भाजपा नेता जय सिंह ने राज्यपाल को भेजा पत्र, लापरवाही के आरोपों की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग
मांगें पूरी न होने पर शिमला में धरना, घेराव और भूख हड़ताल की चेतावनी
डॉक्टरों की लापरवाही और अव्यवस्था के आरोप, जय सिंह ने राज्यपाल से मांगी कार्रवाई
मेडिकल कॉलेज चंबा की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल
एएम नाथ। चंबा : मेडिकल कॉलेज चंबा में कथित लापरवाही से हुई मौतों और स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली को लेकर भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य एवं वरिष्ठ अधिवक्ता जय सिंह ने राज्यपाल को पत्र भेजकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने मेडिकल कॉलेज में मौत के मामलों की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी कि मांगों पर 10 दिन के भीतर कार्रवाई नहीं हुई तो शिमला में स्वास्थ्य सचिव कार्यालय के बाहर धरना दिया जाएगा।
जय सिंह ने पत्र में आरोप लगाया कि मेडिकल कॉलेज में समय पर उपचार न मिलने के कारण कई लोगों की मौत हुई है। उनका कहना है कि जब भी कॉलेज प्रबंधन के खिलाफ शिकायत उठती है तो जांच का आश्वासन देकर मामला शांत कर दिया जाता है। उन्होंने जुलाई में चुराह निवासी की मौत के बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर शुरू हुई जांच की रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं किए जाने पर भी सवाल उठाए।
उन्होंने मेडिकल कॉलेज में बच्ची की मौत के मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि जांच रिपोर्ट स्वास्थ्य सचिव को भेजे जाने के बावजूद संबंधित डॉक्टरों पर कार्रवाई नहीं हुई है। इसके अलावा बीते शनिवार को एंबुलेंस मिलने में देरी के कारण एक महिला की रास्ते में मौत होने का आरोप लगाते हुए उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।
पत्र में मेडिकल कॉलेज की स्वास्थ्य सेवाओं पर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। जय सिंह ने दावा किया कि मरीजों को पर्याप्त जांच सुविधाएं नहीं मिलने के कारण निजी लैब का रुख करना पड़ रहा है। उन्होंने 108 एंबुलेंस सेवा की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार कॉलेज में मामूली उपचार के बाद मरीजों को दवाइयों और चिकित्सकों की कमी के कारण टांडा रेफर किया जा रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि मरीजों को ऐसी दवाइयां लिखी जाती हैं, जो सरकारी डिस्पेंसरी में उपलब्ध नहीं हैं, जिससे उन्हें निजी मेडिकल स्टोर से दवाइयां खरीदनी पड़ती हैं। उन्होंने रुई और सिरिंज जैसी बुनियादी सामग्री की उपलब्धता पर भी सवाल उठाया।
जय सिंह ने एमआरआई मशीन के संचालन में विशेषज्ञों की कमी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद इसका पूरा लाभ मरीजों को नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने जांच समितियों की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाते हुए चिकित्सा अधीक्षक के इस्तीफे की मांग की।
उन्होंने चेतावनी दी कि मांगें पूरी नहीं होने पर शिमला में स्वास्थ्य मंत्री और स्वास्थ्य सचिव कार्यालय के बाहर धरना-प्रदर्शन, घेराव, जन आंदोलन और भूख हड़ताल शुरू की जाएगी। साथ ही चंबा में चक्का जाम की चेतावनी भी दी।
