एआईजी राजजीत सिंह हुंदल (पीपीएस ) बर्खास्त , विजिलेंस ब्यूरो को ड्रग तस्करी केस में राजजीत को नामजद करने आदेश : मु्ख्यमंत्री ने ट्वीट कर दी यह जानकारी,

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चंडीगढ़ : मुख्यमंत्री भगवंत मान ने ड्रग केस में हाईकोर्ट से आई रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई शुरू करते हुए सोमवार को पीपीएस अधिकारी राजजीत सिंह को सिर्फ बर्खास्त करने के आदेश जारी कर दिए। इसके साथ ही विजिलेंस ब्यूरो को ड्रग तस्करी केस में राजजीत को नामजद करने आदेश भी दिए गए हैं। विजिलेंस को राजजीत द्वारा नशा तस्करी से बनाई गई संपत्ति की जांच करने को भी कहा गया है। मु्ख्यमंत्री ने ट्वीट कर यह जानकारी दी।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने ट्वीट किया- नशा तस्करी में शामिल किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा, सीलबंद लिफाफों की रिपोर्टों को खंगालने के बाद राजजीत सिंह पीपीएस को ड्रग तस्करी केस में नामजद करके तुरंत नौकरी से बर्खास्त किया जाता है। विजिलेंस को चिट्टे की तस्करी से कमाई हुई संपत्ति की जांच करने के लिए भी कहा गया है, जल्द ओर जानकारी देंगे।
हाईकोर्ट में एसआईटी ने दी थी चार सीलबंद रिपोर्ट :
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा सूबे में नशा तस्करी की जांच के लिए 2017 में एसआईटी का गठन किया था। इस एसआईटी द्वारा हाईकोर्ट में चार सीलबंद रिपोर्ट दाखिल की गईं, जिनमें से तीन रिपोर्ट हाल ही में हाईकोर्ट द्वारा खोलते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री को कार्रवाई के लिए भेजी गई हैं। इन्हीं रिपोर्ट के आधार पर एआईजी राजजीत सिंह हुंदल के खिलाफ कार्रवाई के आदेश जारी किए गए हैं। हालांकि पंजाब सरकार द्वारा अब तक तीनों रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया गया लेकिन एसआईटी के सदस्यों के करीबी सूत्रों के हवाले से यह बात सामने आई है कि रिपोर्ट में एआईजी राजजीत सिंह द्वारा नशा तस्करी के जरिए अर्जित की गई आय से अधिक संपत्ति का विवरण है। उनके साथ ही तीन अन्य पुलिस अधिकारियों के नाम भी रिपोर्ट में बताए जा रहे हैं लेकिन सरकार की ओर से फिलहाल राजजीत के खिलाफ की एक्शन लिया गया है।
एसटीएफ के प्रमुख एडीजीपी हरप्रीत सिंह सिद्धू ने जब तत्कालीन इंस्पेक्टर (इस समय जेल में) इंद्रजीत सिंह को गिरफ्तार किया तो बचाव में राजजीत सिंह की ओर से अपने खिलाफ पक्षपात करने का आरोप लगाने संबंधी याचिका दायर की गई, जिस पर हाईकोर्ट ने एसआईटी को जांच के लिए दो पैरामीटर- एक, क्या एडीजीपी हरप्रीत सिंह सिद्धू याचिकाकर्ता के खिलाफ पक्षपाती थे? क्या पंजाब में राजजीत सिंह और ड्रग तस्करों के साथ इंद्रजीत की सांठगांठ थी? भी सूचीबद्ध किए थे। एसआईटी ने इन दो पैरामीटर पर जांच आगे बढ़ाई और खासतौर पर दूसरे पैरामीटर के तहत जांच में पाया कि नशा तस्करों व चार पुलिस अधिकारियों के साथ इंद्रजीत की सांठगांठ थी। इनमें तीन पंजाब पुलिस सेवा अधिकारी (पीपीएस) और एक पंजाब कैडर का आईपीएस अधिकारी है। इस तरह, दूसरे पैरामीटर के तहत जांच पूरी होते ही पहले पैरामीटर का मामला भी सुलझ गया कि राजजीत के खिलाफ एडीजीपी हरप्रीत सिद्धू का रवैया पक्षपात वाला नहीं था।
राजजीत के खिलाफ एसआईटी के निष्कर्षों की पुष्टि रिटायर्ड डीएसपी जसवंत सिंह के उस बयान से भी हुई, जो उन्होंने मोहाली की अदालत में दिया था। जसवंत सिंह तरनतारन में इंद्रजीत के साथ ही काम करते थे। जसवंत सिंह ने अदालत में दर्ज कराए बयान में कहा कि यह बात अच्छी तरह से जानते हुए कि इंद्रजीत का रैंक हेड कांस्टेबल का है, इसके बावजूद एसएसपी राजजीत ने उसे एनडीपीएस एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज करने की अनुमति दी। इसने आखिरकार कई नशा तस्करों को मुकदमें के दौरान बरी होने में आसानी हो गई। यह बात अपनी जांच रिपोर्ट में एसटीएफ प्रमुख हरप्रीत सिद्धू ने भी कही।
सूत्रों के अनुसार, एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि उक्त चार अधिकारियों ने एसएसपी के रूप में पोस्टिंग के दौरान गलत तरीके से हेड कांस्टेबल इंदरजीत सिंह को एनडीपीएस एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज करने की अनुमति दी जबकि नियमानुसार ऐसी एफआईआर एएसआई रैंक से नीचे का कोई अधिकारी दर्ज नहीं कर सकता। इससे एफआईआर में आरोपी तस्करों को अदालतों से बरी होने में आसानी हो गई। खास बात यह भी रही कि उक्त चारों एसएसपी के अधिकार क्षेत्र वाले इलाकों में ही नशीले पदार्थों की सबसे ज्यादा रिकवरी भी देखी गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह विश्वास नहीं होता कि उक्त सीनियर पुलिस अधिकारियों को यह जानकारी नहीं थी कि एनडीपीएस एक्ट के तहत नियमित एएसआई के निचले रैंक का अधिकारी ड्रग्स के मामले में एफआईआर दर्ज नहीं कर सकता। चारों अधिकारियों के कामकाज के इस तरीके ने, पैसा बनाने के लिए अधिकारियों और तस्करों के बीच साठगांठ का संदेह पैदा कर दिया है।

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