एएम नाथ। चम्बा : विधायक डॉ. जनक राज ने कहा है कि पंचायत चुनाव कोई प्रशासनिक औपचारिकता नहीं, बल्कि संविधान द्वारा प्रदत्त बाध्यता हैं। इन्हें टालना लोकतंत्र की जड़ों को कमजोर करता है और वर्तमान में यह विषय हिमाचल प्रदेश में एक गंभीर एवं निर्णायक संवैधानिक विवाद का रूप ले चुका है।
डॉ. जनक राज ने कहा कि पंचायती राज व्यवस्था लोकतंत्र की नींव है और समय पर पंचायत चुनाव कराना राज्य सरकार एवं निर्वाचन तंत्र का संवैधानिक दायित्व है। उन्होंने कहा कि चुनावों में अनावश्यक देरी से न केवल ग्रामीण विकास की प्रक्रिया प्रभावित होती है, बल्कि जनता के संवैधानिक अधिकारों का भी हनन होता है।
उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 243 के तहत पंचायतों का समय पर गठन अनिवार्य है। यदि सरकार या प्रशासन इस दायित्व से पीछे हटता है, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंताजनक संकेत है।
विधायक ने स्पष्ट किया कि पंचायत प्रतिनिधियों की अनुपस्थिति में विकास कार्य ठप पड़ रहे हैं और निर्णय प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। उन्होंने प्रदेश सरकार से आग्रह किया कि वह संवैधानिक मर्यादाओं का पालन करते हुए पंचायत चुनाव शीघ्र करवाए, ताकि ग्रामीण स्तर पर लोकतंत्र को मजबूती मिल सके।
