हर महीने 8 लाख का सेवा-पानी… ..एक WhatsApp कॉल ने खोल दी DIG की पोल : घर में मिला था 5 करोड़ कैश

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चंडीगढ़ : सीबीआई ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तेज तर्रार IPS अधिकारी और रोपड़ रेंज के DIG हरचरण सिंह भुल्लर को रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद सीबीआई ने हरचरण सिंह भुल्लर से जुड़े पंजाब और चंडीगढ़ स्थित विभिन्न ठिकानों पर तलाशी ली, जिसमें करोड़ों का कैश और आभूषण बरामद किया गया।

इस मामले ने न केवल राज्य के कानून व्यवस्था तंत्र को हिला कर रख दिया है, बल्कि उन अधिकारियों की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं जिन्हें जनता की सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई है।

रिश्वत की मांग जिसने उजागर किया भ्रष्टाचार का जाल

यह मामला तब सामने आया जब एक कबाड़ी व्यापारी ने हिम्मत जुटाकर शिकायत दर्ज करवाई। शिकायतकर्ता आकाश भट्टा ने 11 अक्टूबर को Central Bureau of Investigation (सीबीआई) को बताया कि रोपड़ रेंज के डीआईजी Harcharan Singh Bhullar ने उससे 2023 में दर्ज एक एफआईआर को “सेटल” करने के लिए 8 लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी।

भुल्लर, जो एक प्रभावशाली पुलिस परिवार से आते हैं और पूर्व पंजाब डीजीपी Mehal Singh Bhullar के बेटे हैं, ने रिश्वत की यह रकम एक मध्यस्थ ‘कृष्णु’ के माध्यम से मांगी। केवल एकमुश्त राशि ही नहीं, बल्कि हर महीने “सेवा-पानी” के नाम पर रकम वसूलने की योजना बनाई गई थी ताकि व्यापारी के खिलाफ कोई और कार्रवाई न हो।

2007 बैच के आईपीएस अधिकारी भुल्लर ने पिछले वर्ष नवंबर में रोपड़ रेंज की कमान संभाली थी। मात्र कुछ महीनों के भीतर ही वह खुद एक बड़े भ्रष्टाचार जाल में फंस गए। असली खुलासा एक रिकॉर्डेड व्हाट्सऐप कॉल से हुआ, जिसमें वह स्पष्ट रूप से मध्यस्थ को कहते सुने गए- “8 फाड़ने ने 8” यानी “8 लाख रुपये ले आओ।” आगे वह कहते हैं, “जिन्ना देंदा नाल नाल फाड़ी चल, ओह्नूं कहदे 8 कर दे पूरा।” यानी जो भी दे, पर कुल 8 लाख रुपये पूरे होने चाहिए।

सीबीआई ने इस कॉल को मोबाइल नंबर की जांच कर प्रमाणित किया कि कॉल डीआईजी भुल्लर के ही नंबर से हुई थी। यह वह क्षण था जिसने केस को पुख्ता बना दिया। व्हाट्सऐप कॉल की यह रिकार्डिंग उनके खिलाफ पक्के सबूत के रूप में सामने आई।

मध्यस्थ कृष्णु को गुरुवार को चंडीगढ़ के सेक्टर 9डी मार्केट से गिरफ्तार कर लिया गया। कृष्णु और शिकायतकर्ता के बीच हुई बातचीत ने यह भी उजागर किया कि अगस्त और सितंबर के महीनों की रिश्वत अभी तक नहीं दी गई थी। भुल्लर की यह बात- “एड्डा कहना पता की है… कहंदा है अगस्त दा नी आया, सितंबर दा नी आया”- साफ दिखाती है कि यह कोई एकबारगी मांग नहीं थी, बल्कि हर महीने की ‘फिक्स’ वसूली का हिस्सा थी।

एंटी करप्शन ब्रांच के सब-इंस्पेक्टर सचिन सिंह की अगुवाई में सीबीआई टीम ने कॉल रिकॉर्डिंग, चैट और वित्तीय लेनदेन को जोड़कर इस पूरे रैकेट की परतें खोलीं।

सीबीआई की रेड में मिले 5 करोड़ रुपये, सोना और लग्जरी सामान

सबूत पुख्ता होते ही सीबीआई ने कार्रवाई तेज कर दी। एक ट्रैप बिछाया गया और गुरुवार को मध्यस्थ को 8 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए चंडीगढ़ सेक्टर 21 में रंगे हाथों पकड़ लिया गया। इसके बाद सीबीआई ने भुल्लर को एक कंट्रोल्ड कॉल की, जिसमें उन्होंने खुलेआम भुगतान स्वीकार किया और शिकायतकर्ता व मध्यस्थ को अपने कार्यालय बुलाया। यह कॉल सीबीआई के लिए निर्णायक साबित हुई।

इसके तुरंत बाद सीबीआई टीम ने मोहाली स्थित डीआईजी भुल्लर के दफ्तर और चंडीगढ़ के सेक्टर 40 में उनके निजी आवास पर एक साथ छापेमारी की। जो बरामद हुआ, उसने अनुभवी अधिकारियों को भी हक्का-बक्का कर दिया।

घर और दफ्तर से 5 करोड़ रुपये की नकदी, 1.5 किलोग्राम सोना, एक मर्सिडीज और एक ऑडी जैसी लग्जरी गाड़ियों की चाबियां, कई संपत्तियों के दस्तावेज, 22 महंगी घड़ियां, 40 लीटर विदेशी शराब और हथियारों का जखीरा मिला। इसमें पिस्तौल, रिवॉल्वर, डबल बैरल बंदूक, एयरगन और गोला-बारूद शामिल था।

