गढ़शंकर के गांव बीनेवाल के जंगल बड़े सत्तर पर चलाया जा रहा अवैध खैर का डिपो : पंजाब व हिमाचल से चोरी खैर के पेड़ काट कर खैर इस डिपो में पहुंचाया जाता

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वन माफिया चोरी पेड़ काट कर लेकर आने वालों से चार से पांच हजार में प्रति किवंटल खरीदता है खैर की लकड़ और आगे वेचता 14 से 15 हजार प्रति क्विंटल
गढ़शंकर :  वन माफिया दुआरा गढ़शंकर के बीत इलाके गांव बीनेवाल के जंगल मे हिमाचल प्रदेश की सीमा के निकट खैर का अवैध डिपो शरेआम चलाया जा रहा है। जिसमें कल शाम तक करीब 30 क्विंटल खैर के पेड़ के छाल उतारी खैर की लकड़ और खैर के पेड़ों की छाल भी भारी मात्रा में विखरे पड़े थे। जिससे साफ है कि विभाग की मिलिभुगत से वन माफिया जंगलो में अंधाधुंध खैर के पेड़ काट कर अवैध डिपो में एकत्र कर भारी मुनाफा काट रहा है।
बीनेवाल के जंगल मे खैर के डिपो में बीत इलाके के इलावा पंजाब और हिमाचल के जंगलों में चोरी खैर के पेड़ काट कर पहुंचाए जाते है। अवैध डिपो में खैर तस्करों ने खैर की लकड़ तोलने के लिए भार तोलने के लिए डिजिटल मशीन लगाई हुई है और दो सीढ़ीयां भी गाड़ीयों में उप्पर तक ख़ैर की लकड़ लादने के लिए रखी हुई। इसके इलावा चुल्लहा बनाया हुआ और वहां चरपाई भी रखी हुई थी। जिससे साफ हो जाता है खैर तस्कर बड़े सत्तर पर खैर तस्करी का धंधा चलाया जाता है।
अवैध खैर के डिपो से खैर की लकड़ की तस्करी की जाती :  पंजाब के गांव बीनेवाल के जंगल में हिमाचल प्रदेश की सीमा के निकट खैर के लकड़ की छिलाई कर आगे महंगे दामो पर वेचने के लिए लंबे समय स्व अवैध डिपो चलाया जा रहा है। जिसमे निकटवर्ती जंगलो से वेशकीमती खैर के पेड़ काट कर उक्त डिपो में एकत्र किए जाते है। खैर के काट कर लाए गए पेड़ों के टुकड़ों के छिलके उतारे जाते है और फिर हर सप्ताह 100 स्व 150 क्विंटल खैर की लकड़ ज्यादा टाटा 407 में भर कर रात के अंधेरे में फैक्ट्रियों तक पहुंचाया जाता है।
डिपो में चोरी खैर की लकड़ खरीदी जाती : वन माफिया ने पंजाब व हिमाचल के जंगलों से किसानों की  जंगली जमीन से चोरी काटने वाले लोगो से खैर खरीदा जाता है। इसके इलावा वन माफिया ने विभाग से बिना परमिट लिए जंगलों के खड़े  खैर के पेड़ व चोरी खुद कटवा कर डिपो में लाया जाता है। सूत्रों की माने तो हिमाचल के दूर दराज के जंगलों से खैर के पेड़ काट कर हिमाचल के वन माफिया यहां डिपो में पहुंचाता है।
वन माफिया खैर की भारी कीमत के चलते मुनाफा काट रहा : वन माफिया किसानों के जंगलों की जमीन से चोरी  खैर के पेड़ों को काट कर लाने वालों से औने पौने दामों पर खरीद लेता है। वन माफ़िया प्रति क्विंटल खैर 4000 से 5000 रुपए खरीदता है और आगे करीब 14 हज़ार प्रति क्विंटल वेचते है। ख़ैर माफिया बार सप्ताह 100 से 150 क्विंटल के करीब खैर की लकड़ आगे वेच कर हर सप्ताह अंदाजन 10 लाख की खैर तस्कर काली कमाई करते है। इस तरह हर महीने 40 लाख और एक साल में ही करीब पांच करोड़ तक मुनाफा काट रहा है।
पूर्व सरपंच कुलभुषण कुमार : वन माफिया विभाग की मिलिभुगत के बिना इतने बड़े सत्तर पर अवैध खैर का डिपो नही चला सकता। वन विभाग ने खैर माफिया को बचाने की कोशिश की तो सरकार प विभाग के खिलाफ2 प्रदर्शन किया जाएगा। बीत के जंगल खैर माफीए ने तबाह कर दिए है।
डीएफओ हरभजन सिंह : बीनेवाल के  जंगल मे किसी को भी  डिपो चलाने की इजाजत नही दी गई है। बीनेवाल के जंगल मे  चल रहे अवैध डिपो चल रहा है तो कर्मचारियों को भेज कर चेक करवा कर कड़ी करवाई की जाएगी। किसी को भी जंगलो से खैर व अन्य किस्म के पेड़ों को काटने नही दिए जाएंगे। ′
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