सीता राम चरण रति मोरे, अनुदिन बढ़ऊ अनुग्रह तोरे, जेहि विधि नाथ होए हित मोरा, करहूं सो बेगि दास प्रभु तोरा

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श्री सुन्दर कांड और राम राज्याभिषेक के प्रसंग के साथ ही 9 दिवसीय श्री राम कथा ने लिया विश्राम

पूज्य राजन जी महाराज ने 9 दिन श्रद्धालुओं को कथा के माध्यम से प्रभु चरणों से जोड़ा

होशियारपुर/दलजीत अज्नोहा : श्री बड़े हुनमान जी सेवक संस्था होशियारपुर की तरफ से चेयरमैन व कथा आयोजक पूर्व मेयर शिव सूद एवं प्रधान राकेश सूरी की अगुवाई में करवाई जा रही श्री राम कथा के नौंवे व अंतिम दिन की शुरुआत कथा व्यास राजन जी महाराज ने श्री सुन्दर कांड की कथा के साथ किया। उन्होंने बताया कि माता शबरी से मिलने एवं उनका उद्धार करने के बाद जब भगवान राम सुग्रीव से मिलने पहुंचे तो सुग्रीव पहाड़ी पर थे और उन्होंने देखा कि धनुष बाण वाले दो लोग कौन आ रहे हैं। इस पर डर गए कि कहीं उनके भाई बाली ने उनको मारने के लिए इन्हें न भेजा हो। इस पर उन्होंने श्री हनुमान जी को उनके बारे में पता करने के लिए भेजा। जब श्री हनुमान जी श्री राम जी के समक्ष पहुंचते हैं तो वह ब्राह्मण के भेष में पहुंचते हैं और भगवान से उनका परिचय पूछते हैं। भगवान राम श्री हनुमान जी को पहचान लेते हैं और जब उन्हें अपने बारे में बताते हैं तो श्री हनुमान जी प्रभु के चरणों में गिरकर प्रणाम करते हैं। भगवान ने उन्हें उठाया और हृदय से लगाया। इसके बाद श्री हनुमान जी उन्हें सुग्रीव के पास लेकर जाते हैं। भगवान सुग्रीव का राज्याभिषेक करते हैं और बाली का बध करके उन्हें राज्य सौंपते हैं और कहते हैं कि माता सीता का पता लगाएं। लेकिन सुग्रीव इस बात को भूल जाता है तथा जब भगवान के क्रोध का उसे पता चलता है तो वह प्रभु के पास आकर क्षमा याचना करते हैं तथा अपने सिपाहियों को पूर्व, उत्तर और पश्चिम दिशा में भेजते हैं। लेकिन वह अपने सबसे शक्तिशाली और बुद्धिमान सेनापतियों और कपियों को बुलाते हैं और उन्हें दक्षिण दिशा में माता सीता की खोज में भेजते हैं। इसी दौरान जब सभी चले जाते हैं तो श्री हनुमान प्रभु को प्रणाम करके जाने लगते हैं तो भगवान उन्हें राम नाम अंकित मुद्रिका उन्हें देते हैं ताकि माता सीता से जब वह मिलें तो माता सीता मुद्रिका देखकर पहचान जाए कि यह कोई अपना ही है। रास्ते में उन्हें स्वयंप्रभा मिली उन्होंने सभी को समंदर के किनारे भेजा जहां पर सम्पाति जी ने माता सीता जी की सही जानकारी दी कि वह समंदर पार त्रिकूट पर्वत में बनी अशोक वाटिका में अशोक वृक्ष के नीचे माता सीता माता बैठी हैं। उन्होंने कहा कि वह अब बूढ़ा हो चुके हैं और उनमें इतनी जान नहीं कि वह उड़कर वहां जा पाएं, लेकिन वह जानते हैं कि वहां कौन जा सकता है। इस पर सभी पूछते हैं कि कौन जा सकते हैं। सम्पाति जी बताते हैं कि जो 100 योजन (1200 किलोमीटर) की दूरी को एक ही छलांग में लांघ जाए वह वहां जा सकता है। इस पर जामवंत जी ने कहा कि बताईए कौन जा सकता है। इसके बाद सभी कपि अपने-अपने बल का वर्णन करने लगे। कोई 50 योजन तो कोई 90 योजन जाने की बात