समुद्र तट, बोटिंग और पक्षी उद्यान से मिला नया अनुभव : चंबा के बच्चों ने दमन के ऐतिहासिक स्थलों का किया शैक्षणिक भ्रमण

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सुख आश्रय योजना’ से संवर रहा निराश्रित बच्चों का भविष्य

एएम नाथ। चंबा :  चंबा जिला के अंतर्गत विभिन्न बाल देखभाल संस्थानों में रह रहे 35 “चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट” इन दिनों दमन और दीव के शैक्षणिक भ्रमण पर हैं। भ्रमण के पांचवें दिन बच्चों ने दमन के सत्र न्यायालय सहित कई प्रशासनिक और ऐतिहासिक भवनों का अवलोकन कर अपने ज्ञान में वृद्धि की।
भ्रमण दल के प्रभारी एवं बाल संरक्षण अधिकारी अजय भारद्वाज ने बताया कि यह शैक्षणिक यात्रा बच्चों के लिए बेहद ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक साबित हो रही है। उन्होंने कहा कि बच्चों में नए स्थानों को देखने, समझने और सीखने को लेकर काफी उत्साह देखा जा रहा है।
उन्होंने बताया कि ऐतिहासिक स्थलों के अवलोकन के बाद बच्चों ने समुद्र तट स्थित आकर्षक व्यू प्वाइंट का भी भ्रमण किया। यहां बच्चों ने समुद्र के मनमोहक दृश्यों का आनंद लिया और बोटिंग जैसी रोमांचक गतिविधियों में हिस्सा लेकर यादगार अनुभव प्राप्त किए। समुद्र की लहरों और प्राकृतिक सुंदरता ने बच्चों को खासा प्रभावित किया।
इसके अतिरिक्त बच्चों ने दमन स्थित पक्षी उद्यान (एवियरी) का भी दौरा किया। इस दौरान उन्होंने विभिन्न अंतरराष्ट्रीय पक्षी प्रजातियों को नजदीक से देखा और उनके बारे में महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं। यह अनुभव न केवल उनके लिए शिक्षाप्रद रहा, बल्कि प्रकृति और वन्य जीवन के प्रति उनकी रुचि को भी बढ़ाने वाला साबित हुआ।
उल्लेखनीय है कि यह शैक्षणिक भ्रमण प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी सुख आश्रय योजना के अंतर्गत आयोजित किया गया है। इस योजना को मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में लागू किया गया है, जिसका उद्देश्य निराश्रित बच्चों के सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करना है।
इस योजना के तहत राज्य सरकार इन बच्चों के अभिभावक के रूप में उनकी शिक्षा, देखभाल और समग्र विकास की जिम्मेदारी निभा रही है। इसी कड़ी में चंबा जिला के बाल देखभाल संस्थान चंबा, तीसा, साहो तथा जनजातीय उपमंडल पांगी से 35 बच्चों—जिनमें 24 लड़कियां और 11 लड़के शामिल हैं—को इस शैक्षणिक भ्रमण पर भेजा गया है।
यह भ्रमण 31 मार्च से आरंभ हुआ था और 7 अप्रैल तक जारी रहेगा। खास बात यह भी है कि मुख्यमंत्री ने स्वयं हाल ही में बच्चों से संवाद कर उनके अनुभवों को जाना और उन्हें प्रोत्साहित किया।
इस प्रकार का शैक्षणिक भ्रमण न केवल बच्चों के ज्ञान और आत्मविश्वास को बढ़ाता है, बल्कि उन्हें नए परिवेश और संस्कृति से परिचित कराते हुए उनके व्यक्तित्व विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

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