मौत से भी बदतर सज़ा पति को देने की मांग – कोई भी दरिंदा किसी महिला पर तेजाब फेंकने की जुर्रत न कर सके : ससुराल वाले मेरे शव को हाथ भी न लगाएं…मंडी एसिड अटैक पीड़िता का दर्दनाक बयान

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अस्पताल में जिंदगी-मौत से जूझ रही पीड़िता की आखिरी चिट्ठी ने रुलाया, लिखा- ‘मेरा अंतिम संस्कार हनुमान घाट पर सिर्फ मेरे मायके वाले ही करें’

एएम नाथ। मंडी :  देवभूमि हिमाचल के मंडी ज़िले में हुए तेजाब कांड ने न केवल इंसानियत को शर्मसार किया है, बल्कि रिश्तों पर से भी विश्वास उठा दिया है। अस्पताल के बिस्तर पर असहनीय जलन और दर्द से कराह रही पीड़िता ने अपने लिखित बयान में जो बातें कही हैं, वह किसी भी संवेदनशील इंसान का कलेजा चीरने के लिए काफी हैं।


पति नंद लाल के लिए मांगी ‘मिसाल’ बनने वाली सज़ा
गंभीर रूप से झुलसी महिला ने प्रशासन को दिए अपने बयान में अपने पति नंद लाल को इस हैवानियत का जिम्मेदार ठहराया है। पीड़िता ने स्पष्ट शब्दों में लिखा है कि उसके पति को कानून के तहत कड़ी से कड़ी सज़ा दी जाए। उसके शब्दों में एक आक्रोश है—वह चाहती है कि सज़ा ऐसी हो जो समाज के लिए एक नज़ीर बने, ताकि भविष्य में कोई भी दरिंदा किसी महिला पर तेजाब फेंकने की जुर्रत न कर सके।
मरने के बाद मुझे ससुराल की छाया भी नहीं चाहिए
पीड़िता के बयान का सबसे मर्माहत करने वाला हिस्सा उसकी ‘अंतिम इच्छा’ से जुड़ा है। अपने जीवन की अनिश्चितता को भांपते हुए उसने लिखा है।
अगर इलाज के दौरान मेरी मौत हो जाती है, तो मेरा अंतिम संस्कार मंडी के हनुमान घाट पर किया जाए। मेरा संस्कार पूर्ण रूप से मेरे मायके वाले ही करें। किसी भी परिस्थिति में ससुराल पक्ष मेरे शव को हाथ न लगाए और न ही अंतिम संस्कार में शामिल हो।
यह बयान दर्शाता है कि पीड़िता के मन में अपने ससुराल और पति के प्रति किस हद तक नफरत और डर घर कर गया है।


पीड़िता की यह चिट्ठी और उसका झुलसा हुआ चेहरा आज समाज और प्रशासन की आंखों में आंखें डालकर सवाल पूछ रहा है। आखिर कब तक महिलाएं अपने ही घरों में असुरक्षित रहेंगी? यह घटना सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि हमारी सामाजिक व्यवस्था की विफलता का प्रमाण है।
फिलहाल, पीड़िता का यह बयान पुलिस और प्रशासन के पास दर्ज कर लिया गया है। अब इस पर प्रशासन कितनी जल्दी और कितनी सख्त कार्रवाई करता है यह देखना बाकी है।

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