एक सरकारी अधिकारी के घर से इतनी संपत्ति का मिलना इस बात का साफ संकेत था कि यह रिश्वतखोरी का एक व्यवस्थित रैकेट था। अधिकारियों के मुताबिक इतनी बड़ी बरामदगी केवल व्यक्तिगत भ्रष्टाचार का मामला नहीं लगती बल्कि एक संगठित नेटवर्क की ओर इशारा करती है।

सीबीआई अधिकारियों ने भुल्लर को मोहाली स्थित उनके दफ्तर से ही गिरफ्तार कर लिया। एजेंसी ने अपने बयान में कहा, “ट्रैप के दौरान पब्लिक सर्वेंट से कंट्रोल्ड कॉल पर उसने भुगतान स्वीकार किया और शिकायतकर्ता को दफ्तर बुलाया। इसके बाद उसे गिरफ्तार किया गया।”

सीबीआई ने भुल्लर और कृष्णु के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 और 7ए तथा Bharatiya Nyaya Sanhita की धारा 61(2) के तहत मामला दर्ज किया है। अब जांच का दायरा बढ़ाकर यह देखा जा रहा है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल था और कितनी संपत्तियां अवैध रूप से अर्जित की गईं।

भुल्लर इससे पहले डीआईजी पटियाला रेंज, सतर्कता ब्यूरो के संयुक्त निदेशक और कई जिलों-जगराओं, मोहाली, संगरूर, फतेहगढ़ साहिब, होशियारपुर और गुरदासपुर-में एसएसपी रह चुके हैं। इन जिम्मेदारियों ने उन्हें न केवल ताकत दी, बल्कि जांच एजेंसियों को अब शक है कि इसी दौरान उन्होंने रिश्वतखोरी का समानांतर तंत्र भी खड़ा किया।

विवादों से भरा रहा भुल्लर का करियर

यह कोई पहला मौका नहीं है जब भुल्लर का नाम विवादों में आया हो। वह उस वक्त सुर्खियों में आए थे जब वह पंजाब पुलिस की एसआईटी की अगुवाई कर रहे थे और Bikram Singh Majithia से ड्रग तस्करी के मामले में पूछताछ कर रहे थे। उस दौरान उनके काम करने के तरीके पर कई गंभीर आरोप लगे। उन पर कठोरता और अव्यवस्थित प्रबंधन के आरोप लगे, जिसके बाद उन्हें पद से हटा दिया गया।

अपने करियर में उन्होंने कई अहम पदों पर काम किया, जिनमें उन्हें जांच और ऑपरेशनल फैसलों में काफी अधिकार मिले। उनके करीबियों के अनुसार वह अक्सर सत्ता और अपने प्रभाव के दम पर काम करते थे और खुद को सुरक्षित मानते थे। सीबीआई को अब शक है कि इसी सुरक्षा की भावना ने उन्हें इतना निडर बना दिया कि वह खुलेआम रिश्वतखोरी का जाल बुनते रहे।

एक वरिष्ठ अधिकारी के इस तरह भ्रष्टाचार में पकड़े जाने से पंजाब पुलिस महकमे में हलचल मच गई है। राज्य के कई वरिष्ठ अधिकारियों ने इस मामले से खुद को अलग करते हुए कहा है कि सीबीआई की जांच स्वतंत्र रूप से चल रही है और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार इस केस में मिले सबूत – खासकर व्हाट्सऐप कॉल रिकॉर्डिंग और भारी बरामदगी – भुल्लर को निर्दोष साबित करने की किसी भी कोशिश को बेहद कठिन बना देंगे। सीबीआई अब उनकी संपत्तियों के कागजात और बैंकिंग रिकॉर्ड खंगाल रही है ताकि रिश्वत की रकम के प्रवाह का पता लगाया जा सके।

जांच एजेंसी आने वाले दिनों में उनके कई सहयोगियों और अधीनस्थ अधिकारियों से भी पूछताछ कर सकती है। सीबीआई का मानना है कि यह रिश्वतखोरी का कोई एकल मामला नहीं बल्कि एक संगठित तंत्र हो सकता है।

इस पूरे प्रकरण में एक खास बात यह भी सामने आई कि कैसे तकनीक ने भ्रष्टाचार को उजागर करने में निर्णायक भूमिका निभाई। एक साधारण व्हाट्सऐप कॉल, जो भुल्लर के लिए महज रोजमर्रा की रिश्वत मांगने का जरिया रही होगी, वही कॉल उनके खिलाफ सबसे बड़ा सबूत बन गई।

सीबीआई न केवल इस ताजा मामले की तहकीकात कर रही है बल्कि भुल्लर की घोषित और अघोषित संपत्तियों की जांच भी कर रही है। लक्जरी गाड़ियां, महंगी घड़ियां, सोना और विदेशी शराब का जखीरा उनकी वैध आय से कई गुना अधिक की संपत्ति दर्शाता है।

यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि इसमें आरोपी कोई छोटा-मोटा अधिकारी नहीं बल्कि एक डीआईजी स्तर का अधिकारी है। जनता के बीच इस बात को लेकर गुस्सा है कि जो अधिकारी भ्रष्टाचार से लड़ने के लिए जिम्मेदार हैं, वही खुद इस गंदे खेल में शामिल हैं। सामाजिक संगठनों और विपक्षी दलों ने इस मामले में पारदर्शिता और पुलिस तंत्र में जवाबदेही की मांग तेज कर दी है।

जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, इस नेटवर्क से जुड़ी और चौंकाने वाली जानकारियां सामने आने की संभावना है। फिलहाल, “8 फाड़ने ने 8” के उस एक व्हाट्सऐप कॉल ने पंजाब पुलिस के भीतर छिपे भ्रष्टाचार की परतों को उघाड़ दिया है और यह मामला राज्य की कानून व्यवस्था पर गहरे सवाल छोड़ गया है।

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