31 मार्च को सेवा समाप्ति और अप्रैल में दोबारा नियुक्ति दर्ज करने का मामला उठा; श्रम अधिकारी को जांच कर कार्रवाई रिपोर्ट सौंपने के निर्देश
एएम नाथ। शिमला। हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में कार्यरत वोकेशनल शिक्षकों की सेवा शर्तों और वित्तीय लाभों से जुड़े मामले में श्रम विभाग ने जांच के निर्देश दिए हैं। वोकेशनल ट्रेनर्स वेलफेयर एसोसिएशन की शिकायत पर श्रम आयुक्त ने श्रम अधिकारी, शिमला को संबंधित कंपनी के रिकॉर्ड की पड़ताल कर कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है। शिकायत में सेवा में कथित अंतराल दर्ज करने, ग्रेच्युटी और अन्य सेवा लाभ प्रभावित होने तथा वेतन में अंतर और कटौती के आरोप लगाए गए हैं।
सेवा समाप्ति और दोबारा नियुक्ति के रिकॉर्ड पर उठे सवाल
वोकेशनल ट्रेनर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने आठ सितंबर को श्रम आयुक्त के समक्ष लिखित शिकायत दर्ज करवाई थी। एसोसिएशन का आरोप है कि 31 मार्च को सभी वोकेशनल शिक्षकों और राज्य समन्वयकों की सेवा समाप्त होना दर्ज किया गया, जबकि उनकी दोबारा नियुक्ति छह, सात और 21 अप्रैल को दिखाई गई।
एसोसिएशन के अनुसार, सेवा रिकॉर्ड में इस तरह का अंतराल दर्ज होने से शिक्षकों की निरंतर सेवा की गणना और ग्रेच्युटी सहित अन्य सेवा लाभों पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा वेतन में अंतर और कथित कटौती को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
कंपनी के समझौते से लेकर वेतन रिकॉर्ड तक होगी पड़ताल
श्रम आयुक्त ने श्रम अधिकारी, शिमला को मामले के सभी पहलुओं की जांच करने के निर्देश दिए हैं। जांच के दौरान संबंधित कंपनी और शिकायतकर्ताओं से जानकारी जुटाई जाएगी। अधिकारियों को शिक्षकों की उपस्थिति, सेवा समाप्ति और दोबारा नियुक्ति से संबंधित रिकॉर्ड की जांच करनी होगी।
इसके साथ ही कंपनी के साथ हुए समझौते, समझौते की अवधि बढ़ाने से जुड़े दस्तावेजों, वेतन भुगतान और किसी भी प्रकार की कटौती के विवरण की भी पड़ताल की जाएगी। इसका उद्देश्य शिकायत में लगाए गए आरोपों की वास्तविक स्थिति का पता लगाना है।
शिक्षकों को व्यक्तिगत सुनवाई का मिलेगा अवसर
श्रम विभाग ने शिकायतकर्ता शिक्षकों को व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर देने के निर्देश भी दिए हैं। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि सेवा में कथित अंतराल दर्ज करने और वेतन या अन्य सेवा लाभों में कटौती के आरोप सही हैं या नहीं। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि संबंधित मामले में श्रम कानूनों का किसी प्रकार का उल्लंघन तो नहीं हुआ है।
फिलहाल मामला जांच के चरण में है। श्रम अधिकारी की रिपोर्ट और संबंधित रिकॉर्ड की पड़ताल के बाद ही आरोपों की पुष्टि तथा आगे की कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी।
