हिमालय संरक्षण से राष्ट्र निर्माण की ओर बढ़ेगा हिमालय परिवार
धर्मशाला में हिमालय परिवार की रणनीति संगोष्ठी, पर्यावरण से संस्कृति तक सामूहिक कार्य-ढाँचा तैयार
एएम नाथ। धर्मशाला : हिमालय परिवार, हिमाचल प्रदेश की ओर से धर्मशाला में “हिमालय संरक्षण से राष्ट्र निर्माण की ओर” विषय पर अभिमुखीकरण एवं भावी रणनीति संगोष्ठी आयोजित की गई। इसमें संरक्षण, संस्कृति, सामाजिक सरोकार और विकास से जुड़े विषयों पर प्रतिनिधियों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, समुदाय प्रतिनिधियों तथा अन्य हितधारकों ने विचार-विमर्श किया। संगोष्ठी का प्रमुख परिणाम “धर्मशाला घोषणा–2026” का प्रस्तुतीकरण और अंगीकरण रहा।
घोषणा में हिमालय संरक्षण, सतत विकास, सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक संरक्षण, युवाओं की भागीदारी, सामुदायिक सहभागिता तथा शोध-आधारित दृष्टिकोण को लेकर सामूहिक कार्य-ढाँचा प्रस्तुत किया गया।
इसमें हिमालय की पारिस्थितिक सुरक्षा को देश की जल, खाद्य, पर्यावरणीय और सामरिक सुरक्षा से जोड़ते हुए संरक्षण के लिए व्यापक जनसहभागिता पर जोर दिया गया।
कार्यक्रम में “हिमालय परिवार विजन–2030” भी प्रस्तुत किया गया। इसके तहत सामुदायिक सहभागिता, वैज्ञानिक अनुसंधान, युवा नेतृत्व, स्वयंसेवक विकास, संस्थागत साझेदारी, डिजिटल नेटवर्किंग और संगठनात्मक क्षमता को मजबूत करने की दीर्घकालीन दिशा तय की गई। 2026–2030 के प्रस्तावित कार्य-ढाँचे में जिला स्तर पर हिमालय संवाद, हिमालय अध्ययन केंद्र, “एक जिला–एक हिमालय अभियान”, “एक स्वयंसेवक–एक पौधा अभियान”, युवा नेतृत्व कार्यक्रम, नीति संवाद, हिमालय सेवा सप्ताह और राष्ट्रीय डिजिटल स्वयंसेवक नेटवर्क जैसी पहलें शामिल हैं।
संगोष्ठी में संगठन के सप्त-संकल्पों को भी भविष्य की कार्ययोजना के आधार के रूप में दोहराया गया। इनमें पर्यावरण संरक्षण, नदियों-पर्वतों-वनों का संरक्षण, आपदा प्रबंधन एवं मानवीय राहत, सांस्कृतिक संरक्षण, सेवा एवं सामाजिक सहयोग, युवा सशक्तीकरण तथा राष्ट्रीय एकता, अखंडता एवं सुरक्षा शामिल हैं।
कार्यक्रम में शोध एवं संस्थागत सहयोग, स्थानीय एवं स्वदेशी ज्ञान के संरक्षण तथा युवाओं और महिलाओं की सक्रिय भागीदारी पर भी बल दिया गया। शैक्षणिक संस्थानों, स्थानीय समुदायों, शोधकर्ताओं और स्वयंसेवी संगठनों को महत्वपूर्ण सहभागी बताया गया।
इस अवसर पर “समरस समाज: विकसित भारत का आधार” तथा “Handbook on Himachal Pradesh Excise Law” पुस्तकों का विमोचन एवं परिचर्चा भी हुई। संगोष्ठी को प्रो. एस.पी. बंसल, डॉ. इंद्रेश कुमार, परमजीत सिंह गिल तथा हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंदर गुप्ता सहित अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने संबोधित किया।