कहता है। अंगद कहूं जाउं मैं पारा, जिय संशय कछु विरति बारा। अंगद ने कहा कि वह 100 योजन जा तो सकता है लेकिन इस बात का संशय है कि वह वापिस आएगा या नहीं। जब सभी बोल दिए तो जामवंत जी को ध्यान आया कि हनुमान जी कहां हैं। देखा कि हनुमान जी एक तरफ आंखें बैठे प्रभु की भक्ति में लीन हैं। वहां पहुंचकर जामवंत जी कहते हैं, कहइ रीछपति सुनु हनुमाना, का चुप साधि रहु बलवाना। पवन तनय बल पवन समाना, बुधि विवेक बिग्यान निधाना। श्री हनुमान जी राम सिया राम सिया राम जय जय राम की धुन में मस्त बैठे हैं। इस पर जामवंत जी कहते हैं हे हनुमान जी राम काज लगि तब अवतारा, सुनते ही भयउ पर्वताकारा। हमे बजरंगबलि आपका अवतार केवल और केवल राम कार्य हेतु हुआ है और उसी कार्य के लिए आपको पुकारा जा रहा है। इतना सुनते ही श्री हनुमान जी इतने विशाल हो गए सभी सिर उठाकर देखने लगे और उनका आकार स्वर्ण पर्वत की भाति हो गया। श्री हनुमान जी जामवंत जी से आज्ञा मांगने लगे कि वह क्या करें। इस पर जामवंत जी कहने लगे कि पहले नीचे आइए और सुनिए कि आप न तो रावण को मारिएगा और न ही लंका को यहां लाइएगा। आपने सिर्फ इतना ही करना है कि आपने माता सीता का पता लगाना है और आकर प्रभु राम को बताएंगे। इसके बाद श्री हनुमान जी एक ही छलांग में लंका के लिए उड़ते हैं। गोस्वामी जी कहते हैं श्री हनुमान जी इतने वेग से उड़े कि पाताल तक धरती डोलने लगी। राजन जी महाराज ने बताया कि इसके बाद श्री हनुमान जी लंका जाते हैं और लंका में विभिषण जी से मिलते हैं और माता सीता का पता लगाने के बाद उन्हें भूख लगती है तो वह अशोक वाटिका में लगे फल खाने लगते हैं। इसके बाद उन्होंने मेघनाद द्वारा ब्रह्मास्त्र से श्री हनुमान जी को बांधना एवं लंका के सामने ले जाने की कथा का वर्णन किया। श्री हनुमान जी रावण को समझाते हैं, पर रावण नहीं समझता। इसके बाद उन्होंने श्री हनुमान जी द्वारा लंका को जलाना और वापिस आकर प्रभु को माता सीता जी के बारे में बताने, रामसेतु का निर्माण और प्रभु के लंका में प्रवेश करने उपरांत रावण वध की कथा का व्याख्यान किया। इसके बाद प्रभु विभिषण को लंका का राज्य देकर वापिस अयोध्या को लौटते हैं। इस दौरान उन्होंने प्रभु द्वारा लौटते समय रास्ते में अपने भक्तों से मिलने की कथा का भी प्रसंग सुनाया। अयोध्या में जब इस बात का पता चलता है कि प्रभु आ रहे हैं तो पूरी नगरी और राज्य में खुशी की लहर दौड़ जाती है और श्री हनुमान जी भरत को इस बारे में बताते हैं। प्रभु अयोध्या पहुंचते हैं और उनका राज्याभिषेक होता है। राजन जी महाराज ने श्री सुन्दर कांड और अन्य प्रसंगों को बहुत ही सुन्दर एवं मधुर वाणी में सुनाकर उपस्थिति को भावविभोर कर दिया। इस दौरान उन्होंने भजनों के माध्यम से उपस्थिति को झूमने पर विवश कर दिया और सभी को कथा के सफल आयोजन की बधाई दी। उन्होंने कहा कि जब भी प्रभु के सामने जाएं तो, सीता राम चरण रति मोरे, अनुदिन बढ़ऊ अनुग्रह तोरे, जेहि विधि नाथ होए हित मोरा, करहूं सो बेगि दास प्रभु तोरा, चौपाई गाएं, इससे प्रभु बहुत प्रसंन्न होते हैं और उनकी कृपा प्राप्त होती है।

