वोटों की कथित कटौती का मुद्दा सदन में गूंजा; मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भाजपा पर लगाए ‘वोट लूट’ के आरोप, चुनावी संस्थाओं की जवाबदेही तय करने की मांग
चंडीगढ़, 23 अक्टूबर। पंजाब विधानसभा ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल के दौरान चुनाव प्रक्रिया और निर्वाचन आयोग के कामकाज में कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच करवाने की मांग वाला सरकारी प्रस्ताव शुक्रवार को पारित कर दिया। विधानसभा के दूसरे दिन वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने सदन में यह प्रस्ताव पेश किया। चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मतदाता सूचियों से कथित तौर पर वोट काटे जाने का मुद्दा उठाते हुए भाजपा पर निशाना साधा और इसे लोकतंत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय बताया।
मताधिकार की रक्षा के लिए स्वतंत्र जांच की मांग
प्रस्ताव में मतदाता सूचियों से नाम हटाए जाने और पात्र नागरिकों को मतदान के अधिकार से वंचित किए जाने के आरोपों पर चिंता जताई गई। सदन ने कहा कि लोकतंत्र में प्रत्येक पात्र नागरिक का वोट महत्वपूर्ण है और किसी को भी गैरकानूनी तरीके से मतदान के अधिकार से वंचित करना संवैधानिक लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है।
मुख्यमंत्री मान ने दावा किया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया के तहत देशभर में 14 करोड़ मतदाताओं के नाम मतदाता सूचियों से हटाए गए हैं। उन्होंने इस प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए और मताधिकार की सुरक्षा पर जोर दिया। हालांकि, यह आंकड़ा मुख्यमंत्री का दावा है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि की जानकारी उपलब्ध विवरण में नहीं दी गई है।
वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने प्रस्ताव पेश करते हुए भाजपा पर गरीब वर्गों के मतदान के अधिकार को प्रभावित करने का आरोप लगाया। उन्होंने पिछले वर्ष हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव का जिक्र करते हुए भी भाजपा पर ‘वोट चोरी’ के आरोप लगाए।
मतदान के लिए मतपत्रों के इस्तेमाल की मांग
प्रस्ताव पर चर्चा में आम आदमी पार्टी की विधायक इंदरजीत कौर मान ने भी हिस्सा लिया। उन्होंने भाजपा सरकार की आलोचना करते हुए मतदान प्रक्रिया में मतपत्रों के इस्तेमाल की मांग की।
प्रस्ताव में कहा गया कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए नागरिकों के मतदान के अधिकार को सुरक्षित रखना और चुनाव संबंधी संस्थाओं की जवाबदेही सुनिश्चित करना आवश्यक है। इसके तहत मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल में चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूचियों में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए स्वतंत्र, निष्पक्ष और विश्वसनीय व्यवस्था स्थापित करने की मांग की गई, ताकि तथ्यों का पता लगाया जा सके और जवाबदेही तय हो सके।
दोषी पाए जाने वालों पर कानूनी कार्रवाई की मांग
विधानसभा के प्रस्ताव में यह भी कहा गया कि जांच के दौरान यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक कानूनों के उल्लंघन के ठोस सबूत मिलते हैं, तो उसके विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई शुरू की जानी चाहिए।
प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूचियों में कथित अनियमितताओं की जांच, पात्र मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा और निर्वाचन प्रक्रिया में जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग उठाना रहा।
