पंजाब कला परिषद द्वारा दो उपन्यासकारों के साथ संवाद समारोह बकापुर धमाई में आयोजित……पंजाबी उपन्यास क्षेत्र में पाठक और लेखक के बीच सीधे संवाद से चिंतन की नई  संभावनाएं उत्पन्न हो रही : डॉ. जे. बी. सेखों

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गढ़शंकर, 4 अप्रैल : पंजाब कला परिषद, चंडीगढ़ और पंजाब साहित्य अकादमी द्वारा पंजाब के नव-निर्माण के लिए आरंभ की गई ‘सृजन और संवाद’ गोष्ठी श्रृंखला के तहत गढ़शंकर में पड़ते श्री गुरु नानक देव चैरिटेबल अस्पताल, बकापुर धमाई में पंजाबी के दो उपन्यासकारों मुख्तियार सिंह और संदीप नय्यर के साथ संवाद समारोह का आयोजन किया गया। समारोह के आरंभ मौके कार्यक्रम के कोऑर्डिनेटर डॉ. जे. बी. सेखों ने बताया कि पंजाब कला परिषद द्वारा शुरू की गई इस संवाद श्रृंखला से पंजाबी उपन्यास क्षेत्र में पाठक और लेखक के बीच सीधे संवाद से चिंतन की नई संभावनाएं उत्पन्न हो रही हैं।

इस अवसर पर उपन्यासकार मुख्तियार सिंह ने अपने उपन्यासों की रचना प्रक्रिया पर विचार रखते हुए बताया कि उन्होंने अपने उपन्यासों में देश की आजादी के बाद पंजाबी समाज में आए बदलावों को प्रस्तुत किया है। उन्होंने उपन्यास के बड़े कैनवस को समाज की आत्मा का सच्चा प्रतिबिंब बताया और अपने उपन्यासों की विषय-वस्तु की चयन, पात्र, भाषा और प्रस्तुति से जुड़े विभिन्न पहलुओं के बारे में बताया।

इस मौके युवा उपन्यासकार संदीप नय्यर ने कहा कि अपने उपन्यासों में उन्होंने बीसवीं सदी के अंतिम दशक के दौरान शैक्षणिक संस्थानों में छात्र राजनीति के आंतरिक टकराव के माध्यम से समाजवादी और पूंजीवादी व्यवस्था की आपसी टक्कर को प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि वर्गीय समझ, गहन अध्ययन और समाज के गहरे अनुभव से ही उपन्यास रचा जा सकता है।

इस अवसर पर उपस्थित लेखकों में कहानीकार अजमेर सिद्धू ने कम्युनिस्ट विचारधारा के उतार-चढ़ाव के संदर्भ में उपन्यासकारों के साथ संवाद किया। समारोह के दौरान कामरेड जरनैल सिंह जाफरपुर, सिमरनजीत सिंह कंग, पवन कुमार भम्मियां, प्रिंसिपल विजय भट्टी, मैडम जतिंदर कौर माहल, जसवीर मोरों, जोगिंदर कुल्लेवाल, कहानीकार मनदीप डडियाना, कहानीकार रूपिंदर कौलगढ़, कुलविंदर चाहल, मैडम गुरदीप कोमल, प्रो. अशोक कुमार, प्रो. मनदीप कुमार, मास्टर मुकेश कुमार, गुरदीप महौर आदि लेखकों और पाठकों ने सवाल-जवाब सत्र के दौरान अतिथि उपन्यासकारों से उपन्यास और समाज, उपन्यास और विचारधारा, कम्युनिज्म और सिख चिंतन सहित उपन्यास के विभिन्न पहलुओं पर सवाल पूछे, जिनके उपन्यासकार मुख्तियार सिंह और संदीप नय्यर ने संवादपूर्ण उत्तर दिए।

मैडम जतिंदर कौर माहल ने इस संवाद को लेखक और पाठक दोनों पक्षों के लिए सीखने-सिखाने का एक बेहतरीन मंच बताया। इस अवसर पर बगीचा सिंह, गुरपाल सिंह, मलकीत सिंह, सिमरनदीप सिंह, सतपाल सिंह क्लेर, भजन सिंह, बलवीर सिंह सहित अनेक पाठक उपस्थित थे।

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