मुश्किलों से लड़कर वापसी करने वाली पंजाब की शॉट पुट एथलीट ने खत्म किया सालों का इंतजार, एशियन गेम्स में पदक जीतने वाली तीसरी भारतीय महिला बनीं
नई दिल्ली। पंजाब की मिट्टी से निकली शॉट पुट एथलीट मनप्रीत कौर ने 36 वर्ष की उम्र में वह कर दिखाया, जिसका इंतजार उन्हें वर्षों से था। एशियन गेम्स 2026 में मनप्रीत ने महिला शॉट पुट स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर भारतीय एथलेटिक्स में अपनी खास पहचान दर्ज कराई। इस स्पर्धा में एशियन गेम्स पदक जीतने वाली वह तीसरी भारतीय महिला एथलीट बनीं।
एक किसान परिवार से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचने वाली मनप्रीत की कहानी सिर्फ पदक की नहीं, बल्कि संघर्ष, प्रतिबंध और फिर शानदार वापसी की कहानी है।
किसान पिता की बेटी, सीमित साधनों से शुरू हुआ सफर
पंजाब के ग्रामीण परिवेश में पली-बढ़ी मनप्रीत के पिता किसान थे। परिवार की सीमित आर्थिक परिस्थितियों और खेल सुविधाओं के अभाव के बावजूद उन्होंने खेल को अपना रास्ता बनाया। ताकत, तकनीक और निरंतर अभ्यास की जरूरत वाले शॉट पुट में उन्होंने मेहनत के दम पर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई।
खेल के मैदान में आगे बढ़ने के साथ मनप्रीत ने कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व किया। लेकिन उनके करियर में ऐसा दौर भी आया, जिसने उनके सामने खेल छोड़ने तक की चुनौती खड़ी कर दी।
2017 में डोपिंग बैन ने रोक दी रफ्तार
2017 में डोपिंग परीक्षण में असफल रहने के बाद मनप्रीत पर चार साल का प्रतिबंध लगा। चार साल तक प्रतिस्पर्धी खेल से दूर रहना किसी भी खिलाड़ी के करियर के लिए बेहद कठिन दौर होता है। इस दौरान उनके सामने भविष्य को लेकर कई सवाल खड़े हुए।
लेकिन मनप्रीत ने वापसी की उम्मीद नहीं छोड़ी। प्रतिबंध के दौरान उन्होंने अपनी फिटनेस और खेल तकनीक पर काम जारी रखा। बैन समाप्त होने के बाद उन्होंने मैदान पर वापसी की और धीरे-धीरे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फिर अपनी जगह बनानी शुरू की।
2023 में कांस्य से मिली वापसी को मजबूती
बैंकॉक में 2023 एशियन चैंपियनशिप में मनप्रीत ने कांस्य पदक हासिल किया। इस प्रदर्शन ने उनकी वापसी को मजबूती दी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बार फिर उनकी मौजूदगी दर्ज कराई।
इसके बाद उनकी नजर बड़े मंच पर पदक जीतने पर थी। एशियन गेम्स 2026 में उनका वही सपना पूरा हुआ।
17.17 मीटर का थ्रो बना पदक की वजह
महिला शॉट पुट फाइनल में मनप्रीत ने पहले प्रयास में 16.32 मीटर का थ्रो किया। दूसरे प्रयास में उन्होंने 16.41 मीटर और तीसरे प्रयास में 16.80 मीटर की दूरी तय की।
चौथे प्रयास में मनप्रीत ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 17.17 मीटर का थ्रो किया। यही उनका निर्णायक प्रदर्शन रहा और उन्हें कांस्य पदक दिलाने में कामयाब रहा।
पांचवें प्रयास में उन्होंने 16.75 मीटर का थ्रो किया, जबकि छठा प्रयास फाउल रहा। इसके बावजूद चौथे प्रयास का 17.17 मीटर का प्रदर्शन उन्हें पॉडियम तक पहुंचाने के लिए पर्याप्त रहा।
उम्र नहीं बनी मंजिल, संघर्ष बना ताकत
36 वर्ष की उम्र में एशियन गेम्स पदक जीतकर मनप्रीत ने अपने करियर का एक यादगार अध्याय लिखा। चार साल के प्रतिबंध के बाद अंतरराष्ट्रीय एथलेटिक्स में वापसी और फिर एशियन गेम्स के मंच पर पदक तक पहुंचना उनके लंबे संघर्ष को दर्शाता है।
एक किसान परिवार से शुरू हुआ सफर अब अंतरराष्ट्रीय पदक तक पहुंच चुका है। मनप्रीत कौर की कहानी युवा खिलाड़ियों के लिए मेहनत, धैर्य और वापसी की मिसाल बनकर सामने आई है।
