख्या में अंतर बढ़ जाएगा।

सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में कांग्रेस के संचार प्रभारी और महासचिव जयराम रमेश ने कहा, ‘प्रधानमंत्री हमेशा की तरह भ्रामक बयान देकर धोखा देने की कोशिश कर रहे हैं।

उन्होंने आगे कहा कि यदि लोकसभा की कुल सीटों और राज्यों की सीटों में समान रूप से 50 प्रतिशत वृद्धि की जाए, तो दक्षिण भारतीय राज्यों को नुकसान नहीं होगा. उन्होंने दावा किया कि मौजूदा प्रस्ताव से राज्यों के बीच प्रतिनिधित्व का अंतर और बढ़ जाएगा।

उदाहरण देते हुए जयराम रमेश ने कहा कि इस प्रस्ताव से उत्तर प्रदेश और केरल के बीच सीटों का अंतर 60 से बढ़कर 90 तक पहुंच सकता है, जबकि उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु के बीच यह अंतर 41 से बढ़कर कम से कम 61 हो सकता है।

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि पीएम मोदी एक ऐसे प्रस्ताव को जबरदस्ती थोप रहे हैं जिससे बड़े और अधिक आबादी वाले राज्यों को ही फायदा होगा, क्योंकि उनकी पहले से ही बड़ी आबादी और भी बढ़ जाएगी।उन्होंने तर्क दिया कि इससे न केवल दक्षिण भारत बल्कि पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों और पूर्वोत्तर के राज्यों का सापेक्षिक प्रभाव भी कम हो जाएगा।

जयराम रमेश ने कहा, ‘देश इस समय आर्थिक और विदेश नीति से जुड़े गंभीर मुद्दों का सामना कर रहा है, लेकिन सरकार का ध्यान सीटों की संख्या बढ़ाने पर केंद्रित है. वो भी बिना किसी सार्थक परामर्श और व्यापक जन चर्चा के. यह जनता ता ध्यान भटकाने का एक हथियार मात्र है।

मामले का परिप्रेक्ष्य :  रमेश के पोस्ट को टैग करते हुए कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा कि जयराम रमेश की भविष्यवाणी बिल्कुल सटीक है और प्रधानमंत्री मोदी की बयानबाजी पूरी तरह से गलत है।

मनीष तिवारी ने कहा, ‘इस बात पर ध्यान केंद्रित करना होगा कि हिंदी भाषी राज्यों की तुलना में दक्षिण भारत, पश्चिम भारत, पूर्वोत्तर भारत और उत्तर पश्चिमी भारत को राजनीतिक प्रभाव के मामले में खासकर संसदीय सीट की संख्या में अंतर के संदर्भ में कितना नुकसान होगा।

चंडीगढ़ के सांसद ने बताया कि पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर और दिल्ली जैसे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पास लोकसभा में कुल मिलाकर सिर्फ 40 सीट हैं जबकि उत्तर प्रदेश के पास 80 सीट हैं। उन्होंने कहा, ‘परिसीमन के बाद यह अंतर और भी बढ़ जाएगा।

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