जोगिन्द्रा बैंक सोलन की कार्यप्रणाली पर फिर सवाल : नाबार्ड समेत कई संवैधानिक संस्थाओं को भेजी शिकायत

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अधिवक्ता मुकेश शर्मा ने जेसीसीबी अधिकारियों पर लगाए गंभीर आरोप, फोरेंसिक ऑडिट की मांग

राष्ट्रपति से लेकर नाबार्ड तक पहुंचा जोगिन्द्रा बैंक विवाद, निष्पक्ष जांच की उठी मांग

एएम नाथ। सोलन :  जोगिन्द्रा केंद्रीय सहकारी बैंक लिमिटेड (जेसीसीबी), सोलन की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय, चंडीगढ़ के अधिवक्ता मुकेश कुमार शर्मा ने बैंक में कथित वित्तीय अनियमितताओं, संदिग्ध ऋण स्वीकृतियों, शिकायतों के दमन तथा अधिकारियों को संरक्षण दिए जाने के आरोप लगाते हुए मुख्य सतर्कता अधिकारी, नाबार्ड, मुंबई को विस्तृत शिकायत भेजी है। शिकायत की प्रतियां राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह एवं वित्त मंत्री, लोकसभा अध्यक्ष, हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल, मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, डीजीपी, राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो तथा अन्य संबंधित अधिकारियों को भी प्रेषित की गई हैं।
शिकायत में अधिवक्ता शर्मा ने कहा है कि उन्होंने 3 जुलाई 2026 को भी विस्तृत शिकायत दी थी, जिसके बाद नाबार्ड शिमला और सचिव (सहकारिता), हिमाचल प्रदेश के कार्यालय से प्राप्त पत्रों के माध्यम से मामला प्रधान सचिव (वित्त) को भेजा गया। उनका आरोप है कि स्वतंत्र जांच के बजाय शिकायत बैंक प्रबंधन को भेज दी गई, जिससे निष्पक्ष जांच प्रभावित हुई।
शिकायत में एजीएम एवं शिकायत निवारण अधिकारी राम पाल, शाखा प्रबंधक जगदीप शर्मा (सुबाथू) तथा एजीएम कुलदीप सिंह सहित अन्य अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ता का दावा है कि 17 जुलाई 2026 को बैंक की ओर से भेजे गए उत्तर में आरोपों का स्वतंत्र परीक्षण करने के बजाय संबंधित अधिकारी का पक्ष लिया गया। राम पाल के विरुद्ध दर्ज तीन एफआईआर का उल्लेख करते हुए उनकी नियुक्ति पर भी सवाल उठाए गए हैं।
अधिवक्ता शर्मा ने आरोप लगाया है कि शाखा प्रबंधक जगदीप शर्मा द्वारा विभिन्न शाखाओं में स्वीकृत कई ऋण मामलों में बैंकिंग नियमों की अनदेखी की गई। शिकायत में मई 2026 के ₹15 लाख के वाहन ऋण, सितंबर 2022 के ₹10 लाख के व्यक्तिगत ऋण तथा मन्नत समूह से जुड़े ऋण मामलों सहित अन्य प्रकरणों की स्वतंत्र जांच और फोरेंसिक ऑडिट कराने की मांग की गई है।
शिकायत में आरोपित अधिकारियों द्वारा स्वीकृत सभी ऋणों का फोरेंसिक ऑडिट, मूल अभिलेखों का संरक्षण, बैंक से बाहर के वरिष्ठ एवं निष्पक्ष अधिकारी से जांच तथा दोषी पाए जाने पर विभागीय, दीवानी और आपराधिक कार्रवाई की मांग की गई है। अब इस पूरे मामले में संबंधित सक्षम प्राधिकारियों की कार्रवाई और संभावित जांच पर सभी की निगाहें टिकी हैं।

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