दिशा बैठक में कंगना के तेवर पर सियासी बवाल, नरेश चौहान बोले- ‘सांसद को मर्यादा का पालन करना चाहिए’

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एएम नाथ।  शिमला/मंडी। मंडी में जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक के दौरान अधिकारियों के साथ सांसद कंगना रनौत के कथित व्यवहार को लेकर हिमाचल प्रदेश की सियासत गरमा गई है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने कंगना के रवैये पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि जनप्रतिनिधियों को अधिकारियों के साथ मर्यादित तरीके से संवाद करना चाहिए।

नरेश चौहान ने आरोप लगाया कि दिशा बैठक के दौरान कंगना रनौत ने अपना आपा खो दिया और अधिकारियों के प्रति जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया गया, वह उचित नहीं थी। उन्होंने कहा कि सांसद होने के नाते कंगना को संवैधानिक और लोकतांत्रिक मर्यादाओं का ध्यान रखना चाहिए था।

‘योजनावार चर्चा कर समाधान निकालना चाहिए’

नरेश चौहान ने कहा कि दिशा जैसी बैठकों का उद्देश्य विकास योजनाओं की समीक्षा करना और उनके क्रियान्वयन में आ रही समस्याओं का समाधान तलाशना है। जनप्रतिनिधियों को अधिकारियों के साथ योजनावार चर्चा करनी चाहिए तथा लंबित मामलों को बातचीत के माध्यम से सुलझाने का प्रयास करना चाहिए।

उन्होंने कंगना के व्यवहार को कथित तौर पर ‘पब्लिसिटी स्टंट’ करार देते हुए कहा कि इससे उनकी निराशा भी दिखाई देती है। चौहान ने कहा कि यदि किसी परियोजना में देरी हुई है तो उसके पीछे की परिस्थितियों को समझना और जिम्मेदारी तय करना जरूरी है, लेकिन अधिकारियों के साथ अनुचित व्यवहार समाधान का रास्ता नहीं है।

दरअसल, पांच सितंबर को हुई दिशा समिति की बैठक में कंगना रनौत ने लंबित विकास कार्यों की प्रगति पर अधिकारियों से जवाब मांगा था। उन्होंने विकास परियोजनाओं में तेजी लाने और खर्च से संबंधित विस्तृत प्रदर्शन रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए थे।

चंदे के मुद्दे पर भी केंद्र पर निशाना

नरेश चौहान ने राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे के मुद्दे पर भी केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि ऐसे राजनीतिक दल जिनका जमीनी स्तर पर कोई खास राजनीतिक अस्तित्व नहीं है, उनके खातों में करोड़ों रुपये की राशि पहुंचना गंभीर विषय है। उन्होंने राजनीतिक चंदे के स्रोतों की पारदर्शी जांच की मांग की।

चौहान ने केंद्र सरकार के भ्रष्टाचार के खिलाफ किए गए पुराने दावों का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि यदि व्यवस्था में पारदर्शिता है तो राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे के स्रोतों की जांच क्यों नहीं होनी चाहिए।

उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2014 में जिस पार्टी के पास कथित तौर पर 100 करोड़ रुपये से कम की संपत्ति थी, आज उसकी संपत्ति हजारों करोड़ रुपये बताई जा रही है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे और उनकी संपत्ति में वृद्धि के स्रोतों की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच आवश्यक है।

दिशा बैठक बनी राजनीतिक बहस का केंद्र

मंडी दिशा समिति की बैठक के बाद भाजपा सांसद कंगना रनौत और प्रदेश सरकार के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। जहां कंगना ने लंबित विकास कार्यों को लेकर अधिकारियों से जवाबदेही तय करने पर जोर दिया, वहीं प्रदेश सरकार की ओर से उनके बैठक में व्यवहार और कार्यशैली पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

अब यह मुद्दा प्रशासनिक समीक्षा से आगे बढ़कर हिमाचल की सियासत में भाजपा और कांग्रेस के बीच नए राजनीतिक टकराव का विषय बनता दिखाई दे रहा है।

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