राजनीति नहीं, मरीजों की सेवा मेरा पहला धर्म : डॉ. जनक राज

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सीएम की टिप्पणी पर डॉ. जनक राज का पलटवार

कहा, जनसेवा पर सवाल नहीं, स्वास्थ्य व्यवस्था पर जवाब दें

कहा, जनता को भाषण नहीं, बेहतर इलाज चाहिए

एएम नाथ। शिमला : हिमाचल प्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर चल रही राजनीतिक बहस के बीच विधायक डॉ. जनक राज ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की टिप्पणी पर जवाब देते हुए कहा कि उनका पहला दायित्व जनता की सेवा और मरीजों की मदद करना है। उन्होंने कहा कि डॉक्टर का धर्म और जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी दोनों ही जनता के प्रति जवाबदेही से जुड़े हैं।
डॉ. जनक राज ने कहा कि पद और राजनीति से ऊपर मानव सेवा है। विधायक बनने के बाद भी उन्होंने चिकित्सा क्षेत्र से अपना जुड़ाव बनाए रखा है और जरूरतमंद मरीजों की सहायता करना जारी रखा है। उन्होंने कहा कि मरीजों की रिपोर्ट देखना, स्वास्थ्य संबंधी सलाह देना, चिकित्सा शिविरों का आयोजन करना और जरूरतमंद लोगों तक सुविधाएं पहुंचाना किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि सेवा भाव से किया जा रहा है।
उन्होंने मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि सरकार के पास जनसेवा करने वाले प्रतिनिधियों पर टिप्पणी करने का समय है तो उसे प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़े गंभीर सवालों का भी जवाब देना चाहिए। उन्होंने पूछा कि सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों और आवश्यक संसाधनों की कमी कब पूरी होगी तथा दूरदराज क्षेत्रों में लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं कब मिलेंगी।
डॉ. जनक राज ने कहा कि प्रदेश की जनता अब केवल घोषणाओं और आश्वासनों से संतुष्ट नहीं होगी। लोगों को धरातल पर बेहतर इलाज, समय पर स्वास्थ्य सेवाएं और अस्पतालों में पर्याप्त सुविधाएं चाहिए। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि का मूल्यांकन उसके काम से होता है, न कि केवल बयानों से।
स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर विपक्ष और सरकार के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार जारी है। डॉ. जनक राज के समर्थकों का कहना है कि जो व्यक्ति पद पर रहते हुए भी मरीजों के बीच खड़ा रहता है, वही जनता के विश्वास का वास्तविक हकदार है।
उन्होंने कहा कि राजनीति का उद्देश्य सत्ता नहीं, बल्कि समाज की सेवा होना चाहिए और जनता समय आने पर काम और दावों के बीच अंतर जरूर तय करती है।

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