सन्नी के कबूलनामे में जम्मू जेल से शुरू हुई साजिश की कड़ी; जालंधर और तरनतारन से हथियार व 50 हजार रुपए मिलने का दावा
चंडीगढ़। चर्चित जानकी दास हत्याकांड में पुलिस की ओर से दाखिल चार्जशीट को लेकर सवाल उठ रहे हैं। पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी जांच के शुरुआती दौर में विदेश में बैठे गैंगस्टर राणा ढिल्लों और गोल्डी ढिल्लों को हत्या की साजिश से जोड़ते रहे थे। हालांकि, उपलब्ध चार्जशीट की जानकारी के मुताबिक दोनों के नाम आरोपियों की सूची में शामिल नहीं हैं।
चार्जशीट में शामिल आरोपी सन्नी के कथित कबूलनामे में हत्या की साजिश की कड़ी जम्मू की आमफला जेल से जुड़ती बताई गई है। सन्नी के मुताबिक, अमित उर्फ शराबी ने उसे बताया था कि उसका दोस्त रोहित उर्फ मक्खन जम्मू जेल में बंद है और चंडीगढ़ में “बड़ा काम” करवाना चाहता है। इसके बदले मोटी रकम देने की बात कही गई थी।
जालंधर से अमृतसर और फिर तरनतारन पहुंचे
सन्नी के बयान के अनुसार, इसके बाद वह अपने साथियों के साथ जालंधर पहुंचा, जहां उनकी मुलाकात सरपंच नाम के व्यक्ति से हुई। इसके बाद वे अमृतसर होते हुए तरनतारन पहुंचे। वहां खान नामक व्यक्ति ने उन्हें हथियार और नकदी दी।
बयान के मुताबिक, खान ने उन्हें एक जिगाना पिस्टल, एक .30 बोर पिस्टल और 50 हजार रुपए दिए। इसके बाद आरोपी टैक्सी से चंडीगढ़ पहुंचे और कथित योजना के अनुसार जानकी दास को निशाना बनाया।
होटलों में रुककर रेकी और तैयारी का दावा
पुलिस जांच के अनुसार, हत्या की तैयारी मई महीने से चल रही थी। रेकी के लिए आरोपियों के चंडीगढ़ आने का सिलसिला 9 मई से बताया गया है। जांच में सामने आए होटल रिकॉर्ड के मुताबिक चार युवक 9 मई की सुबह करीब 4:55 बजे कजहेड़ी स्थित हिमाचल होटल पहुंचे और अगले दिन सुबह करीब 7:40 बजे चेकआउट किया। इसके लिए करीब 1,000 रुपए का भुगतान किया गया।
इसके बाद 10 जून को आरोपी फिर हिमाचल होटल पहुंचे और करीब तीन दिन वहां रुके। होटल रिकॉर्ड में सन्नी मेहरा, आर्यन शर्मा, अमन सिंह और मानस के नाम दर्ज होने की बात सामने आई है। 12 जून को दोपहर करीब 2 बजे उन्होंने होटल छोड़ा।
अमर होटल में एक रात, फिर जानकी दास की हत्या
हिमाचल होटल से निकलने के बाद आरोपी नजदीक स्थित अमर होटल पहुंचे। वहां दोपहर करीब 2:30 बजे कमरा लेने और रात रुकने की बात जांच में सामने आई है। 13 जून को दोपहर करीब 12:55 बजे चेकआउट करने के बाद वे होटल से निकले।
पुलिस जांच के मुताबिक, इसके कुछ समय बाद ही सेक्टर-11 स्थित श्री कुमार मेडिकल स्टोर के कैशियर जानकी दास पर गोलियां चलाई गईं, जिससे उनकी मौत हो गई। जांच के अनुसार वारदात के बाद आरोपी करीब 50 मिनट तक शहर में मौजूद रहे और फिर चंडीगढ़ से फरार हो गए।
पुलिस के पुराने दावे और चार्जशीट में अंतर
मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल पुलिस के शुरुआती दावों को लेकर है। जांच के दौरान वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की ओर से राणा ढिल्लों और गोल्डी ढिल्लों को हत्या की साजिश से जोड़ने की बात कही गई थी। लेकिन अब चार्जशीट में दोनों के नाम शामिल नहीं होने से पुलिस के शुरुआती दावों और चार्जशीट में सामने आई साजिश की कड़ी के बीच अंतर दिखाई देता है।
चार्जशीट में आरोपियों के बयानों के अनुसार साजिश की कड़ी जम्मू जेल से जालंधर और तरनतारन होते हुए चंडीगढ़ तक पहुंचती बताई गई है। ऐसे में सवाल यह है कि शुरुआती जांच में जिन गैंगस्टरों के नाम सामने आए थे, उनके खिलाफ चार्जशीट में कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
हालांकि, किसी आरोपी के कबूलनामे या पुलिस जांच में सामने आए बयान को अदालत में साबित तथ्य नहीं माना जा सकता। मामले में आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान साक्ष्यों के आधार पर होगी।
