बठिंडा में उग्र हुआ किसान आंदोलन, पुलिस ने दागे आंसू गैस के गोले और किया लाठीचार्ज : हाईवे पर जाम लगने से बढ़ा तनाव

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बठिंडा :  बठिंडा में शुक्रवार को उस समय माहौल तनावपूर्ण बन गया जब किसान और पुलिस आमने-सामने हो गई। अमृतसर जामनगर नेशनल हाईवे व भारतमाला सड़क प्रोजेक्ट के लिए एक्वायर की गई जमीन के विरोध में किसान धरना प्रदर्शन कर रहे थे। जमीन को खाली करवाने पहुंची पुलिस और किसानों के बीच टकराव हो गया। इसके बाद पुलिस को किसानों को खदेड़ने के लिए बल प्रयोग करना पड़ा। पुलिस ने किसानों पर लाठीचार्ज कर दिया और आंसू गैस गोले भी दागे।

पुलिस कार्रवाई से नाराज किसानों ने हाईवे पर धरना दिया, जिससे लंबा जाम लग गया और राहगीरों को भारी परेशानी हुई। पुलिस ने 100 से अधिक किसानों की गिरफ्तारी का दावा किया है।

जानकारी के अनुसार, किसानों को रोकने के लिए पुलिस ने पहले से ही पूरे जिले में कड़ी नाकाबंदी कर दी थी। लेकिन बड़ी संख्या में किसान गांव जेठूके के पास इकट्ठा हो गए और अपने वाहन वहीं छोड़कर पैदल बठिंडा की ओर बढ़ना शुरू कर दिया। जब किसान लगातार आगे बढ़ते रहे तो पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए बड़ी संख्या में आंसू गैस के गोले छोड़े, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई। इस घटना के बाद बठिंडा-चंडीगढ़ नेशनल हाईवे पूरी तरह जाम हो गया, जिससे लोगों को घंटों तक भारी परेशानी झेलनी पड़ी। स्कूली बसें और एंबुलेंस भी जाम में फंसी रहीं। तनावपूर्ण हालात और किसानों के आक्रामक रुख को देखते हुए पुलिस ने खुद ही बठिंडा-चंडीगढ़ नेशनल हाईवे पर बड़े ट्रक और ट्रॉलियां खड़ी कर सड़क को पूरी तरह बंद कर दिया, ताकि किसान बठिंडा की ओर आगे न बढ़ सकें।

इसके बाद किसानों ने बठिंडा-चंडीगढ़ नेशनल हाईवे पर धरना दे दिया। पुलिस के मुताबिक, आंसू गैस के गोले छोड़े जाने से किसी के घायल होने की कोई सूचना नहीं है। भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां के राज्य स्तरीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष झंडा सिंह जेठूके ने कहा कि वे अपने दोनों नेताओं को जेल से रिहा कराकर ही दम लेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि किसान शांतिपूर्ण तरीके से डिप्टी कमिश्नर कार्यालय के सामने धरना देना चाहते थे, लेकिन पुलिस आंसू गैस के गोले छोड़कर माहौल बिगाड़ रही है।

उन्होंने कहा कि किसानों ने कोई सड़क जाम नहीं की, बल्कि पुलिस ने खुद बड़े वाहनों को नेशनल हाईवे पर खड़ा कर जाम लगाया है। किसानों की बड़ी संख्या को देखते हुए बठिंडा की एसएसपी डॉ. ज्योति यादव बैंस ने खुद सुरक्षा की कमान संभाली हुई थी। जाम के कारण सड़क पर यातायात पूरी तरह ठप हो गया है। हजारों राहगीर पांच-पांच घंटे तक सड़क पर फंसे रहे। एंबुलेंस, स्कूली बसें और दफ्तर जाने वाले कर्मचारियों के वाहन भी जाम में फंसे रहे।

किसानों और सरकार के बीच टकराव बढ़ सकता :  बठिंडा-चंडीगढ़ रोड पर किसान और प्रशासन आमने-सामने हैं और दोनों पक्षों के बीच टकराव बढ़ने की आशंका है। कई अन्य किसान संगठनों ने भी भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां का समर्थन कर दिया है। जहां जिला प्रशासन किसी भी कीमत पर किसानों को बठिंडा आने से रोकने के लिए जोर लगा रहा है, वहीं भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां के नेता हर हाल में बठिंडा पहुंचने पर अड़े हुए हैं।

