मंडी यूनिवर्सिटी को बंद करने के कुचक्र से बाज आए सरकार : जयराम ठाकुर

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एएम नाथ। मण्डी :  मण्डी से जारी बयान में नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि सरकार सरदार पटेल यूनिवर्सिटी मण्डी को बंद कर करने के कुचक्र रचने से बाज आए। पहले सरकार ने एसपीयू से उसके क्षेत्र छीन लिए जिसके कारण यूनिवर्सिटी के में कॉलेज की संख्या में भारी कमी आई, इसके बाद बजट में कटौती की गई, सरकार ने बिल्डिंग छीन ली जिससे यूनिवर्सिटी बंद हो जाए। इन सबके बाद भी जब सरकार का जी नहीं भरा तो अब मंडी यूनिवर्सिटी से सरकार सभी बीएड कॉलेज छीनने की कोशिश कर रही है, जिससे यूनिवर्सिटी के आय का बड़ा साधन अपने आप समाप्त हो जाए और सरकार को यूनिवर्सिटी पर ताला लगाने का बहाना मिल जाए। सरकार अपनी हरकतों से इस बार भी मुकर जाएगी। झूठ बोल देगी कि ऐसी बात नहीं है इसलिए मैं इस बारे में साजिश रचती फाइल का नंबर भी बता दे रहा हूं कि बड़े-बड़े पदों पर बैठे लोग झूठ बोलने से पहले यह फाइल पढ़ लें। 22 फरवरी को फाइल संख्या 1-1/2025-एचपीयू (एकेडेमिक्स) एकेडमिक ब्रांच द्वारा भेजे गए पत्र में एसपीयू के बीएड कॉलेज को एचपीयू में शिफ्ट करने को लेकर चार बिंदुओं पर राय मांगी है। इस तरह से सरकार मण्डी यूनिवर्सिटी के आय के साधन पर कैंची चलाने के साथ प्रदेश के हजारों बच्चों और उनके अभिभावकों के ऊपर आर्थिक बोझ डालने की तैयारी कर रही है।
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के अंतर्गत वर्तमान में 55 निजी बीएड कॉलेज और एक सरकारी बीएड कॉलेज है जबकि सिर्फ18 बीएड कॉलेज सरदार पटेल यूनिवर्सिटी मंडी से मान्यता प्राप्त है। जिससे विश्व विद्यालय को लगभग तीन करोड़ की आय होती है।
जयराम ठाकुर ने कहा कि सुक्खू सरकार सत्ता में आने के दिन से ही मंडी विश्वविद्यालय के पीछे पड़ी हुई है। मुख्यमंत्री एक नया विश्वविद्यालय तो नहीं खोल सकते इसलिए एक चलता विश्वविद्यालय बंद करना चाहते हैं। हाल ही में सरकार ने मंडी विश्वविद्यालय के एक भवन को निजी कॉलेज के हाथ में सौंप दिया। पद्धर डिग्री कॉलेज के साथ बनी लगभग 15 करोड़ रुपए की लागत से विश्वविद्यालय की बिल्डिंग एक साल से बनकर तैयार है लेकिन सरकार उस बिल्डिंग का उद्घाटन करके विश्विद्यालय को नहीं सौंप रही है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा की सत्ता में आते ही सुक्खू सरकार ने सबसे पहले सरदार पटेल विश्वविद्यालय मंडी के दायरे को छोटा करने का प्रयास किया। अपने स्थापना के समय जहाँ मंडी विश्वविद्यालय में प्रदेश के पांच जिलों मंडी, कांगड़ा, चंबा, कुल्लू और लाहौल-स्पीति के कुल 146 कॉलेज संबद्ध थे। उसमें से कांगड़ा, चंबा के साथ-साथ आनी और निरमंड के के इलाकों के कॉलेज को छीन लिया गया। अब एसपीयू से मात्र 46 कॉलेज संबद्ध हैं। जिसमें से 18 कॉलेज निकल जाने के बाद क्या बचेगा? सरकार प्रतिशोध की राजनीति में कांगड़ा और चंबा के छात्रों और उनके अभिभावकों की समस्याओं को भी अनदेखा कर दिया। सरकार सुख की सरकार के नाम पर प्रदेश के लोगों को दुख देने से बाज आये और सृजनात्मक राजनीति को बढ़ावा दे।
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