सुक्खू सरकार का अनशन सिर्फ सियासी नौटंकी : जनहित से कांग्रेस का कोई सरोकार नहीं : जयराम ठाकुर

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पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा, विकसित भारत ग्रामीण आजीविका गारंटी के विरोध में सुक्खू सरकार द्वारा किया जा रहा अनशन केवल अपने आलाकमान को खुश करने के लिए

बोले, नया कानून पारदर्शिता लाने और भ्रष्टाचार को खत्म करने की दिशा में एक मील का पत्थर

एएम नाथ। ​शिमला
पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने शिमला में जारी बयान में कांग्रेस सरकार पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि विकसित भारत
ग्रामीण आजीविका गारंटी (वी.बी. जी राम जी) के विरोध में सुक्खू सरकार द्वारा किया जा रहा अनशन केवल अपने आलाकमान को खुश करने के लिए एक ‘सियासी नौटंकी’ है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का यह नया कानून पारदर्शिता लाने और भ्रष्टाचार को खत्म करने की दिशा में एक मील का पत्थर है, जिसमें डिजिटाइजेशन और बायोमेट्रिक हाजिरी के कारण बिचौलियों के लिए कोई जगह नहीं बची है। भ्रष्टाचार पर पूर्ण विराम लगेगा और पारदर्शिता से काम होने पर गांव का विकास तेज़ रफ्तार से होगा।
जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर दोहरा मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि एक तरफ वे प्रधानों के अधिकारों की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर डिजास्टर एक्ट की आड़ में पंचायत चुनाव रोककर उन्होंने पंचायतों को प्रशासकों के हवाले कर दिया है। सभी जगह काम ठप्प है और गांव की सरकार कही जाने वाले पंचायती राज सिस्टम को इन्होंने हाशिए पर धकेलकर सिर्फ अपनी मनमानी का फ़रमान सुनाने तक सीमित कर दिया है। ऐसी स्थिति में मनरेगा के काम कैसे होंगे उन्हें कौन कराएगा? कांग्रेस की सुक्खू सरकार की इन हरकतों से स्पष्ट है कि मनरेगा के नाम पर सुक्खू सरकार सिर्फ घड़ियाली आंसू बहा रही है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि जब 80 के दशक में इस तरह की ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार देने की योजना शुरू हुई वह महात्मा गांधी के नाम की बजाय जवाहरलाल नेहरू के नाम पर क्यों शुरू की गई थी? सुक्खू सरकार द्वारा शुरू की कागजी योजनाओं का नाम भी सिर्फ राजीव गांधी और इंदिरा गांधी के नाम तक ही सीमित है। छत्तीसगढ़ में भाजपा के बाद आई कांग्रेस सरकार ने एक ही दिन में छह योजनाओं के नाम बदल डाले। हैरानी इस बात की है की उन में से तीन योजनाएं इंदिरा गांधी के नाम और दो राजीव गांधी के नाम पर की गई वहां भी कांग्रेस को महात्मा गांधी की याद नहीं आई। उन्होंने सवाल उठाया कि जो सरकार पिछले छह महीनों में प्रदेश की 655 पंचायतों में मनरेगा का एक भी दिन का रोजगार नहीं दे पाई और अपने गृह जिले तक में बजट खर्च करने में नाकाम रही, वह किस नैतिकता से रोजगार की बात कर रही है।
नेता प्रतिपक्ष ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि मोदी सरकार ने मनरेगा का बजट ₹33,000 करोड़ से बढ़ाकर ₹90,000 करोड़ तक पहुँचाया और मनमोहन सरकार की तुलना में दोगुने से अधिक कार्य दिवस सृजित किए। उन्होंने कहा कि सुक्खू सरकार केवल इसलिए असहज है क्योंकि नई व्यवस्था में 100 के बजाय 125 दिन के रोजगार की गारंटी है और इसमें वित्तीय अनुशासन के साथ उच्च गुणवत्ता वाले कार्यों का प्रावधान है। अब योजनाओं के बनाने के लिए केंद्र और राज्य द्वारा संचालन समिति का निर्माण होगा। पूरे प्रोजेक्ट में क्वालिटी आएगी और गांव में कौन सा काम हो इसका निर्णय ग्रामवासी करेंगे। डिसेंट्रलाइज्ड और लोकलाइज्ड प्रोजेक्ट होंगे जहां पर लाभार्थी ही अपनी योजनाओं का निर्धारण और निर्माण करेंगे। इसलिए यह परियोजना पूर्णतया आवश्यकता आधारित होगी। उन्होंने कटाक्ष किया कि दो हजार संस्थान बंद करने वाली और योजनाओं के नाम बदलने वाली कांग्रेस को महात्मा गांधी के नाम की याद तभी आती है जब उसे राजनीति करनी हो, जबकि हकीकत में वह केवल गांधी परिवार के नाम को ही प्राथमिकता देती रही है।

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सियासी नौटंकी में भीड़ जुटाना के लिए प्रशासन का दुरूपयोग

जयराम ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस के आला कमान के निर्देश पर की जा रही इस सियासी नौटंकी के में भीड़ जुटाने के लिए प्रशासन का दुरुपयोग किया गया। इस अनशन में शामिल होने के लिए प्रशासन द्वारा बसें लगाई गई थी और अधिकारियों को निर्देश दिए गए थे कि वह ज्यादा से ज्यादा लोगों को इस अनशन में शामिल होने के लिए लाएं। लेकिन मनरेगा को लेकर सुक्खू सरकार की नीयत और विकास विरोधी सोच से वाक़िफ लोगों ने इस अनशन का बहिष्कार किया। लोगों का इस प्रकार से मोह भंग हो चुका है। प्रदेश के लोग सुक्खू सरकार के विकास विरोधी एजेंडे और झूठी गारंटी के मॉडल को नकार दिया है।

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