आंसू गैस के गोले छोड़े जाने के बाद किसान फिलहाल बठिंडा-चंडीगढ़ नेशनल हाईवे पर बैठ गए हैं और किसी भी समय आगे बढ़ने की कोशिश कर सकते हैं, जिससे स्थिति और बिगड़ सकती है। बठिंडा की एसएसपी ज्योति यादव स्वयं इस मामले की निगरानी कर रही हैं। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए लसाड़ा ड्रेन के पुल को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया है।पुलिस की सख्त नाकेबंदी के बावजूद जिला प्रधान चमकौर सिंह नैनेवाल के नेतृत्व में रूप सिंह छन्ना, भगत सिंह छन्ना, बलौर सिंह छन्ना, जरनैल बदरा, कृष्ण सिंह छन्ना, जगदेव सिंह औजला, कमलजीत कौर (बरनाला), बिंदर पाल कौर (भदौड़), संदीप कौर और सुखदीप कौर (धनौला) सहित बड़ी संख्या में किसान बरनाला से बठिंडा की ओर रवाना हुए। किसानों को रोकने के लिए बरनाला-बठिंडा राष्ट्रीय राजमार्ग पर गांव जेठूके के समीप बने हाई-टेक पुलिस नाके को पूरी तरह पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया।

जब किसानों के काफिले को आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी गई तो माहौल तनावपूर्ण हो गया। पुलिस और किसान नेताओं के बीच तीखी बहस के बाद हालात बिगड़ गए और बात झड़प तक पहुंच गई। कुछ किसान नेताओं ने नाका तोड़कर आगे बढ़ने का प्रयास किया, जिसके दौरान दोनों पक्षों में धक्का-मुक्की हुई। स्थिति बिगड़ती देख पुलिस ने हल्का लाठीचार्ज किया, जबकि किसानों ने भी डटकर विरोध किया, जिससे तनाव और बढ़ गया। बाद में पुलिस ने स्थिति पर काबू पा लिया, हालांकि कुछ किसान नेता नाकेबंदी पार करने में सफल भी रहे। सूत्रों के अनुसार, इस दौरान 100 से अधिक किसानों को गिरफ्तार किया गया है, हालांकि प्रशासन की ओर से इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। मौके पर भारी पुलिस बल और वरिष्ठ अधिकारी तैनात रहे। किसान नेताओं का कहना है कि उनकी मांग केवल जेल में बंद नेताओं की रिहाई और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा से जुड़ी है। वे शांतिपूर्ण ढंग से धरना देना चाहते थे, लेकिन प्रशासन ने बेवजह दबाव और बल प्रयोग किया। वहीं पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी अप्रिय घटना से बचाव के लिए यह कदम उठाए गए हैं।

खबर लिखे जाने तक किसानों ने बरनाला-बठिंडा राष्ट्रीय राजमार्ग पर दोबारा पक्का धरना लगा दिया था और गिरफ्तार किसानों की रिहाई की मांग की जा रही थी। किसानों ने चेतावनी दी है कि जब तक सभी गिरफ्तार किसानों को रिहा नहीं किया जाता, तब तक धरना जारी रहेगा।

राष्ट्रीय राजमार्ग पर लंबा जाम

बठिंडा-बरनाला राष्ट्रीय राजमार्ग पर गांव जेठूके के समीप किसान संगठन और पुलिस प्रशासन आमने-सामने रहे। इससे राष्ट्रीय राजमार्ग पर करीब 6 से 7 किलोमीटर लंबा जाम लग गया। इस दौरान ट्रक, कार, बस सहित सैकड़ों वाहन जाम में फंसे रहे।

बठिंडा से बरनाला जा रही स्लाइट इंस्टीट्यूट की एक वैन भी दोपहर ढाई बजे से जाम में फंसी रही। वैन में सवार 27 विदेशी विद्यार्थी घंटों तक परेशान होते रहे। पुलिस का दावा है कि स्थिति नियंत्रण में है, हालांकि इलाके में तनाव बना हुआ है और यातायात कुछ समय तक प्रभावित रहा।

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