ऐतिहासिक छतराड़ी जात्र मेले को राज्य स्तरीय दर्जा मिलने से बढ़ी पहचान : पठानिया
लोक संस्कृति के रंग में रंगा छतराड़ी जात्र मेला, डंडारस में शामिल हुए पठानिया
एएम नाथ। चंबा : हिमाचल प्रदेश विधानसभा के उप मुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया ने मंगलवार को मां शिव-शक्ति के ऐतिहासिक मंदिर परिसर छतराड़ी में आयोजित राज्य स्तरीय जात्र मेले में भाग लिया। उन्होंने पारंपरिक गद्दी वेशभूषा चोला-डोरा पहनकर मां शिव-शक्ति की पूजा-अर्चना की और प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि की कामना की। इस दौरान शहनाई, ढोल-नगाड़ों की स्वर लहरियों के बीच उन्होंने स्थानीय लोगों के साथ डंडारस लोकनृत्य में भी हिस्सा लिया।
पठानिया ने कहा कि हिमाचल की समृद्ध लोक कला और संस्कृति प्रदेश की विशिष्ट पहचान है। पारंपरिक वेशभूषा, लोक संगीत और लोक परंपराएं पीढ़ियों से सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए हुए हैं। उन्होंने कहा कि चंबा की सांस्कृतिक विरासत और यहां की पारंपरिक वेशभूषा के प्रति उनका विशेष लगाव है। उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का छतराड़ी जात्र मेले को राज्य स्तरीय दर्जा प्रदान करने के लिए आभार जताते हुए कहा कि इससे मेले की ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक महत्ता को व्यापक पहचान मिली है।
उन्होंने मेले में भाग लेने वाले लोकनाट्य दलों के प्रतिभागियों को सेलो ग्लास वेयर भी वितरित किए। साथ ही लोगों से जिले में क्षय रोग उन्मूलन के लिए निक्षय मित्र बनने का आग्रह किया।
छतराड़ी का मां शिव-शक्ति मंदिर जिला मुख्यालय से करीब 48 किलोमीटर दूर स्थित है और क्षेत्रवासियों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। मान्यता के अनुसार मंदिर का निर्माण लगभग 780 ईस्वी में हुआ था। मंदिर की स्थापत्य विशेषताओं और प्राचीन धार्मिक परंपराओं से जुड़ी मान्यताएं आज भी लोक आस्था का हिस्सा हैं।
राधाष्टमी के दूसरे दिन से यहां चार दिवसीय जात्र मेले का आयोजन होता है। मणिमहेश डल झील से पवित्र जल लाकर मां की मूर्ति को स्नान करवाने के बाद विधिवत पूजा-अर्चना की जाती है। खप्पर बुढ़ा नृत्य और पारंपरिक चोले-डोरे, लंबी टोपी व कलगी के साथ प्रस्तुत डंडारस लोकनृत्य मेले के प्रमुख आकर्षण हैं। मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और स्थानीय लोग पहुंचते हैं।
