साधा सचिन पायलट पर निशाना अशोक गहलोत ने : गहलोत और कांग्रेस नेता सचिन पायलट के बीच की तल्खी बुधवार को एक बार फिर जाहिर

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जयपुर। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और कांग्रेस नेता सचिन पायलट के बीच की तल्खी बुधवार को एक बार फिर जाहिर हुई। राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा राजस्थान में आने वाली है। इसकी तैयारियों को लेकर बुलाई गई बैठक में गहलोत और पायलट दूर-दूर बैठे दिखे। दोनों नेताओं ने आपस में बात भी नहीं की। दूसरी ओर गहलोत ने एक न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में पायलट पर हमला बोलते हुए कहा कि पायलट को कैसे सीएम बना सकते हैं। जिस आदमी के पास 10 विधायक नहीं हैं, जिसने बगावत की है, जिसे गद्दार नाम दिया गया है, उसे कैसे लोग स्वीकार कर सकते हैं। गहलोत ने कहा कि जिसके कारण वे 34 दिन होटलों में बैठे रहे, ये सरकार गिरा रहे थे, अमित शाह भी शामिल थे। धर्मेंद्र प्रधान भी शामिल थे। गहलोत कैंप के द्वारा पायलट को स्वीकार नहीं करने के सवाल पर गहलोत ने कहा कि जो आदमी गद्दारी कर चुका है, उसे हमारे एमएलए और उन्होंने खुद भुगता है, 34 दिन तक होटलों में रहे हैं, उनको वे कैसे स्वीकार करेंगे।
राज्य में करवाना चाहिए सर्वे, जो होगा आगे उसे ही बनाया जाए सीएम चेहरा-गहलोत :
गहलोत ने कहा कि राज्य में सर्वे करवाया कि उनके मुख्यमंत्री रहने से सरकार आ सकती है तो उन्हें रखिए, यदि किसी दूसरे चेहरे से सरकार आ सकती है तो उसे सीएम बनाया जाए। वे अमरिंदर सिंह की तरह बगावत नहीं करेंगे। वे सरकार बनाने के लिए जान लगा देंगे। सीएम रहने के सवाल पर गहलोत ने कहा कि आज तो वे ही यहां पर सीएम हैं। हाईकमान की तरफ से इशारे के सवाल पर उन्होंने कहा कि हाईकमान के इशारे की छोड़ो, उन्हें तो कोई इंडिकेशन नहीं है। वे हाईकमान के साथ हैं। लेकिन पायलट को कोई स्वीकार ही नहीं करेगा। गहलोत ने कहा कि हाईकमान राजस्थान के साथ न्याय करेगा। सितंबर महीने में वे अजय माकन और हाईकमान को अपनी फीलिंग बता चुके हैं। राजस्थान में सरकार आना जरूरी है। वे तीन बार सीएम रह चुके हैं। उनके लिए सीएम रहना जरूरी नहीं है।
सचिन पायलट के साथ झगड़े के सवाल पर गहलोत ने कहा कि जब 2009 में लोकसभा चुनाव में राजस्थान से 20 सांसद कांग्रेस के जीते तो उन्हें दिल्ली बुलाया गया। जब वर्किंग कमेटी की बैठक हुई तो राजस्थान से मंत्री बनाने के बारे में भी उनसे ही पूछा गया। सचिन पायलट को जानकारी है, उन्होंने ही पायलट को केंद्र में मंत्री बनाने की सिफारिश की थी। उस समय वसुंधरा राजे की सरकार में 70 गुर्जर मारे गए थे, यहां गुर्जर-मीणाओं में झगड़ा था। गहलोत ने कहा कि मैंने गुर्जर समाज से सचिन पायलट को मंत्री बनाने की सिफारिश की। इससे गुर्जर-मीणा का झगड़ा खत्म होगा। बाद में उनके पास सचिन पायलट का फोन आया था कि उनकी सिफारिश कीजिए, जबकि वे तो पहले ही सिफारिश कर चुके थे। जिस आदमी के दिल में प्यार होगा, तभी तो वह नौजवान की सिफारिश करेगा।
पार्टी की हालत पर गहलोत ने कहा कि उन्होंने कोई टेंशन नहीं है। थोड़े बहुत मतभेद सब जगह होते हैं। 25 सितंबर को बगावत नहीं हुई थी। 2019 में बगावत हुई थी, 34 दिन होटलों में रहे। 25 सितंबर को 90 लोग इकट्ठे हुए, ये वे लोग थे, जिन्होंने सरकार बचाने में सहयोग किया, वरना सरकार बच नहीं सकती थी। बिना हाईकमान कोई सीएम सरकार बचा ही नहीं सकता। गहलोत ने कहा कि कांग्रेस का कोई मुख्यमंत्री ऐसा नहीं है जो हाईकमान के बिना विधायकों का समर्थन ले। जिसने पार्टी के साथ गद्दारी की, गद्दारी किए हुए आदमी को हमारे विधायक कैसे स्वीकार कर सकते हैं।
गहलोत ने कहा कि एक बात फैलाई गई कि सचिन पायलट को सीएम बनाया जा रहा है। पायलट ने खुद ऐसा व्यवहार किया कि वे सीएम बनने जा रहे हैं। उन्होंने कई विधायकों को फोन किए कि पर्यवेक्षक आ रहे हैं, उन्हें यह कहना है। गहलोत ने कहा कि इन हालातों में एमएलए को यह भ्रम हो गया कि पायलट विधायक दल की बैठक के दूसरे दिन ही शपथ ले रहे हैं। इसलिए 90 विधायक इकट्ठे हो गए थे। वे सब निष्ठावान हैं और हाईकमान के साथ हैं। जिसकी वजह से हम 34 दिन होटलों में रहे, जिसने सरकार गिराने का षड्यंत्र किया, उसे विधायक कैसे स्वीकार करते।
गहलोत ने कहा कि मानेसर में पायलट के साथ बगावत करने वाले विधायक गए थे। जिस रिसोर्ट में मध्यप्रदेश के विधायकों को ठहराया गया था, उसी में पायलट के समर्थक विधायकों को रोका गया था। वे उम्मीद नहीं कर सकते थे कि पार्टी का अध्यक्ष अपनी ही पार्टी की सरकार गिराने के लिए विपक्ष से मिल जाए। इतिहास में आज तक कभी ऐसा नहीं हुआ। इसी वजह से विधायक पायलट का नाम सुनते ही नाराज थे।

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