चंडीगढ़ : पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने विधिक सहायता (लीगल एड) डिफेंस काउंसल सिस्टम में पारदर्शिता और प्रभावशीलता लाने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल चंद्र शेखर की ओर से पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के सभी जिला एवं सत्र न्यायाधीशों को पत्र भेजकर इन आदेशों को तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।
DLSA सचिव के माध्यम से ही होगी नियुक्ति: अब जेल में बंद किसी भी आरोपी के लिए लीगल एड वकील की नियुक्ति केवल जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) के सचिव ही करेंगे। कोई भी वकील सीधे जेल में जाकर आरोपी से पावर ऑफ अटॉर्नी नहीं ले सकेगा।
जेल विजिट के लिए रोस्टर: DLSA सचिव ही वकीलों के जेल विजिट के लिए ड्यूटी रोस्टर तैयार करेंगे। सामान्यतः न्यायिक अधिकारी वकीलों के साथ जेल नहीं जाएंगे। अचानक नया वकील नियुक्त नहीं होगा: यदि किसी आरोपी का निजी वकील अदालत में अनुपस्थित रहता है, तो कोर्ट तुरंत नया लीगल एड वकील नियुक्त नहीं करेगी। पहले इस संबंध में आदेश पारित कर आरोपी या उसके वकील को सूचित किया जाएगा। अगली तारीख पर भी कोई पेश नहीं होने पर ही मामला DLSA को भेजा जाएगा।
रिमांड के दौरान लीगल एड सुविधा: रिमांड प्रक्रिया के दौरान मजिस्ट्रेट को आरोपी के वकील की मौजूदगी सुनिश्चित करनी होगी। वकील न होने की स्थिति में लीगल एड वकील उपलब्ध कराया जाएगा, हालांकि उस समय पावर ऑफ अटॉर्नी नहीं ली जाएगी।
हाईकोर्ट ने जमानत अर्जी के मामलों में अदालतों को समानता का सिद्धांत अपनाने के निर्देश दिए हैं, ताकि सभी आरोपियों को समान न्याय मिल सके।
इसके साथ ही DLSA सचिव को यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई है कि कानूनी सहायता मांगने वाला व्यक्ति ‘लीगल सर्विस अथॉरिटी एक्ट, 1987’ की धारा 12 के तहत पात्र है या नहीं।
हाईकोर्ट ने साफ किया है कि लीगल एड वकीलों को पेशेवर आचार संहिता (Professional Code of Conduct) का सख्ती से पालन करना होगा। वे अपने, अपने परिवार या अपने चैंबर के लिए व्यक्तिगत रूप से काम की मांग नहीं कर सकते।
हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुसार सभी जिला जजों को अपने-अपने क्षेत्राधिकार के सभी न्यायिक अधिकारियों और DLSA सचिवों को इन नियमों का कड़ाई से पालन कराने का आदेश दिया गया है।
