सीबीआई चीफ की सिलेक्शन मीटिंग में हंगामा, राहुल गांधी ने क्यों कहा कि मैं रबर स्टैंप नहीं हूं?

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नई दिल्ली: देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई के नए मुखिया को चुनने के लिए हुई मीटिंग हंगामेदार रही. लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस पूरी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए अपना ‘डिसेंट नोट’ यानी असहमति पत्र सौंप दिया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) की उपस्थिति वाली इस हाई-प्रोफाइल सिलेक्शन कमेटी में राहुल गांधी ने सरकार पर कई बड़े आरोप लगाए. राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा कि विपक्षी नेता की भूमिका महज एक ‘रबर स्टैंप’ की नहीं है. उनका आरोप है कि सरकार सीबीआई का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों और पत्रकारों को निशाना बनाने के लिए कर रही है. राहुल गांधी का कहना है कि इसी ‘इंस्टीट्यूशनल कैप्चर’ यानी संस्थागत कब्जे को रोकने के लिए विपक्ष के नेता को चयन समिति में शामिल किया गया था, लेकिन उन्हें सार्थक भूमिका निभाने से रोका जा रहा है।।

राहुल गांधी ने चयन प्रक्रिया को पारदर्शी क्यों नहीं माना?.. राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सिलेक्शन कमेटी के सामने उम्मीदवारों के जरूरी रिकॉर्ड समय पर पेश नहीं किए गए. उन्हें उम्मीदवारों की सेल्फ-अप्रेजल रिपोर्ट और 360-डिग्री रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराई गई. राहुल गांधी का कहना है कि उनसे मीटिंग के दौरान ही पहली बार 69 उम्मीदवारों के रिकॉर्ड्स की जांच करने की उम्मीद की गई, जो व्यवहारिक रूप से असंभव है. उनके अनुसार, बिना किसी कानूनी आधार के जानकारी छिपाना चयन प्रक्रिया का मजाक उड़ाने जैसा है. उनका मानना है कि यह सब इसलिए किया गया ताकि सरकार द्वारा पहले से तय किए गए उम्मीदवार को ही चुना जा सके।

प्रधानमंत्री को भेजे गए पत्र के दूसरे हिस्से में राहुल गांधी ने सख्त लहजा अपनाया है. उन्होंने लिखा कि चयन समिति को महत्वपूर्ण जानकारी से वंचित रखकर सरकार ने इसे सिर्फ एक औपचारिकता में बदल दिया है. गांधी ने कहा कि विपक्ष का नेता कोई रबर स्टैंप नहीं है जो सरकार के हर फैसले पर आंख मूंदकर मुहर लगा दे।

उन्होंने अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी का हवाला देते हुए इस ‘पक्षपाती’ प्रक्रिया का हिस्सा बनने से इनकार कर दिया. राहुल गांधी ने कहा कि वे इस पूरी कार्यवाही से अपनी गहरी असहमति दर्ज कराते हैं क्योंकि यह लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।

क्या पहले भी राहुल गांधी ने प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे? ….यह पहली बार नहीं है जब राहुल गांधी ने सीबीआई चीफ के चयन को लेकर आपत्ति जताई हो. उन्होंने याद दिलाया कि 5 मई 2025 को हुई पिछली बैठक में भी उन्होंने अपनी असहमति दर्ज की थी. इसके अलावा, 21 अक्टूबर 2025 को भी उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर चयन प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के सुझाव दिए थे. राहुल गांधी का दावा है कि उनके उन सुझावों पर सरकार की ओर से कोई जवाब तक नहीं दिया गया।

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