पहले वोट- फिर ड्यूटी”, बिना “वोट” डाले ‘चुनाव डयूटी’ में नहीं जा सकेंगे “कर्मचारी” : चुनाव आयोग ने कसी नकेल

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एएम नाथ। शिमला :   इस बार लोकसभा चुनावों में चुनाव डयूटी में लगे कर्मचारी अब बिना वोट दिए ड्यूटी नहीं कर सकेंगे। पिछले चुनावों में मिले सबक के बाद चुनाव आयोग ने ऐसे लापरवाह कर्मचारियों पर नकेल कस दी है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी हिमाचल प्रदेश मनीष गर्ग ने स्पष्ट कहा कि शिक्षा विभाग, पुलिस और अन्य विभागों के करीब 60 हज़ार कर्मचारियों को चुनाव प्रक्रिया सम्पन्न करवाने के लिए चुनाव डयूटी में लगाया जा रहा है।
इस दौरान रिहर्सल के बाद जब कर्मचारी प्रशिक्षण पूरा कर टीमों के साथ अपने बूथ की ओर रवाना होंगे तो उन्हें सबसे पहले अनिवार्य रूप से वोट डालना होगा अन्यथा वे ड्यूटी पर नहीं जा सकेंगे।
मनीष गर्ग ने कहा कि इस बार कर्मचारी अधिकारियों को पोस्टल बैल्ट इश्यू नहीं करवाए जाएंगे बल्कि मौके पर ही वोट डालना पड़ेगा। इसके लिए डिस्पैच के समय एक प्राधिकृत अधिकारी वहां मौजूद होगा जिसके हस्ताक्षर के बाद तुरन्त वोट डालकर उन्हें बूथ की ओर रवाना किया जाएगा।
इससे ये तय हो जाएगा कि जितने भी कर्मचारी ड्यूटी पर हैं वे सभी अनिवार्य रूप से मतदान कर सकें। क्योंकि जिनके ऊपर मतदान करवाने का जिम्मा है यदि वे खुद ही वोट ना डाले तो फिर निष्पक्ष चुनाव की पूरी उम्मीद नहीं की जा सकती।
याद रहे कि अब से पूर्व कर्मचारियों को पोस्टल बैलेट जारी किए जाते थे। जिन्हे वे अपनी इच्छानुसार मतगणना से पूर्व वोट के रूप में जमा करवा सकते थे। लेकिन बीते विधानसभा चुनावों में हिमाचल प्रदेश के जो कर्मचारी OPS को मुद्दा बनाकर उसके नाम पर चुनाव करवाने की बात कर रहे थे, उसमें बड़ी संख्या बल्कि हजारों में ऐसे कर्मचारी अधिकारी है जिन्होंने अपने मत का प्रयोग ही नहीं किया।
यही नहीं चुनाव डयूटी में लगे जिन कर्मचारियों को पोस्टल बैलेट दिए गए थे उन्होंने आखिरी क्षण तक पोस्टल बैलेट वापस ही नहीं लौटाए।
इतना ही नहीं कई कर्मचारियों के पोस्टल बैलेट चोरी हो गए, कईयों के गुम हो गए और कई कर्मचारियों ने राजनीतिक दबाव में वोट डाला जिस पर खूब घमासान हुआ। मामले दर्ज हुए लेकिन अब ऐसा नहीं हो सकेगा।
चुनाव आयोग के इस काबिले तारीफ़ फैसले से कर्मचारियों को अब निश्चित व अनिवार्य रूप से वोट डालना ही पड़ेगा।
माना जा रहा है कि ये उस प्रक्रिया का हिस्सा हो कि वोट डालना हमारा मौलिक अधिकार ही नहीं अब कानूनी रूप से भी अनिवार्य हो।
उम्मीद की जा सकती है कि चुनाव आयोग के इस निर्णय से चुनाव डयूटी में लगे शतप्रतिशत कर्मचारियों के साथ ही सरकारी सेवाओं में रत हर कर्मचारी वोट जरूर डाले और आम मतदाता भी मताधिकार का प्रयोग करे, थी चुनाव आयोग का मोटो भी है।
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