हिमाचल मित्र मंडली न केवल एक सामाजिक संगठन : बल्कि हिमाचली पहचान का प्रतीक : डॉ. जनक राज

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मुंबई स्थित हिमाचल मित्र मंडली का समाज में बड़ा योगदान

एएम नाथ। चम्बा :  मुंबई भारत की आर्थिक राजधानी, विभिन्न प्रदेशों से आए प्रवासियों का मिलटिंग पोट है। यहां हिमाचल प्रदेश के लोग भी बड़ी संख्या में बसते हैं, जो रोजगार और बेहतर जीवन की तलाश में अपनी मातृभूमि छोड़कर आए हैं। इन प्रवासियों की एकता, सहयोग और सांस्कृतिक संरक्षण की भावना से जन्म हुई संस्था है हिमाचल मित्र मंडली। जो चेंबुर, मुंबई में स्थित है। ये बात विधायक डॉ. जनक राज ने कही। उन्होंने कहा कि यह संगठन हिमाचली प्रवासियों का एक मजबूत सामाजिक स्तंभ बन चुका है।
हिमाचल मित्र मंडली की स्थापना 1950 के दशक की शुरुआत में हुई। मूल रूप से यह कांगड़ा मित्र मंडल के नाम से शुरू हुई, क्योंकि उस समय मुंबई में कांगड़ा जिले के लोग अधिक संख्या में आकर बसे थे। 1940-1950 के दशक में हिमाचल प्रदेश से मुंबई की ओर प्रवास तेज हुआ। ये लोग मुख्य रूप से कालबादेवी, गिरगांव रोड, खत्तर गली, फणसवाड़ी और रामवाड़ी जैसे इलाकों में रहते थे। एक बड़े और व्यस्त शहर में अकेलेपन और चुनौतियों का सामना करने के लिए कुछ दूरदर्शी हिमाचलियों ने आपसी सहयोग की जरूरत महसूस की।
1952 में औपचारिक रूप से संगठन की नींव पड़ी। बाद में इसका नाम बदलकर हिमाचल मित्र मंडली कर दिया गया, ताकि पूरे हिमाचल प्रदेश के लोग इसमें शामिल हो सकें। आज यह रजिस्टर्ड संस्था है। (GST और सोसाइटी के रूप में पंजीकृत), जिसका मुख्यालय चेंबुर में रोड नंबर 5, पेस्टम सागर, जी.एम. रोड पर है। यह एक बैंक्वेट हॉल के रूप में भी जाना जाता है, जहां सामुदायिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं।
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मुंबई में बसे हिमाचलियों को एक मंच प्रदान करना मुख्य उद्देश्य

हिमाचल मित्र मंडली का मुख्य उद्देश्य मुंबई में बसे हिमाचलियों को एक मंच प्रदान करना है, जहां वे अपनी संस्कृति, भाषा और परंपराओं को जीवित रख सकें। संगठन डोगरी और हिमाचली भाषा-संस्कृति को बढ़ावा देता है। त्योहारों जैसे होली, दीवाली, लोहड़ी और हिमाचली उत्सवों को धूमधाम से मनाया जाता है। पहाड़ी गायकों को मंच प्रदान किया जाता है, ताकि युवा पीढ़ी अपनी जड़ों से जुड़ी रहे।
कठिन समय में सदस्यों की मदद के लिए कोऑपरेटिव क्रेडिट सोसाइटी स्थापित की गई। बीमारी, शादी-ब्याह या अन्य संकट में आर्थिक और भावनात्मक सहयोग प्रदान किया जाता है। मुंबई जैसे महानगर में अजनबीपन की भावना को दूर करने के लिए सामाजिक कार्यक्रम, सेमिनार और उत्सव आयोजित होते हैं। यह संगठन प्रवासी हिमाचलियों को “घर से दूर घर” की अनुभूति देता है। फोटो में दिख रहे विशाल दान बोर्ड इसकी धार्मिक गतिविधियों का प्रमाण हैं। सदस्य विभिन्न धार्मिक कार्यों (जैसे “श्री सिद्ध चंद जी की आरती”, “दान दाताओं की सूची”) के लिए उदारतापूर्वक दान देते हैं। ये बोर्ड मुख्य रूप से गणेश जी और अन्य देवी-देवताओं से जुड़े मंत्रों, आरतियों और दान राशियों की सूची दिखाते हैं। यह मुंबई के प्रसिद्ध सिद्धिविनायक मंदिर के निकट या प्रभाव क्षेत्र में होने के कारण धार्मिक भावना को दर्शाता है। दान से संगठन सामुदायिक कार्यों को मजबूत करता है।
हिमाचल मित्र मंडली न केवल एक सामाजिक संगठन है, बल्कि हिमाचली पहचान का प्रतीक भी। दशकों से यह मुंबई में बसे हजारों हिमाचलियों की जीवन रेखा बना हुआ है। आज की तेज रफ्तार जिंदगी में यह संस्था याद दिलाती है कि जड़ें कितनी भी दूर हों, लेकिन संस्कृति और एकता से जुड़ाव हमेशा मजबूत रहता है।
यह संगठन हिमाचल प्रदेश की “देवभूमि” की भावना को मुंबई के कोलाहल में जीवंत रखे हुए है, और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा स्रोत है।
इसकी कल्पना मूल रूप से मुंबई में हिमाचल के टैक्सी चालकों ने की थी वह लोग अपने रोजगार से समय और पैसे बचाकर इस स्थान पर काम करते थे इधर उधर से लाकर मिट्टी भर कर उहोने पहले इस स्थान को समतल किया और बाद में इस जगह पर भव्य भवन का निर्माण किया यह भवन आज रोजगार, परीक्षा और शिक्षा तथा बीमारी के इलाज के लिये मुबई आने वालो का बेहतरीन सुविधाओं के साथ गर्मजोशी से स्वागत करता है।
विधायक डॉ. जनक राज ने कहा कि मैं स्वयं को धन्य महसूस करता हूँ कि मुझे इस पुण्य स्थान जो हमारे दूरदर्शी समाजसेवी सोच वाले हिमाचलियों की मेहनत का परिणाम है उसके दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।

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