तनख्वाह की जगह मिले करंट के झटके…..रूस में फंसे पंजाबी युवक की दर्दनाक दास्तान

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सुल्तानपुर लोधी : विदेश जाकर बेहतर जीवन और अच्छी नौकरी का सपना कई युवाओं के लिए कभी-कभी भयावह अनुभव बन जाता है। ऐसा ही मामला हरियाणा के अंबाला के 25 वर्षीय युवक दीपक के साथ सामने आया है, जिसने नौकरी के लालच में रूस जाकर ऐसी यातनाएं झेलीं कि वह जिंदगी भर नहीं भूल पाएगा।

दीपक ने बताया कि अप्रैल 2025 में एक ट्रैवल एजेंट ने उससे चार लाख रुपये लेकर उसे रूस में महीने के करीब 90 हजार रुपये की नौकरी दिलाने का वादा किया था। एजेंट के कहने पर वह दिल्ली से रूस की राजधानी मास्को के लिए रवाना हुआ। सामान्य तौर पर यह सफर करीब छह घंटे में पूरा हो जाता है, लेकिन एजेंट ने उसे कई देशों के रास्ते घुमाते हुए छह दिनों में वहां पहुंचाया।

मास्को पहुंचने के बाद दीपक को एक कंपनी में काम पर लगा दिया गया। उसने पूरे महीने मेहनत से काम किया, लेकिन जब तनख्वाह मांगने की बारी आई तो उसे नौकरी से निकाल दिया गया। इसके बाद उसे करीब पांच सौ किलोमीटर दूर दूसरी कंपनी में काम करने के लिए भेज दिया गया। वहां भी एक महीने की कड़ी मेहनत के बाद उसे 90 हजार रुपये की जगह मात्र पांच हजार रुपये ही दिए गए।

थाने में युवक ने बिताए तीन दिन

कम पैसे मिलने के कारण दीपक के लिए रहने और खाने का खर्च उठाना मुश्किल हो गया। जब वह मकान का किराया नहीं दे पाया तो मकान मालिक ने उसका पासपोर्ट छीन लिया और उसे पुलिस के हवाले कर दिया। दीपक के अनुसार उसे मास्को के एक थाने में तीन दिन तक रखा गया, जहां उसे केवल पानी दिया गया और खाने को कुछ नहीं मिला।

उसने बताया कि जब उसने शौचालय जाने की अनुमति मांगी तो उसे करंट के झटके दिए गए। इसके बाद उसे आव्रजन जेल भेज दिया गया, जहां विभिन्न देशों के लोग बंद थे। दीपक का कहना है कि वहां करीब 150 भारतीय युवक भी कैद थे, जिनमें ज्यादातर पंजाब और हरियाणा के रहने वाले थे।

जेल के भीतर हालात बेहद खराब थे। कैदियों को मानसिक और शारीरिक यातनाएं दी जाती थीं। खाने में दोपहर और रात को गाय का मांस दिया जाता था, जिसे अधिकांश भारतीय युवक नहीं खाते थे। ऐसे में कई लोग केवल रोटी या ब्रेड खाकर ही दिन गुजारने को मजबूर थे। खराब भोजन और डर के माहौल के कारण कई युवकों की सेहत तेजी से बिगड़ रही थी।

हालात देख विदेशी युवक ने फांसी लगाई

दीपक ने बताया कि जेल में एक क्यूबा के युवक ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली, जिससे सभी कैदी दहशत में आ गए। उसका कहना है कि अगर वह कुछ समय और वहां रहता तो शायद जिंदा वापस नहीं लौट पाता।

दीपक की रिहाई तब संभव हुई जब उसके परिवार ने राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल से संपर्क किया। संत सीचेवाल ने तुरंत मामले को गंभीरता से लेते हुए विभिन्न स्तरों पर प्रयास शुरू किए। इन कोशिशों के बाद दीपक 17 फरवरी को सुरक्षित अपने परिवार के पास लौट आया।

सुल्तानपुर लोधी स्थित निर्मल कुटिया पहुंचकर दीपक ने बताया कि उसकी जान बचाने में संत सीचेवाल की बड़ी भूमिका रही है और वह जीवन भर उनका आभारी रहेगा।

युवाओं को बाहर ना जाने का सुझाव

इस अवसर पर संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने पंजाब के युवाओं को सुझाव देते हुए कहा कि विदेश जाने के लालच में कई युवक ठग एजेंटों के जाल में फंस रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी संदिग्ध या गैरकानूनी तरीके से विदेश जाने से बचना चाहिए, क्योंकि कई देशों में हालात बेहद कठिन हैं और वहां जाने वाले युवाओं को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

उन्होंने कहा कि यह घटना केवल एक युवक की कहानी नहीं है, बल्कि उन हजारों युवाओं के लिए सबक है जो झूठे सपनों के पीछे अपनी जिंदगी को जोखिम में डाल देते हैं।

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