जोगिन्द्रा बैंक में वित्तीय अनियमितताओं के आरोप, अधिवक्ता मुकेश शर्मा ने मांगी फॉरेंसिक जांच

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JCCB पर अरबों के कथित घोटाले का आरोप, वित्त सचिव को भेजा गया विस्तृत प्रतिवेदन

जोगिन्द्रा बैंक के अधिकारियों और पूर्व प्रबंधन की भूमिका पर उठे सवाल, स्वतंत्र जांच की मांग

एएम नाथ। शिमला/सोलन :  पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय तथा हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के अधिवक्ता मुकेश कुमार शर्मा ने जोगिन्द्रा सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड (JCCB), सोलन में कथित वित्तीय अनियमितताओं, सार्वजनिक धन के दुरुपयोग तथा नियामकीय उल्लंघनों को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। इस संबंध में उन्होंने हिमाचल प्रदेश के वित्त सचिव को एक विस्तृत प्रतिवेदन भेजकर बैंक के विभिन्न वर्तमान एवं पूर्व अधिकारियों, निदेशक मंडल के सदस्यों तथा संबंधित नियामकीय अधिकारियों की भूमिका की स्वतंत्र जांच की मांग की है।
प्रतिवेदन में अधिवक्ता शर्मा ने दावा किया है कि अप्रैल 2025 से अब तक 30 से अधिक दस्तावेज-समर्थित शिकायतें, अभ्यावेदन और कानूनी नोटिस विभिन्न संवैधानिक एवं नियामक संस्थाओं को भेजे जा चुके हैं। उनका आरोप है कि सार्वजनिक धन से जुड़े गंभीर मामलों पर अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि बैंक में वर्षों से कुछ प्रभावशाली अधिकारियों का समूह निर्णय प्रक्रिया पर हावी रहा है। प्रतिवेदन में कुलदीप सिंह, राम पॉल, हरीश शर्मा, गुरमीत सिंह, रविन्द्र कुमार तथा कुछ शाखा प्रबंधकों के नामों का उल्लेख करते हुए उनकी भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।
इसके अलावा वर्ष 2008 से अब तक विभिन्न अवधियों में कार्यरत रहे कई प्रबंध निदेशकों, अध्यक्षों और निदेशक मंडल के सदस्यों की जवाबदेही तय करने की भी मांग की गई है। अधिवक्ता शर्मा का आरोप है कि राजनीतिक प्रभाव और संरक्षण के कारण कई मामलों में जांच और जवाबदेही की प्रक्रिया प्रभावित हुई है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ अधिकारियों की राजनीतिक निकटता के कारण शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो रही।
प्रतिवेदन में थाना दाड़लाघाट में दर्ज एफआईआर संख्या 45/2019 और 29/2023 के साथ-साथ राज्य विजिलेंस द्वारा दर्ज एफआईआर संख्या 00003/2025 का उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता ने सवाल उठाया है कि इन मामलों के बावजूद जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
अधिवक्ता शर्मा ने विशेष रूप से वर्तमान प्रबंध निदेशक पंकज सूद और अध्यक्ष मुकेश शर्मा के कार्यकाल में हुए वित्तीय निर्णयों, निर्माण कार्यों, खरीद प्रक्रियाओं, विज्ञापन व्यय, दान, वन टाइम सेटलमेंट (ओटीएस), राइट-ऑफ तथा एनपीए मामलों की स्वतंत्र फॉरेंसिक जांच की मांग की है। उन्होंने 29 मई 2026 को प्रस्तावित लगभग 45 लाख रुपये से अधिक लागत के निर्माण कार्य पर भी सवाल उठाए हैं।
प्रतिवेदन के अंत में वित्त सचिव से बैंक के वित्तीय लेन-देन की स्वतंत्र फॉरेंसिक ऑडिट, विजिलेंस जांच तथा विशेष जांच कराने, संबंधित अभिलेखों को सुरक्षित रखने और जांच पूरी होने तक गैर-जरूरी वित्तीय व्ययों पर रोक लगाने की मांग की गई है। हालांकि, इन आरोपों पर बैंक प्रबंधन अथवा संबंधित अधिकारियों की प्रतिक्रिया समाचार लिखे जाने तक प्राप्त नहीं हो सकी है।

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