विकसित भारत’ से ही ‘विकसित विश्व’ संभव : डॉ. सलारिया

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जीडीसी सलूणी में ‘संयुक्त राष्ट्र और विकसित भारत’ पर सारगर्भित व्याख्यान; मतदाता जागरूकता का भी दिया गया संदेश

एएम नाथ। सलूणी :   राजकीय महाविद्यालय (जीडीसी) सलूणी के सभागार में 24 अक्टूबर को संयुक्त राष्ट्र दिवस के उपलक्ष्य पर एक विशेष व्याख्यान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह ज्ञानवर्धक कार्यक्रम महाविद्यालय के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आईक्यूएसी) तथा राजनीति विज्ञान विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया।


व्याख्यान का मुख्य विषय “संयुक्त राष्ट्र और विकसित भारत – एक शांतिपूर्ण और विकसित दुनिया की ओर: एक विकसित दुनिया के लिए एक विकसित भारत” रखा गया था।
कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. मोहिंदर कुमार सलारिया की अध्यक्षता में हुआ, जबकि मंच का सफल संचालन आईक्यूएसी प्रभारी श्री दिनेश कुमार द्वारा किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के तौर पर प्राचार्य डॉ. मोहिंदर कुमार सलारिया ने संयुक्त राष्ट्र की स्थापना, इसके ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य और वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में इसकी भूमिका पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि 24 अक्टूबर 1945 को स्थापित इस वैश्विक संगठन का मुख्य उद्देश्य विश्व शांति, सुरक्षा और मानवाधिकारों की रक्षा करना है।


डॉ. सलारिया ने भारत के ‘विकसित भारत @ 2047’ के संकल्प को संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों से जोड़ते हुए कहा कि भारत का आर्थिक और सामाजिक विकास केवल भारत के लिए ही नहीं, बल्कि संपूर्ण विश्व के कल्याण के लिए आवश्यक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि “एक विकसित भारत ही एक विकसित विश्व के निर्माण में अपनी अग्रणी भूमिका निभा सकता है।”
भारत की वैश्विक भूमिका और मतदान का महत्व: पर प्रो. गुरदेव सिंह
इसके उपरांत, राजनीति विज्ञान विभाग के सहायक प्रोफेसर श्री गुरदेव सिंह ने मुख्य विषय पर अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में भारत की सक्रिय भूमिका, गुटनिरपेक्ष आंदोलन से लेकर वर्तमान में ‘विश्वगुरु’ बनने तक के सफर पर चर्चा की। उन्होंने छात्रों को बताया कि कैसे ‘विकसित भारत’ का लक्ष्य भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के अपने दावे को मजबूत करने में मदद करेगा।
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मतदाता जागरूकता पर विशेष सत्र
व्याख्यान के दूसरे चरण में, श्री गुरदेव सिंह ने “मतदाता जागरूकता और वोट का महत्व” विषय पर एक विशेष सत्र लिया। उन्होंने छात्रों को लोकतंत्र का ‘महापर्व’ यानी चुनाव के महत्व को समझाया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक वोट देश की भावी दिशा तय करता है और युवाओं को बिना किसी लोभ-लालच या भय के, विवेकपूर्ण तरीके से अपने मताधिकार का प्रयोग करना चाहिए। उन्होंने नए मतदाताओं से पंजीकरण कराने और चुनावी प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लेने का आह्वान किया।
इस दोहरे विषय पर आधारित कार्यक्रम के दौरान, महाविद्यालय के अन्य प्राध्यापक, जिनमें सहायक प्रोफेसर श्रीमती पिंकी देवी तथा सहायक प्रोफेसर श्री शुभम डोगरा भी शामिल थे, उपस्थित रहे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने भाग लिया और वैश्विक मामलों के साथ-साथ अपने लोकतांत्रिक अधिकारों के प्रति भी जागरूकता प्राप्त की।

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