बिना आरक्षण संबंधी छूट के चयनित अभ्यर्थी अनारक्षित सीट पर होंगे समायोजित; छूट लेने वालों का चयन आरक्षित कोटे में माना जाएगा
एएम नाथ। शिमला : हिमाचल प्रदेश सरकार ने सरकारी नौकरियों में आरक्षण के तहत चयन को लेकर ‘ओन मेरिट’ व्यवस्था पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लागू कर दिया है। इसके साथ ही कार्मिक विभाग ने वर्ष 2011 और 2014 में जारी निर्देशों को समेकित करते हुए सरकारी भर्तियों में आरक्षित और अनारक्षित पदों पर चयन की स्थिति स्पष्ट कर दी है।
कार्मिक विभाग की ओर से वीरवार को जारी आदेश के अनुसार, एससी, एसटी, ओबीसी, दिव्यांगजन, पूर्व सैनिक, स्वतंत्रता सेनानी आश्रित, विशिष्ट खिलाड़ी तथा बीपीएल वर्ग का ऐसा अभ्यर्थी, जो सामान्य अभ्यर्थियों के समान मानकों पर बिना किसी छूट के चयनित होता है, उसे आरक्षित पद के बजाय अनारक्षित पद पर मेरिट के आधार पर समायोजित किया जाएगा।
इसका उद्देश्य आरक्षित वर्ग के लिए निर्धारित सीटों को उन अभ्यर्थियों के लिए सुरक्षित रखना है, जो आरक्षण के पात्र हैं और आरक्षित कोटे के तहत चयनित होते हैं।
छूट का लाभ लिया तो आरक्षित कोटे में चयन
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि एससी, एसटी या ओबीसी वर्ग का अभ्यर्थी चयन प्रक्रिया के दौरान आयु सीमा, अनुभव, शैक्षणिक योग्यता, परीक्षा में अतिरिक्त प्रयास या सामान्य वर्ग की तुलना में अधिक व्यापक ‘जोन ऑफ कंसिडरेशन’ जैसी किसी छूट का लाभ लेता है, तो उसका चयन आरक्षित रिक्ति के विरुद्ध माना जाएगा।
ऐसे अभ्यर्थी को सामान्य मेरिट के आधार पर अनारक्षित सीट पर समायोजित नहीं किया जाएगा।
बिना छूट के मेरिट हासिल करने पर खुले वर्ग की सीट
आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि आरक्षित वर्ग का कोई अभ्यर्थी बिना किसी रियायत या छूट का लाभ लिए सामान्य वर्ग के समान मानकों पर आवश्यक अंक हासिल करता है, तो उसे अनारक्षित यानी ओपन मेरिट सीट पर स्थान दिया जाएगा।
वहीं, यदि अभ्यर्थी ने भर्ती प्रक्रिया के किसी चरण में निर्धारित छूट का लाभ लिया है, तो उसका चयन संबंधित आरक्षित कोटे की रिक्ति के विरुद्ध ही माना जाएगा।
सभी विभागों को आदेश लागू करने के निर्देश
प्रधान सचिव कार्मिक एम. सुधा देवी की ओर से सभी प्रशासनिक सचिवों, मंडलायुक्तों, विभागाध्यक्षों, उपायु
