शाम होते ही शंभू गर्ल्स हॉस्टल के बाहर लगती थी लग्जरी गाड़ियों की लाइन : SIT के रडार पर कौन हैं ये 5 चेहरे?

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पटना :  पटना में नीट की तैयारी कर रही जहानाबाद की छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। अब इस प्रकरण में पुलिस द्वारा दी गई प्रारंभिक जानकारी और मेडिकल बोर्ड की विस्तृत पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बीच बड़े अंतर सामने आए हैं।

नीट छात्रा की संदिग्ध मौत ने अब एक ऐसा राजनीतिक और प्रशासनिक तूफान खड़ा कर दिया है, जिसकी तपिश में कई रसूखदार चेहरे झुलस सकते हैं. मामला अब केवल एक छात्रा की मौत का नहीं रह गया है, बल्कि यह एक हाई-प्रोफाइल ‘कवर-अप’ की कहानी बयां कर रहा है। स्थानीय लोगों और सूत्रों के अनुसार इस हॉस्टल के बाहर शाम ढलते ही लग्जरी गाड़ियों की लंबी कतारें लगा करती थीं. सवाल यह है कि उन गाड़ियों में कौन आता था और उनका इस हॉस्टल के भीतर क्या काम था? क्या इन हाई-प्रोफाइल चेहरों को बचाने के लिए ही पुलिस और डॉक्टरों ने ‘सुसाइड’ की झूठी पटकथा लिखी?

पुलिस की ‘थ्योरी’ और पोस्टमार्टम का ‘सच’

शुरुआत में पटना के एएसपी सदर अभिनव कुमार और सीनियर एसएसपी कार्तिकेय शर्मा ने जिस तरह से इस मामले को ‘नींद की गोलियों का सेवन’ और ‘सुसाइड सर्च हिस्ट्री’ से जोड़कर पेश किया, वह अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट के सामने आने के बाद पूरी तरह बेनकाब हो गया है. पुलिस ने दावा किया था कि छात्रा के शरीर पर चोट के कोई निशान नहीं हैं।  लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने जो हकीकत बयां की है, वह रूह कंपा देने वाली है. मृतका की गर्दन पर नाखूनों के निशान, दाहिनी जुगुलर नस में पंक्चर और शरीर के विभिन्न अंगों जैसे छाती, जांघ और पीठ पर नीले निशान मिले हैं. सबसे भयानक बात यह है कि जननांगों यानी प्राइवेट पार्ट पर मिली चोटें साफ तौर पर जबरन शारीरिक संबंध और दरिंदगी की ओर इशारा कर रही हैं।

5 और 6 जनवरी की वो रहस्यमयी रात :  5 जनवरी की रात 9 बजे छात्रा ने अपने माता-पिता से सामान्य बातचीत की थी. उसने कहा था कि वह खाना खाने जा रही है. लेकिन 6 जनवरी को वह हॉस्टल के भीतर बेहोश पाई गई. इस दरमियान जो कुछ भी हुआ, वही इस मर्डर मिस्ट्री का केंद्र है. हॉस्टल की वार्डन नीतू ठाकुर ने लड़की के माता-पिता को सूचित करने के बजाय उसकी एक सहेली के पिता जो एक्स-सर्विसमैन हैं को फोन क्यों किया? माता-पिता से सच क्यों छिपाया गया? क्या इस बीच साक्ष्यों को मिटाने की कोशिश की गई?

रसूखदारों की मिलीभगत और पुलिस की भूमिका : हॉस्टल के मालिक मनीष कुमार रंजन, संचालक श्रवण अग्रवाल और उनकी पत्नी नीलम अग्रवाल अब जांच के घेरे में हैं. मनीष कुमार रंजन की गिरफ्तारी तो हुई, लेकिन उसे रिमांड पर लेकर पुलिस ने कड़ी पूछताछ क्यों नहीं की? परिजनों का आरोप है कि मनीष रंजन के प्राइवेट बॉडीगार्ड्स अस्पताल में उन्हें घेरे रहते थे और नीलम अग्रवाल केस मैनेज करने की कोशिश कर रही थी. चित्रगुप्त नगर की थानेदार रोशनी कुमारी पर भी उंगलियां उठ रही हैं. क्या उन्होंने रसूखदारों के दबाव में आकर शुरुआती जांच को जानबूझकर कमजोर किया? क्या हॉस्टल की अन्य लड़कियों के बयान रिकॉर्ड किए गए?

अस्पतालों का खेल और अंतिम आंसू : शाहजानंद क्लीनिक से लेकर प्रभात मेमोरियल अस्पताल तक इलाज के नाम पर जो खेल हुआ, वह संदिग्ध है. डॉक्टर सतीश की भूमिका और उनकी शुरुआती रिपोर्ट जिसमें चोट के निशान न होने की बात कही गई थी, अब संदेह के घेरे में है. मृतका के मामा ने बताया कि अस्पताल में जब लड़की को कुछ पलों के लिए होश आया, तो वह अपनी मां से कुछ कहना चाहती थी. जब मां ने पूछा कि क्या उसके साथ कुछ गलत हुआ है, तो उसकी आंखों से आंसू छलक पड़े. वह कुछ बोल नहीं पाई और फिर सदा के लिए खामोश हो गई. क्या उसे जबरन चुप कराने के लिए कोई इंजेक्शन दिया गया था?

आईजी जितेंद्र राणा की एसआईटी के सामने चुनौतियां

अब इस पूरे मामले की जांच आईजी जितेंद्र राणा के नेतृत्व में गठित एसआईटी (SIT) कर रही है. उनके सामने कई सुलगते सवाल हैं।

1-लड़की के वे कपड़े कहां हैं जो उसने वारदात के वक्त पहने थे?

2-मोबाइल फोन से डिलीट किया गया डेटा क्या राज उगलेगा?

3-हॉस्टल के रजिस्टर से अतिथियों के नाम गायब क्यों हैं?

4-हॉस्टल का गार्ड उस रात कहां था?

5-विसरा रिपोर्ट आने से पहले पुलिस ने सुसाइड का दावा कैसे किया?

6- सीसीटीवी शंभू गर्ल्स हॉस्टल के आगे में लगा है, लेकिन गली वाले गेट पर सीसीटीवी क्यों नहीं लगा था? क्या इसी गेट से आरोपी हॉस्टल के अंदर घुसे?

कुलमिलाकर एम्स के विशेषज्ञों की राय और फॉरेंसिक लैब की रिपोर्ट अब इस मामले में अंतिम कील साबित होगी. पटना पुलिस की साख दांव पर है. अगर उन लग्जरी गाड़ियों वाले हाई-प्रोफाइल चेहरों के नाम सामने नहीं आए, तो यह बिहार के सिस्टम पर सबसे बड़ा धब्बा होगा. एक मां अब भी अपनी बेटी के इंसाफ के लिए दर-दर भटक रही है, जबकि सिस्टम के कुछ पुर्जे आज भी दरिंदों को ढाल प्रदान कर रहे हैं।

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