पंजाब में बिजली संकट गहराया: 15,500 MW के पार डिमांड, 10,700 MW महंगी बिजली खरीद रहा PSPCL ; उद्योगों पर साढ़े 4 घंटे तक कट

by

सरकारी थर्मल प्लांटों के 6 यूनिट बंद, धान की सिंचाई और बढ़ती गर्मी से बढ़ी बिजली की मांग; लुधियाना-मोहाली समेत औद्योगिक इलाकों में कटौती

चंडीगढ़। पंजाब में बिजली संकट एक बार फिर गहराता दिखाई दे रहा है। पिछले कुछ दिनों से राज्य में बिजली की मांग लगातार 15,500 मेगावाट के पार बनी हुई है, जबकि उत्पादन मांग के मुकाबले काफी कम है। बिजली की कमी को पूरा करने के लिए पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (PSPCL) को केंद्रीय पूल से बड़ी मात्रा में बिजली खरीदनी पड़ रही है।

स्थिति यह है कि केंद्रीय पूल से करीब 10,700 मेगावाट बिजली खरीदी जा रही है। इसके बावजूद राज्य के कई हिस्सों में बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है। औद्योगिक क्षेत्रों में भी इसका असर दिखाई दे रहा है।

सरकारी थर्मल प्लांटों के 6 यूनिट बंद

पंजाब के सरकारी थर्मल प्लांटों के कुल 10 यूनिटों में से 6 यूनिटों में उत्पादन पूरी तरह बंद बताया जा रहा है।

बाकी चार यूनिटों में से भी दो यूनिट क्षमता के मुकाबले काफी कम उत्पादन कर रहे हैं। इससे सरकारी बिजली उत्पादन पर दबाव बढ़ गया है।

दूसरी ओर, राज्य के निजी थर्मल प्लांटों के सभी पांच यूनिट चालू हैं और इनसे करीब 2,750 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है।

राज्य में सभी उपलब्ध स्रोतों को मिलाकर फिलहाल करीब 4,730 मेगावाट तक बिजली उत्पादन हो रहा है।

केंद्रीय पूल से महंगी बिजली खरीदने की मजबूरी

उत्पादन और मांग में बड़े अंतर के कारण PSPCL को केंद्रीय पूल से बिजली खरीदकर आपूर्ति बनाए रखने की कोशिश करनी पड़ रही है।

केंद्रीय पूल से खरीदी जाने वाली बिजली अपेक्षाकृत महंगी पड़ती है। ऐसे में पावरकॉम पर आर्थिक दबाव भी बढ़ रहा है और वह जरूरत के मुताबिक ही बिजली खरीदने की कोशिश कर रहा है।

इसके बावजूद मांग और उपलब्धता के बीच अंतर के कारण कई क्षेत्रों में कटौती करनी पड़ रही है।

लुधियाना, खन्ना और मोहाली के उद्योग प्रभावित

बिजली संकट का सबसे ज्यादा असर औद्योगिक क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है।

जानकारी के अनुसार लुधियाना, खन्ना, मोहाली और मंडी गोबिंदगढ़ जैसे प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में करीब साढ़े चार घंटे तक बिजली कटौती की गई।

उद्योगों का कहना है कि बार-बार बिजली जाने से उत्पादन प्रभावित हो रहा है और मशीनरी चलाने में परेशानी के साथ आर्थिक नुकसान का भी सामना करना पड़ रहा है।

धान की सिंचाई से बढ़ी कृषि क्षेत्र की मांग

बिजली की मांग बढ़ने के पीछे कृषि क्षेत्र भी एक बड़ा कारण बताया जा रहा है।

पंजाब में इस समय धान की फसल को पानी लगाने का सीजन चल रहा है। पिछले कुछ दिनों में पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण किसान खेतों में सिंचाई के लिए ट्यूबवेल और मोटर चला रहे हैं।

इससे कृषि क्षेत्र में बिजली की खपत अचानक बढ़ गई है।

गर्मी और उमस ने बढ़ाई घरेलू मांग

बारिश नहीं होने से तापमान और उमस में भी बढ़ोतरी हुई है। इसके कारण घरों में पंखे, कूलर और एयर कंडीशनर का इस्तेमाल बढ़ गया है।

घरेलू बिजली की मांग बढ़ने के कारण कुल सिस्टम डिमांड पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। मांग के मुकाबले पर्याप्त बिजली उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में कई क्षेत्रों में अघोषित कटौती की शिकायतें भी सामने आ रही हैं।

आने वाले दिनों में चुनौती बरकरार

पंजाब में बिजली की मांग फिलहाल दोहरी मार झेल रही है। एक तरफ धान की सिंचाई के कारण कृषि क्षेत्र में खपत बढ़ी है, तो दूसरी ओर गर्मी और उमस से घरेलू मांग भी लगातार ऊंची बनी हुई है।

ऐसे में सरकारी थर्मल यूनिटों का जल्द पूरी क्षमता से उत्पादन शुरू होना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि मांग इसी स्तर पर बनी रहती है और उत्पादन में सुधार नहीं होता, तो PSPCL के सामने केंद्रीय पूल से महंगी बिजली खरीदने के साथ-साथ बिजली कटौती को नियंत्रित करने की चुनौती बनी रह सकती है।

Share
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

You may also like

article-image
पंजाब

Hoshiarpur to Be Made Dengue-Free,

Hoshiarpur/ Daljeet Ajnoha /May 18 : The district administration has launched extensive preparations to prevent seasonal diseases such as dengue and chikungunya. Deputy Commissioner Ashika Jain chaired a key district-level meeting at the district administrative...
article-image
पंजाब

न्यायपालिका की अवमानना और सोनम वांगचुक की नजरबंदी के खिलाफ विभिन्न संगठनों ने किया विरोध प्रदर्शन

गढ़शंकर, 8 अक्तूबर : देश में हुक्मरानों द्वारा लोगों में फैलाई जा रही नफरत, आतंक और सांप्रदायिक तत्वों, भारत के मुख्य न्यायाधीश का अपमान करने और विश्व प्रसिद्ध पर्यावरणविद् और लद्दाखी लोगों के लोकप्रिय...
Translate »
error: Content is protected !!