चंडीगढ़, 5 नवंबर। पंजाब लोक सेवा आयोग (पीपीएससी) की पीसीएस मेन्स परीक्षा के घोषित परिणामों को लेकर पंजाब की राजनीति में विवाद खड़ा हो गया है। भाजपा नेताओं ने परीक्षा परिणामों में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी सरकार को घेरा है। केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों और भाजपा नेता सुनील जाखड़ ने परीक्षा के नतीजों में सामने आए आंकड़ों पर सवाल उठाते हुए भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता पर संदेह जताया है। भाजपा नेताओं ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच करवाई जाए, इंटरव्यू प्रक्रिया को तत्काल रोका जाए और पूरे मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से करवाई जाए।
भाजपा नेताओं का कहना है कि परीक्षा के कुछ केंद्रों और विशेष कमरों से बड़ी संख्या में उम्मीदवारों का चयन होना सामान्य स्थिति नहीं लगती। उन्होंने आरोप लगाया कि एक ही कमरे से 10-11 उम्मीदवारों का शॉर्टलिस्ट होना और लगातार रोल नंबर वाले अभ्यर्थियों का चयन होना गंभीर जांच का विषय है। नेताओं ने कहा कि पंजाब सरकार लगातार बिना सिफारिश और बिना रिश्वत सरकारी नौकरियां देने का दावा करती रही है, लेकिन पीपीएससी मेन्स के परिणामों को लेकर सामने आए आंकड़े इन दावों पर सवाल खड़े कर रहे हैं। हालांकि, भाजपा नेताओं की ओर से लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और न ही इस संबंध में किसी जांच एजेंसी की आधिकारिक रिपोर्ट सामने आई है।
रवनीत बिट्टू ने परीक्षा केंद्रों के आंकड़ों पर उठाए सवाल
केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर पीपीएससी मेन्स परीक्षा के परिणामों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भगवंत मान सरकार के बिना सिफारिश और बिना रिश्वत नौकरियां देने के दावों के विपरीत परीक्षा परिणामों में सामने आए आंकड़े कई सवाल खड़े करते हैं।
बिट्टू ने अपने पोस्ट में बताया कि सेंटर-7 के कमरा नंबर 8 में कुल 24 उम्मीदवारों में से 11 उम्मीदवार शॉर्टलिस्ट हुए हैं। यह कुल संख्या का 45.8 प्रतिशत बनता है। इसी प्रकार सेंटर-11 और सेंटर-4 के कमरों से 10-10 उम्मीदवार शॉर्टलिस्ट हुए, जिनकी प्रतिशत दर 41.7 बताई गई है।
उन्होंने कहा कि सिविल सेवा जैसी प्रतिष्ठित और कठिन प्रतियोगी परीक्षा में एक ही कमरे से इतने अधिक उम्मीदवारों का चयन होना केवल संयोग नहीं माना जा सकता। उन्होंने परीक्षा केंद्रों के बीच चयन दर में अंतर का भी उल्लेख किया। बिट्टू के अनुसार, सेंटर-8 में कुल शॉर्टलिस्टिंग दर 24.21 प्रतिशत रही, जबकि सेंटर-1 के कमरा नंबर 1 से 7 तक चयन दर केवल 2.89 प्रतिशत दर्ज की गई।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि परीक्षा केंद्रों और कमरों के परिणामों में इतना बड़ा अंतर पूरी चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार मंचों से मेरिट और पारदर्शिता की बातें करती है, लेकिन परीक्षा परिणामों में सामने आए आंकड़ों को लेकर अभ्यर्थियों के मन में संदेह पैदा हो रहा है।
रवनीत बिट्टू ने मांग की कि यदि सरकार भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर गंभीर है तो इंटरव्यू प्रक्रिया तुरंत रोकनी चाहिए। उन्होंने उत्तर पुस्तिकाओं को सील करने और पूरे मामले की किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी या सीबीआई से जांच करवाने की मांग की, ताकि परीक्षा से संबंधित सभी तथ्यों को सामने लाया जा सके।
केवल सिंह ढिल्लों ने लगातार रोल नंबरों पर जताया संदेह
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने भी पीपीएससी मेन्स के परिणामों को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि परीक्षा के उम्मीदवारों की ओर से उठाए गए सवालों ने मान सरकार के ईमानदार शासन और पारदर्शी भर्ती के दावों पर संदेह पैदा कर दिया है।
ढिल्लों ने आरोप लगाया कि चार परीक्षा केंद्रों में एक ही कमरे से 10 से 11 उम्मीदवारों का शॉर्टलिस्ट होना, लगातार रोल नंबर वाले 86 उम्मीदवारों का चयन और परिणामों में अनुपस्थित उम्मीदवारों के रोल नंबर सामने आने जैसे मुद्दों की गंभीरता से जांच होनी चाहिए।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन विषय विशेषज्ञों के बजाय विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों से करवाया गया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि यदि इन आरोपों में सच्चाई है तो यह पंजाब के मेहनती युवाओं के भविष्य के साथ अन्याय होगा।
