गढ़शंकर में फूंका मुख्यमंत्री का पुतला : धमकी भरे सरकारी पत्रों पर संगठनों का सरकार को दो टूक जवाब—डरने वाले नहीं, मांगें पूरी होने तक आर-पार की लड़ाई जारी रहेगी

by

गढ़शंकर, 27 अगस्त। पंजाब के मुख्यमंत्री द्वारा कर्मचारियों और पेंशनरों के साथ प्रस्तावित बैठक ऐन मौके पर रद्द किए जाने तथा आंदोलन कर रहे कर्मचारियों को कथित रूप से डराने-धमकाने के लिए विभिन्न विभागों से पत्र जारी किए जाने के विरोध में कर्मचारी संगठनों का गुस्सा सड़क पर उतर आया। पंजाब कर्मचारी एवं पेंशनर सांझा मोर्चा तथा सांझा कर्मचारी मंच पंजाब की तालमेल कमेटी के आह्वान पर सांझी तालमेल कमेटी गढ़शंकर ने स्थानीय कचहरियों के सामने मुख्यमंत्री पंजाब का पुतला फूंककर सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की।

प्रदर्शन के दौरान कर्मचारी नेताओं मुकेश कुमार, मख्खण मोइलावाहदपुरी, संदीप सिंह गिल, प्रिंसिपल बिक्कर सिंह, विनोद कुमार, सुखदेव डानसीवाल, नरेश कुमार, शंगारा भज्जल, सुंदर मणियम, नरेंद्र और अमरीक सिंह ने पंजाब सरकार पर कर्मचारियों की मांगों के प्रति गंभीर नहीं होने का आरोप लगाया। नेताओं ने कहा कि सरकार बातचीत के जरिए समाधान निकालने के बजाय कर्मचारियों के साथ टकराव का रास्ता अपना रही है।

नेताओं ने कहा कि कर्मचारियों को बैठक के लिए बुलाना और फिर ऐन समय पर पीछे हट जाना सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि 27 अगस्त को कर्मचारियों द्वारा सामूहिक छुट्टी लेकर लोकतांत्रिक तरीके से किए गए विरोध के बाद सरकार ने दबाव बनाने के लिए विभिन्न विभागों से पत्र जारी करवाने शुरू कर दिए।

धमकियों से आंदोलन दबाने का सपना छोड़ दे सरकार’

मोर्चे के नेताओं बलकार सिंह मघाणिया, हंसराज, प्रिंसिपल दरबारा सिंह, विनय कुमार, समुंदर, सतनाम सिंह बंगड़, प्रदीप कुमार, जरनैल सिंह, गुरमेल सिंह, पवन कुमार, जगदीश, रमन कुमार, गुरमेल सिंह पीटी, जोगिंदर सिंह, चन्नण राम, रमेश लाल, नरेंद्र कुमार, इंदरजीत कौर, चरणजीत कौर और हरप्रीत कौर ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि कर्मचारियों को धमकाकर उनके आंदोलन को खत्म नहीं किया जा सकता।

उन्होंने कहा कि 27 अगस्त को पूरे पंजाब में कर्मचारियों ने सामूहिक छुट्टी लेकर सरकार के खिलाफ अपना रोष दर्ज कराया है।  यह कर्मचारियों का लोकतांत्रिक अधिकार है। नेताओं के अनुसार मुख्यमंत्री ने इसके बाद कहा कि संघर्ष और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते, लेकिन कर्मचारी संगठनों का कहना है कि बातचीत का रास्ता सरकार ने स्वयं बंद किया है।

मांगें नहीं मानीं तो संघर्ष होगा और तेज’

कर्मचारी नेताओं ने कहा कि पंजाब के कर्मचारी और पेंशनर किसी भी दबाव में पीछे हटने वाले नहीं हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार अगर कर्मचारियों की जायज मांगों को बातचीत के माध्यम से हल करने के बजाय धमकी और दबाव की नीति अपनाती है तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

उन्होंने सरकार को दो टूक चेतावनी दी कि धमकी भरे पत्रों से न कर्मचारी डरेंगे और न ही पेंशनर पीछे हटेंगे। मांगें पूरी होने तक संघर्ष जारी रहेगा और आने वाले दिनों में सरकार के खिलाफ आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।

Share
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

You may also like

article-image
पंजाब

मामला : ब्रिटेन में सिख बस चालक पर जानलेवा हमले का खन्ना ने लिया कड़ा संज्ञान, दोषी को सजा दिलवाने के लिए विदेश मंत्रालय के समक्ष उठाया मामला

होशियारपुर 24 सितम्बर :  पूर्व सांसद एवं वरिष्ठ भाजपा नेता अविनाश राय खन्ना ने ब्रिटेन में एक सिख बस चालक पर हुए हमले की घोर निंदा करते हुए मामले का कड़ा संज्ञान लिया है।...
article-image
पंजाब , समाचार

मैहिंदवानी में जंगल में बकरियों के तवेले में से सात बकरियों को बाघ ने मार डाला और एक को उठा कर ले गया : विभाग ने कहा बाघ नहीं तेंदुयां ने मारा होगा , इन जंगलों में बाघ नहीं तेदुएं है

गढ़शंकर । गांव मैहिंदवानी में जंगल में बने घर के साथ लगते पशुओं में तवेले में से सात बकरियों को बाघ ने मार डाला और उन्में से एक को उठा कर ले गया। जिसके...
article-image
पंजाब

मुख्यमंत्री की पकड़ ढीली, बजट अनुमान की बैठकों में भी नहीं पहुंच रहे हैं अधिकारी : जयराम ठाकुर

सरकार का हाल, महत्वपूर्ण मीटिंग में अधिकारी दे रहे हैं काल्पनिक आंकड़े,  हिमाचल में बनने वाला देश का सबसे बड़ा रोपवे पूर्व की भाजपा सरकार की उपलब्धि एएम नाथ। मंडी :  अपने विधान सभा...
article-image
पंजाब

क्या राज्यपाल को इस बात का जरा भी अंदेशा है कि वो आग से खेल रहे हैं : सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने की बड़ी टिप्पणी

नई दिल्ली : पंजाब सरकार और राज्यपाल के बीच खींचतान के मसले पर आज सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने बड़ी टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा है कि क्या राज्यपाल को इस बात...
Translate »
error: Content is protected !!