प्रयागराज : इलाहाबाद हाई कोर्ट ने नाबालिगों के कथित यौन शोषण मामले में दर्ज पाक्सो केस में नामजद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती व प्रत्यकचैतन्य मुकुंदानंद गिरि की गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए उनकी अग्रिम जमानत अर्जी पर आदेश सुरक्षित रख लिया है।
न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकलपीठ ने आरोपियों को जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया है और पक्षकारों से कहा है कि 12 मार्च तक 2026 तक अपने तर्क के समर्थन में पूर्व फैसलों का उल्लेख करते हुए लिखित बहस दाखिल करें।
शुक्रवार शाम करीब एक घंटे से भी अधिक समय तक चली सुनवाई के बाद खचाखच भरी अदालत में यह आदेश सुनाया गया। यह आदेश स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद तथा उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। आशुतोष ब्रह्मचारी की अर्जी पर विशेष न्यायाधीश (पाक्सो एक्ट) के आदेश के क्रम में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद व अन्य के खिलाफ बीते रविवार को झूंसी थाने में एफआइआर दर्ज की गई है। झूंसी पुलिस मुकदमा दर्ज होने के बाद पूछताछ कर चुकी है। पीड़ितों का बयान और मेडिकल भी हो चुका है।
माघ मेला व महाकुंभ में नाबालिगों से कुकर्म का आरोप : माघ मेला 2026 तथा महाकुंभ 2025 में नाबालिग बटुकों के साथ कुकर्म का आरोप स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके सहयोगी स्वामी मुकुंदानंद के खिलाफ है। हाई कोर्ट में होने वाली सुनवाई को लेकर काफी उत्सुकता थी। बचाव पक्ष ने एक पीड़ित को बालिग बताया। पीड़ितों की तरफ से अग्रिम जमानत अर्जी का विरोध किया गया। अर्जी पर वरिष्ठ अधिवक्ता दिलीप गुप्ता,अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल व शासकीय अधिवक्ता पतंजलि मिश्र तथा शिकायतकर्ता की तरफ से अधिवक्ता रीना एन सिंह ने पक्ष रखा।
याची के अधिवक्ता का कहना था कि मप्र व प्रयागराज में कथित शोषण का आरोप है। पीड़ित हरदोई में नियमित छात्र हैं। मार्कशीट के अनुसार उनमें एक बालिग है। वह आश्रम का नहीं है। शिकायतकर्ता खुद कई अपराधों में लिप्त है। राज्य सरकार की तरफ से अर्जी की पोषणीयता (स्वीकार्यता) पर आपत्ति की गई। शिकायतकर्ता के अधिवक्ता ने भी अग्रिम जमानत का विरोध किया।