ढिल्लों ने मांग की कि पीसीएस मेन्स परीक्षा के परिणामों के बाद होने वाली इंटरव्यू प्रक्रिया तत्काल रोकी जाए। उन्होंने कहा कि मामले की जांच किसी मौजूदा हाईकोर्ट न्यायाधीश की निगरानी में करवाई जानी चाहिए। यदि ऐसा संभव नहीं होता तो सीबीआई से जांच करवाई जाए।
उन्होंने परीक्षा केंद्रों की सीसीटीवी फुटेज, सीटिंग प्लान, हाजिरी रजिस्टर और उत्तर पुस्तिकाओं की फोरेंसिक जांच करवाने की मांग भी की। ढिल्लों ने कहा कि यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता या भ्रष्टाचार सामने आता है तो दोषियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण कानून के तहत एफआईआर दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि पंजाब में पहले भी भर्ती परीक्षाओं को लेकर विवाद सामने आ चुके हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को इन मामलों में जवाबदेही सुनिश्चित करनी चाहिए और युवाओं को यह विश्वास दिलाना चाहिए कि सरकारी नौकरियों में चयन केवल योग्यता और मेरिट के आधार पर हो रहा है।
सुनील जाखड़ ने पीसीएस परीक्षा की तुलना नीट पेपर लीक मामले से की
भाजपा नेता सुनील जाखड़ ने भी पीपीएससी मेन्स परीक्षा के परिणामों पर सवाल उठाते हुए इसे नीट पेपर लीक मामले से जोड़कर देखा। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए सवाल किया कि पीसीएस परीक्षा और नीट पेपर लीक मामले में क्या अंतर है।
जाखड़ ने कहा कि पंजाब में पहले नायब तहसीलदार भर्ती परीक्षा के पेपर लीक होने के आरोप सामने आए। इसके बाद बाबा फरीद मेडिकल यूनिवर्सिटी में पैरामेडिकल स्टाफ भर्ती परीक्षा को लेकर भी पेपर लीक के आरोप लगे। अब पीपीएससी मेन्स परीक्षा के परिणामों को लेकर कथित अनियमितताओं के सवाल उठ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि लगातार भर्ती परीक्षाओं को लेकर विवाद सामने आने से पंजाब के युवाओं में असंतोष पैदा हो सकता है। जाखड़ ने आरोप लगाया कि पीपीएससी मेन्स के परिणामों ने भगवंत मान सरकार के बिना पैसे और बिना सिफारिश नौकरी देने के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सुनील जाखड़ ने बताया कि परीक्षा के परिणामों में कुछ कमरों से 10 से 11 उम्मीदवारों का चयन हुआ है। इसके अलावा रोल नंबरों के क्रम में कुल 86 उम्मीदवारों को तीन या चार लगातार उम्मीदवारों के समूहों में चुने जाने का दावा भी किया गया है।
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या रोल नंबर जारी करते समय ही कुछ उम्मीदवारों को लगातार नंबर आवंटित किए गए थे और क्या यह किसी पूर्व नियोजित व्यवस्था का हिस्सा था? जाखड़ ने कहा कि पीसीएस जैसी प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षा में कुछ विशेष परीक्षा केंद्रों या कमरों से बड़ी संख्या में उम्मीदवारों का चयन होना जांच का विषय है।
उन्होंने कहा कि यह पंजाब के युवाओं के सपनों, मेहनत और भविष्य से जुड़ा मामला है। इसलिए पूरे प्रकरण की सीबीआई जांच करवाना आवश्यक है, ताकि परीक्षा से जुड़े सभी तथ्यों को सामने लाया जा सके और चयन प्रक्रिया की विश्वसनीयता कायम रहे।
भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर बढ़ी राजनीतिक बहस
पीपीएससी मेन्स परीक्षा के परिणामों को लेकर भाजपा नेताओं की ओर से उठाए गए सवालों के बाद पंजाब में सरकारी भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। भाजपा नेताओं ने सरकार से मांग की है कि वह आरोपों को गंभीरता से लेते हुए उम्मीदवारों की शंकाओं का समाधान करे।
नेताओं का कहना है कि सरकारी नौकरियों के लिए तैयारी करने वाले हजारों युवा लंबे समय तक मेहनत करते हैं। ऐसे में भर्ती प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की अनियमितता की आशंका भी युवाओं के विश्वास को प्रभावित कर सकती है।
भाजपा ने मांग की है कि परीक्षा के सभी रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाएं, चयन प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच हो और यदि किसी प्रकार की गड़बड़ी सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। फिलहाल इस मामले में भाजपा नेताओं की ओर से लगाए गए आरोपों के आधार पर जांच की मांग की गई है। आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