इस मौके पर महापुरुषों में स्नेहमयी मां स्नेह अमृतानंद जी भृगु शास्त्री, राष्ट्रीय संत बाबा बाल जी महाराज कोटला कलां ऊना, श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर महंत बंसी दास जी महाराज रंगनाथ धाम पठानकोट, श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर महंत हरिराम दास जी महाराज शिव विद्या मां बंगलामुखी धाम तथा श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर महंत अनंतागिरि जी महाराज जूना अखाड़ा ऋषिकेश जी ने विशेष तौर से पहुंचकर कथा श्रवण की और श्रद्धालुओं को आशीर्वाद प्रदान किया।

इस मौके पर आचार्य इंद्रदेव जी बबलू पंडित मां कालिका धाम जालंधर, मनी भैयी संकीर्तनाचार्य जालंधर, पं. सचिन शास्त्री, विधायक ब्रमशंकर जिम्पा, संयुक्त कमिशनर संदीप तिवाड़ी, चेयरमैन संदीप सैनी, श्री हिन्दु गोरक्षिणी सभा गौशाला के प्रधान विश्वनाथ बंटी, विष्णु दिगम्बर सूद, डा. पंकज शर्मा, मनोज शर्मा, करणजोत आदिया प्रधान सफाई कर्मचारी यूनियन, , जीएस बावा, पूर्व पार्षद सुदर्शन धीर, गोपाल वर्मा, अशोक जैन आदि ने भी महाराज के दर्शन किए व कथा श्रवण की व महाराज जी से आशीर्वाद लिया।

इस मौक पर मुख्य यजमान व्रिजेश चंद्र विजय (द विजय वैडिंग स्टोर) व प्रभा रश्मि के अलावा दैनिक यजमानों में विनोद कुमार सराइया व निर्मला सराइया, कृष्ण सराइया, कमल सराइया, परव सराइया, दीपाली सराइया, मैनेजिंग ट्रस्टी मंदिर श्री सत्य नारायण जी सेठ भजन लाल, प्रदीप हांडा, सुनीता हांडा, कपल हांडा, रिद्धी हांडा, अभव, चिराग, चैतन्य, कैप्टन विवेक वालिया, मोनिका वालिया, हरशित वालिय, सक्षम वालिया, कणव वालिया, अभिनल वालिया तथा लंगर की सेवा में राजीव कुमार, संतोष कुमारी, अजय राजपूत व आस्था ने पूजन करते हुए राजन जी महाराज से आशीर्वाद लिया।

इस अवसर पर अन्य के अलावा संस्था की तरफ से महामंत्री प्रदीप हांडा, प्रचार सचिव अश्वनी शर्मा, कोषाध्यक्ष विपिन वालिया, प्रशांत कैंथ, कपिल हांडा, अनमोल सूद, गौरव शर्मा, शुभांकर शर्मा, अंकुश, अशोक सेठी, हरीश आनंद, गौरव शर्मा, पं. दीपक शास्त्री, पंकज बेदी, मनी गोगिया, पंडित दर्शन लाल काका सहित अन्य सदस्यगण एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण की।

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