पर्यावरण संरक्षण की एवज में ग्रीन बोनस का हकदार हिमाचल: मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू

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एएम नाथ। शिमला : मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने आज यहां कहा कि प्रदेश सरकार हिमाचल को हरित ऊर्जा राज्य बनाने का संकल्प को साकार करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इसके दृष्टिगत प्रभावी नीतियों और कार्यक्रमों को सफलतापूर्वक लागू कर इस दिशा में तेजी से प्रगति की जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा हिमाचल के विकास के लिए उठाया गया प्रत्येक कदम पर्यावरण हितैषी होगा। उन्होंने कहा कि कृषि, बागवानी, पशुपालन, वानिकी, उद्योग तथा परिवहन सहित अन्य सभी क्षेत्रों में प्रदेश सरकार पर्यावरण संतुलन को बढ़ावा देते हुए विकास के नए आयाम स्थापित कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने 31 मार्च, 2026 तक हिमाचल को हरित ऊर्जा बनाने का लक्ष्य रखा है, जिसे पूर्ण करने के लिए हमें राज्य की कुल ऊर्जा खपत का लगभग 90 प्रतिशत नवीकरणीय या हरित ऊर्जा स्रोतों के उपयोग से हासिल करना होगा। वर्तमान में हमारी ऊर्जा खपत लगभग 14,000 मिलियन यूनिट है और यदि हम 12,600 मिलियन यूनिट नवीकरणीय और हरित ऊर्जा से उपयोग में लाएंगे तभी हिमाचल हरित राज्य बन सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसका सीधा लाभ राज्य के औद्योगिक और कृषि क्षेत्र को होगा।
ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि हिमाचल पथ परिवहन निगम द्वारा डीजल बसों को चरणबद्ध तरीके से ई-बसों से बदला जा रहा है, जिसके फलस्वरूप परिवहन क्षेत्र से होने वाला ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन अब काफी कम हो गया है। यह पहले लगभग 16-20 प्रतिशत था। इस कदम से प्रदेशवासियों को स्वच्छ और हरित परिवहन सुविधाएं प्राप्त हुई हैं। निगम द्वारा 412 करोड़ रुपये की लागत से 297 इलेक्ट्रिक बसें खरीदने के लिए निविदाएं जारी की गई हैं। इसके अतिरिक्त 124 करोड़ रुपये की लागत से बस अड्डों पर ई-चार्जिंग स्टेशन भी स्थापित किए जा रहे हैं।
इन ई-बसों की खरीद के अलावा वित्तीय वर्ष 2025-26 में 500 और ई-बसें खरीदी जाएंगी। उन्होंने कहा कि सरकार का यह कदम वायु प्रदूषण को कम करने के साथ-साथ पर्यावरणीय संसाधनों के संरक्षण में भी सहायक सिद्ध हो रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राजीव गांधी स्वरोजगार स्टार्ट-अप योजना राज्य के बेरोजगार युवाओं के लिए वरदान साबित हुई है, जिसके तहत ई-टैक्सियों की खरीद पर 50 प्रतिशत सब्सिडी प्रदान की जा रही है। इन टैक्सियों की सेवाएं विभिन्न सरकारी विभागों, निगमों, बोर्डों और अन्य सरकारी संस्थानों में ली जा रही हैं। ई-टैक्सी योजना के तहत अब तक लगभग 50 ई-टैक्सियों को सरकारी विभागों से जोड़ा जा चुका है। स्टार्ट अप योजना के तहत अब तक 59 पात्र युवाओं को लगभग 4.22 करोड़ रुपये की सब्सिडी वितरित की जा चुकी है और 61 अन्य लाभार्थियों को जल्द ही सब्सिडी जारी की जाएगी। उन्होंने कहा कि इससे न केवल युवाओं को स्वरोजगार मिलेगा बल्कि उन्हें सरकारी कार्यालयों से जोड़कर पांच साल की अवधि के लिए नियमित आय भी सुनिश्चित की जाएगी। योजना के तहत सरकारी विभागों में अटैच ई-टैक्सी को पांच साल के पश्चात अगले दो साल के लिए विस्तार देने का प्रावधान भी शामिल है। उन्होंने कहा कि राज्य में छह ग्रीन कॉरिडोर बनाए गए हैं जिनमें ई-वाहनों के संचालन के लिए चार्जिंग स्टेशनों सहित हर सुविधा उपलब्ध है। शीघ्र ही इन कॉरिडोर में 41 अतिरिक्त चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान प्रदेश सरकार ने ई-वाणिज्यिक वाहनों के पंजीकरण पर रोड टैक्स में 100 प्रतिशत छूट और विशेष रोड टैक्स में 50 प्रतिशत छूट प्रदान की है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से राज्य में चल रहे सभी पेट्रोल और डीजल ऑटो रिक्शा को चरणबद्ध तरीके से ई-ऑटो रिक्शा से बदला जा रहा है। युवाओं को स्वरोजगार के अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से सरकार निजी क्षेत्र को 1,000 बस रूटों पर नए परमिट प्रदान कर रही है। इसके अलावा चिन्हित रूटों पर ई-बसों और टैम्पो ट्रैवलर पर 40 प्रतिशत तक की सब्सिडी प्रदान कर रही है।
हिमाचल प्रदेश को ‘लंग्ज ऑफ नॉर्थ इंडिया’ कहा जाता है और प्राकृतिक संपदा के विस्तार, पारिस्थितिकीय संतुलन और पर्यावरण संरक्षण को बनाए रखने में प्रदेश के यह प्रयास महत्वपूर्ण साबित होंगे। उन्होंने कहा कि हमारा राज्य मिट्टी, पानी, स्वच्छ हवा और अनुकूल जलवायु के रूप में देश को अनुकूल पारिस्थितिक तंत्र प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि वनों के कटान से हम प्रदेश के लिए आर्थिक संसाधन जुटा सकते हैं लेकिन पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के दृष्टिगत हम वनों के संरक्षण को महत्त्व देते हैं। राज्य सरकार ने केंद्र और 16वें वित्त आयोग के समक्ष हिमाचल का पक्ष मजबूती के साथ रखा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार, हिमाचल में पारिस्थितिक तंत्र में संरक्षण के प्रतियोगदान का तकनीकी और वैज्ञानिक मूल्यांकन करेगी, जिसके अनुरूप हिमाचल को प्रतिवर्ष लगभग 90,000 करोड़ रुपये प्राप्त हो सकते हैं।
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