10 साल पहले लिया था मरणोपरांत देहदान का संकल्प, अंतिम विदाई में बेटों ने भी दिया साथ
एएम नाथ। लुधियाना। लुधियाना के प्रताप सिंह वाला में सुखदेव कौर की अंतिम विदाई समाज के लिए एक मिसाल बन गई। निधन के बाद जब घर से उनकी अर्थी उठी तो उनकी दोनों बहुओं मनप्रीत कौर और राजवीर कौर ने आगे से अर्थी को अपने कंधों पर उठाया, जबकि उनके बेटे यादविंदर सिंह और गुरविंदर सिंह ने पीछे से कंधा देकर अपनी मां को अंतिम विदाई दी।
घर से कुछ दूरी तक बहुओं ने सास की अर्थी को कंधा दिया। इसके बाद सुखदेव कौर के पार्थिव शरीर को हारमनी आयुर्वेदिक कॉलेज एंड हॉस्पिटल, फिरोजपुर की प्रबंधन टीम को सौंप दिया गया। अस्पताल की टीम शव को फिरोजपुर ले गई, जहां चिकित्सा शिक्षा के लिए विद्यार्थियों द्वारा इसका अध्ययन किया जाएगा।
मौत के बाद आंखें भी दान
सुखदेव कौर की अंतिम विदाई से पहले उनकी आंखें भी दान की गईं। परिवार ने उनकी आंखें डॉ. रमेश सुपरस्पेशलिटी आई एंड लेजर सेंटर को सौंपीं। परिवार को उम्मीद है कि उनके नेत्रदान से किसी जरूरतमंद दृष्टिहीन व्यक्ति को रोशनी मिल सकेगी।
परिवार के अनुसार, सुखदेव कौर ने करीब 10 वर्ष पहले ही मरणोपरांत अपनी आंखें और शरीर दान करने का संकल्प लिया था। इसके लिए उन्होंने बाकायदा फॉर्म भरा था। परिवार ने भी इस फैसले पर अपनी सहमति देते हुए एफिडेविट दिया था।
मौत होते ही परिवार ने अस्पताल और संस्था से किया संपर्क
बुधवार शाम सुखदेव कौर का निधन होने के बाद उनके बेटों यादविंदर सिंह और गुरविंदर सिंह ने तुरंत डॉ. रमेश सुपरस्पेशलिटी आई एंड लेजर सेंटर से संपर्क किया। अस्पताल की टीम लुधियाना पहुंची और उनकी आंखें दान प्रक्रिया के तहत ले गई।
इसके बाद परिवार ने उस संस्था की टीम से संपर्क किया, जहां सुखदेव कौर ने सत्संग के दौरान देहदान का संकल्प लिया था। इसके बाद हारमनी आयुर्वेदिक कॉलेज एंड हॉस्पिटल, फिरोजपुर की टीम गुरुवार को लुधियाना पहुंची और पार्थिव शरीर को अपने साथ ले गई।
फूलों से सजी एंबुलेंस को दी विदाई
अंतिम संस्कार के बजाय देहदान की प्रक्रिया के तहत सुखदेव कौर के पार्थिव शरीर को सम्मानपूर्वक फूलों से सजी एंबुलेंस में रखा गया। गांव प्रताप सिंह वाला के सरपंच गुरमेज सिंह ने हरी झंडी दिखाकर एंबुलेंस को फिरोजपुर के लिए रवाना किया।
इस दौरान परिवार, रिश्तेदारों और ग्रामीणों ने सुखदेव कौर के नेत्रदान और देहदान के फैसले को नमन किया। परिवार ने कहा कि उनका यह कदम समाज में अंगदान और देहदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने का संदेश देता है।
