खामेनेई की इजरायल को कौन दे रहा था जानकारी ? लोकेशन कैसे हुई ट्रेस, हमला कब करना है; पूरी प्लानिंग की डिटेल्स सामने आईं

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ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को मारने का राज क्या था? कौन दे रहा था उनकी एक-एक सांस की जानकारी? कैसे पता चली लोकेशन?

और हमला कब करना है ये भी पहले से जब तय था तो आखिरी समय पर इजरायल ने क्यों मन बदला, आखिर किसने तय किया कि अब करना है हमला? न्यूयॉर्क टाइम्स की ताजा रिपोर्ट में सब कुछ खुलासा हो गया है. समझते हैं एक-एक करके पूरी बात।

महीनों पहले शुरू हो गया था ऑपरेशन
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका की खुफिया एजेंसी CIA कई महीनों से ईरानी नेतृत्व की गतिविधियों पर नजर रख रही थी. खास तौर पर सुप्रीम लीडर Ayatollah Ali Khamenei की मूवमेंट, मीटिंग शेड्यूल और सुरक्षा व्यवस्था का लगातार विश्लेषण किया जा रहा था. खुफिया एजेंसियों ने धीरे-धीरे उनके आने-जाने के पैटर्न को समझ लिया था. रिपोर्ट के अनुसार, यही लंबी निगरानी आगे चलकर पूरे ऑपरेशन की नींव बनी।

एक मीटिंग ने बदल दिया पूरा खेल
सबसे अहम जानकारी तब मिली जब एजेंसियों को पता चला कि तेहरान में शीर्ष ईरानी नेताओं की एक अहम बैठक होने वाली है. जानकारी यह भी थी कि इस बैठक में खुद सुप्रीम लीडर मौजूद रहेंगे. यह सूचना अमेरिका और Israel के लिए बड़ा मौका मानी गई. इसी इनपुट के बाद सैन्य कार्रवाई की टाइमिंग पर दोबारा विचार शुरू हुआ।

आखिरी वक्त पर क्यों बदला गया फैसला?
रिपोर्ट बताती है कि हमला पहले तय समय पर नहीं किया गया. खुफिया एजेंसियों ने इंतजार किया ताकि यह पूरी तरह पक्का हो जाए कि टारगेट उसी जगह मौजूद है. जब CIA ने “हाई-कॉन्फिडेंस” इंटेलिजेंस साझा किया, तभी अमेरिका और इजराइल के अधिकारी बैठे और फैसला किया कि क्यों न इसी मौके का फायदा उठाया जाए? अगर मीटिंग के दौरान हमला कर दिया तो एक साथ कई बड़े नेता खत्म हो जाएंगे. यही सोचकर टाइमिंग बदल दी गई. पहले रात का प्लान था, लेकिन अब दिनदहाड़े 9:40 बजे (तेहरान टाइम) हमला करने का फैसला लिया गया.।

खामेनेई की लोकेशन कैसे हुई ट्रेस?
सूत्रों के अनुसार, निगरानी कई स्तरों पर चल रही थी. सैटेलाइट इमेज, इलेक्ट्रॉनिक ट्रैकिंग और मानवीय खुफिया नेटवर्क से मिली जानकारी को मिलाकर लोकेशन तय की गई. जब सभी इनपुट एक जैसे मिले, तब कार्रवाई को हरी झंडी मिली।

खामेनेई को मारने का प्लान किसका था? किसने लिया फैसला
ये जॉइंट डिसीजन था.अमेरिकी और इजराइली टॉप अधिकारी, इंटेलिजेंस चीफ और मिलिट्री कमांडर्स ने मिलकर तय किया.CIA ने सिर्फ इंटेल दी, लेकिन हमला कब और कैसे करना है ये दोनों देशों ने साथ मिलकर फाइनल किया. इजरायली फाइटर जेट्स ने तीन जगहों पर एक साथ हमला किया. सिर्फ 60 सेकंड में तीन स्ट्राइक्स. खामेनेई का कंपाउंड, आसपास के दो और पॉइंट्स. सब तबाह हो गए.सैटेलाइट इमेज में धुआं और मलबा साफ दिख रहा है।

ईरान से कहां हुई बड़ी चूक?
विश्लेषकों का मानना है कि बढ़ते तनाव के बावजूद कई शीर्ष नेताओं का एक ही परिसर में मौजूद होना सबसे बड़ी सुरक्षा कमजोरी साबित हुई. यही वह मौका था जिसका फायदा उठाया गया. इस घटना के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है. विशेषज्ञों का कहना है कि यह सिर्फ एक हमला नहीं, बल्कि खुफिया रणनीति की ताकत का बड़ा उदाहरण है, जिसका असर आने वाले समय में क्षेत्रीय राजनीति पर दिख सकता है।

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