स्वच्छ भारत अभियान के तहत आए रिक्शे ट्रालियां बीडीपीओ कार्यालय में खड़े-खड़े हो रहे कबाड़ : बीडीपीओ बोलीं- सरपंच रिक्शे लेने नहीं आए

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5 गांवों की पंचायतों को दिए जाने थे कूड़ा उठाने वाले रिक्शा-ट्रॉली . लंबे समय से कार्यालय में खड़े 

गढ़शंकर। गांवों को साफ-सुथरा रखने और घरों से निकलने वाले कूड़े को एकत्र कर निर्धारित स्थान तक पहुंचाने के उद्देश्य से स्वच्छ भारत अभियान के तहत सरकार की ओर से पंचायतों को कूड़ा उठाने वाले रिक्शा-ट्रॉली उपलब्ध करवाए गए थे। लेकिन गढ़शंकर में इनमें से कुछ रिक्शा-ट्रॉली पंचायतों तक पहुंचने के बजाय बीडीपीओ कार्यालय परिसर में ही खड़े हैं। लंबे समय से खुले में खड़े रहने के कारण इन पर जंग लगने लगी है और इनके खराब होने की स्थिति बन रही है।

जानकारी के अनुसार गढ़शंकर ब्लॉक की कुछ पंचायतों को कूड़ा एकत्र करने के लिए ये रिक्शा-ट्रॉली दिए जाने हैं। इनमें डानसीवाल, महिंदवाणी, कालेवाल बीत और सुमंदड़ा सहित अन्य पंचायतों के लिए रखे गए करीब 5 रिक्शा-ट्रॉली बीडीपीओ कार्यालय में खड़े हैं। इनका उद्देश्य गांवों में घरों और सार्वजनिक स्थानों से कूड़ा एकत्र कर उसे निर्धारित कूड़ा प्रबंधन स्थल तक पहुंचाना है।

 डानसीवाल के सरपंच बोले- हमें जानकारी ही नहीं दी गई

इस मामले में डानसीवाल के सरपंच कुलबीर सिंह ने कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी ही नहीं दी गई कि उनकी पंचायत के लिए कूड़ा एकत्र करने वाला रिक्शा-ट्रॉली कार्यालय में आया हुआ है। उन्होंने कहा कि यदि पंचायत को इसकी जानकारी दी जाती तो वह इसे लेने की प्रक्रिया पूरी करते।

वहीं, सुमंदड़ा के सरपंच के पति एवं पंच प्यारा राम ने बताया कि उन्हें पता चला है कि पंचायत के लिए कूड़ा एकत्र करने वाला रिक्शा-ट्रॉली आया हुआ है। उन्होंने कहा कि अभी इसे कार्यालय से लेकर आना है। महिंदवाणी और कालेवाल बीत के सरपंचों से संपर्क नहीं हो सका, इसलिए इस संबंध में उनका पक्ष नहीं मिल पाया।

सफाई व्यवस्था के लिए मिले साधन, लेकिन कार्यालय में खड़े

स्वच्छ भारत अभियान के तहत गांवों में सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सरकार की ओर से विभिन्न संसाधन उपलब्ध करवाए जाते हैं। कूड़ा उठाने वाले रिक्शा-ट्रॉली भी इसी व्यवस्था का हिस्सा हैं। इनका समय पर इस्तेमाल होने से गांवों में खुले में कूड़ा फेंकने की समस्या को कम करने में मदद मिल सकती है।

लेकिन गढ़शंकर में पंचायतों के लिए उपलब्ध करवाए गए ये रिक्शा-ट्रॉली कार्यालय परिसर में खड़े होने के कारण अभी तक इस्तेमाल में नहीं आ सके हैं। लंबे समय तक खुले में खड़े रहने से इनके लोहे के हिस्सों पर जंग लग रही है। यदि इन्हें समय रहते संबंधित पंचायतों को नहीं सौंपा गया तो सरकारी संसाधनों के खराब होने की आशंका बनी रहेगी।

पंचायत और विभाग के बीच तालमेल का मामला

मामले में विभाग और पंचायतों के बीच सूचना एवं समन्वय का मुद्दा भी सामने आया है। बीडीपीओ कार्यालय का कहना है कि सरपंच अपने रिक्शा-ट्रॉली लेने नहीं आए, जबकि डानसीवाल के सरपंच का कहना है कि उन्हें इसकी जानकारी ही नहीं दी गई। सुमंदड़ा पंचायत की ओर से भी रिक्शा-ट्रॉली कार्यालय में होने की जानकारी मिलने की बात कही गई है।

ऐसे में सवाल यह है कि पंचायतों को उपलब्ध करवाए गए इन संसाधनों को संबंधित पंचायतों तक पहुंचाने और उनके इस्तेमाल को सुनिश्चित करने के लिए विभाग की ओर से क्या व्यवस्था की गई है। ग्रामीण स्तर पर सफाई व्यवस्था तभी प्रभावी हो सकती है, जब उपलब्ध संसाधनों का समय पर इस्तेमाल हो।

बीडीपीओ बोलीं- सरपंच अपने रिक्शा-ट्रॉली लेने नहीं आए

इस संबंध में जब बीडीपीओ गढ़शंकर मनजिंदर कौर से बात की गई तो उन्होंने कहा कि गांवों के सरपंच अपने रिक्शा-ट्रॉली लेने के लिए नहीं आए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये रिक्शा-ट्रॉली संबंधित पंचायतों को दिए जाने हैं।

अब देखना होगा कि कार्यालय परिसर में खड़े इन रिक्शा-ट्रॉलियों को पंचायतें कब अपने कब्जे में लेकर सफाई व्यवस्था के लिए इस्तेमाल करती हैं और विभाग इन्हें खराब होने से बचाने के लिए क्या कदम उठाता है।

फोटो कैप्शन : बीडीपीओ कार्यालय में पड़े कूड़ा एकत्र करने वाले रिक्शा-ट्रॉली।

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