मैली के जंगल में करोड़ो के खैर के पेड़ जड़ से उखाड़ लिए और बिना नंबरों वाले पेड़ भी काटे

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मामले का खुलासा होने के बावजूद उच्चाधिकारी जिम्मेवारों को वचाने की कोशिश की जा रही, मामला अव मुख्यमंत्री के दरबार में
जांच के बाद मैली जंगल में से खैर तस्करी की कई परतें खुलने की उम्मीद
गढ़शंकर –  गांव मैली के जंगल में करोड़ों के खैर के पेड़ या तो जड़ से उखाडऩे व दो फुट के कम मोटाई के पेड़ काट कर खैर के डंपो में खैर तसकरों ने पहुंचा दिए। विभाग के डवीजनल स्त्तर के अधिकारियों दुारा कोई ठोस कार्रवाई ना करने पर अव मामला मुख्यमंत्री के दरबार, वन मंत्री व उच्चाधिकारियों के पास पहुंच गया। अव इस मामले की जांच होने पर कंडी के सबसे बड़े जंगलों में से एक मैली के जंगल में लंबे समय से खैर के पेड़ो की कटाई व जड़ से उखाडऩे के करोड़ो के चल रहे सकैंडल के पीछे के चिहरों के बेनकाव होने की संभावना है। इतने बड़े स्तर पर खैर के पेड़ो को जड़ से उखाडऩे व काटने का काम विना कुछ अधिकारियों की मिलीभुगत से होना असंभव है।
गांव मैली के जंगल में खैर के 7643 पेड़ काटने के लिए 2020 में निलामी में तीर्थ सिंह एंड कंपनी को पांच करोड़ 88 लाख में ठेका दिया था। वन विभाग दुारा जंगल में 7643 पेड़ो पर नंबर लगा दिए गए थे और उन्हें काटने की शर्तो तहत आज्ञा दी गई थी। जिसके बाद खैरों के पेड की कटान शुरू कर दी गई।  इसी के साथ जंगल में नजायज कटाई की वीडीओ व फोटो वायरल होने लगी तो मामले का ख्ुालासा हुया कि खैर के सैकड़ो पेड़ जड़ से उखाड़ लिए गए है तो जिन खैर के पेड़ो पर नंबर नहीं लगे थे उन्हें भी काट डाला गया। सूत्रों की माने तो करीव ढाई से तीन करोड़ के जड़ से पेड़ उखाड़े गए और विना नंबरों वाले काट लिए गए है। जिसके बाद विभाग ने हरकत में आने का ड्रामा रचा और करीव पैंसठ हजार की डैमेज रिर्पोट काट कर अपने फर्ज की इतिश्रि कर ली। जबकि डैमेज रिर्पोट कुल नुकसान का डेढ गुणा बनती है अगर एक करोड़ के बृक्ष काटे गए हो तो डेढ करोड़ डैमेज रिर्पोट बनती है। जबकि इतने बड़े स्त्तर पर खैर तस्करी के  में तो मामला दर्ज होना अनिवार्य होता है। अव जड़ से खैर के पेड़ उखाडऩे वाले कौन लोग है व विना नंबरो के पेड़ किसने काटे यह सभी तो जांच के बाद पता चलेगा। इस करोड़ो के खैर के पेड़ कटने व जड़ से उखाडऩे का मामले की शिकायत आरटीआई एकटीविसट मनजिंद सिंह पैंसरां ने मुख्यमंत्री, वन मंत्री, जिलाधाीश होशियारपुर, एसएसपी होशियारपुर, डायरकेटर ग्रामीण विकास व पंचायत विभाग और डायरकेटर जंगलात विभाग को भेजते हुए पूरे मामले की जांच कर आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। रिंकू नाम के ठेकेदार ने मोवाईल पर फोन करने पर कहा कि तीर्थ राम और हम एक ही है। हमने जंगल से एक पेड़ भी नजायज नहीं काटा और ना ही जड़ से उखाड़ा है। वायरल वीडीओ व फोटोज मैली जंगल की नहीं है। हमने 7643 पेड़ो को काटने की ईजाजत निलामी पर पांच करोड़ 88 लाख में ली थी। अभी 1511 पेड़ काटने को रहते है। उन्हें अव फायर सीजन के बाद ही काटा जाएगा।
खैर के जड़ से उखाडऩे का कारण: खैर के पेड़ काटने के लिए नव विभाग दुारा खैर के पेड़ काटने के लिए नियम है। जिसके तहत खैर का पेड़ जमीनी स्त्तर से ऊपर दो से तीन इंच काटा जा सकता है और दो फुट से ज्यादा मोटाई बाले पेड़ो पर नंबर लगाए जाते है और इस विना नंबरों के पेड़ नहीं काटे जा सकते। जड़ से पेड़ उखाडऩे का कारण है कि तने जितनी लकड़ जड़ों में से निकल आती है।
विभाग दुारा दबाकर अधिकारियों व तस्करी के आरोपरियों को वचाने की कोशिश: मामले का खुलासा होने पर उच्चाधिकारियों ने पेड़ काटने वालों व संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों को वचाने की कोशिश की जाती रही और इसी के चलते रेंजर को सेवानिवृत होने का समय दे दिया गया।
मनजिंदर कुमार पैसरां: मैली जंगल में लंबे समय से विभाग से लेकर हर स्त्तर पर मिलीभुगत से खैर की तसकरी के चलते नजायज कटाई का मामला चल रहा है। मेरे पास सभी सबूत है और जांच अधिकारी बुलाएगे तो सभी सबूत दे दूंगा। मैली जंगल में बड़े स्त्तर पर जड़ से पेड़ उखाड़े गए और बिना नंबरों के पेड़ काटे गए।
सेवानिवृत रेंजर जगजीवन : जंगल में नजायज कटाई की जांच की गई तो ही दो डैमेज रिर्पोट करीव सत्तर हजार की काटी गई है। इससे ज्यादा नजायज पेड़ो की कटाई नहीं की गई।
कन्र्जवेटिव महावीर सिंह: मेरे नोटिस में मामला नहीं है।  पूरी टीम बनाकर मामले की जांच करवाई जाएगी और बनती कार्रवाई की जाएगी।

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