होशियारपुर। जिले के एक सरकारी स्कूल की 12 वर्षीय छात्रा से कथित दुष्कर्म के मामले में पीड़ित बच्ची के पिता और उसका उपचार कर रही डॉक्टर ने गंभीर बातें सामने रखी हैं। बच्ची फिलहाल सिविल अस्पताल में उपचाराधीन है और उसकी हालत धीरे-धीरे सामान्य हो रही है।
इलाज कर रही डॉक्टर के अनुसार, बच्ची को 27 अगस्त की रात गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया था। उसे अत्यधिक रक्तस्राव हो रहा था और तत्काल उपचार शुरू करना पड़ा। डॉक्टर ने बताया कि यदि बच्ची को समय पर अस्पताल नहीं लाया जाता, तो उसकी हालत और गंभीर हो सकती थी।
डॉक्टर के अनुसार, जब बच्ची अस्पताल पहुंची तो परिजनों को भी शुरुआत में यह जानकारी नहीं थी कि उसके साथ क्या हुआ है। बच्ची काफी डरी हुई थी और किसी से खुलकर बात नहीं कर पा रही थी। परिजनों और चिकित्सकों द्वारा हौसला दिए जाने के बाद उसने कथित तौर पर अपने साथ हुई घटनाओं की जानकारी दी।
पिता का आरोप—तीन महीने तक धमकाकर चुप रखा गया
पीड़ित बच्ची के पिता ने आरोप लगाया कि आरोपी शिक्षक बच्ची को लंबे समय से धमकाता रहा। पिता के अनुसार, बच्ची को मारने, स्कूल से निकालने, फेल करने और बदनाम करने की धमकी दी जाती थी। इसी डर के कारण वह करीब तीन महीने तक अपने परिवार को कथित घटनाओं के बारे में नहीं बता सकी।
पिता ने आरोप लगाया कि आरोपी हेडमास्टर बच्ची को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करता था। उन्होंने कहा कि जब उनकी बेटी की तबीयत बिगड़ी और उसे 27 अगस्त को सिविल अस्पताल होशियारपुर ले जाया गया, तब मामले की जानकारी सामने आई।
पिता ने आरोपी के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
स्कूलों में बच्चियों की सुरक्षा को लेकर जताई चिंता
पीड़ित बच्ची के पिता ने स्कूलों में छात्राओं की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि अभिभावक अपने बच्चों को शिक्षा और सुरक्षित भविष्य के लिए स्कूल भेजते हैं, लेकिन यदि स्कूल परिसर में ही बच्चों की सुरक्षा पर सवाल उठें तो यह बेहद चिंताजनक है।
पिता के अनुसार, जिस स्कूल में उनकी बेटी पढ़ती है, वहां तीन शिक्षक हैं और सभी पुरुष हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि स्कूल में महिला शिक्षिका नहीं होने के कारण बच्ची को अपनी परेशानी किसी महिला शिक्षक से साझा करने का अवसर नहीं मिला।
पुलिस पर दबाव बनाने के आरोप
पीड़ित बच्ची के पिता ने पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि बयान दर्ज करने के दौरान बच्ची पर अपने बयान बदलने के लिए दबाव बनाया गया।
हालांकि, पुलिस ने 27 अगस्त को मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया था। पुलिस पर लगाए गए दबाव बनाने के आरोपों की स्वतंत्र जांच और पुष्टि होना बाकी है।
डॉक्टर बोलीं—चार दिन बाद नियंत्रित हुआ रक्तस्राव
सरकारी अस्पताल की डॉक्टर मंजू अरोड़ा ने बताया कि बच्ची को 27 अगस्त की रात अस्पताल में भर्ती कराया गया था और उसे काफी अधिक रक्तस्राव हो रहा था। बच्ची का तत्काल उपचार शुरू किया गया।
डॉक्टर के अनुसार, करीब चार दिन के उपचार के बाद रक्तस्राव नियंत्रित हो सका। फिलहाल बच्ची की हालत स्थिर बताई जा रही है। उन्होंने कहा कि जांच के दौरान बच्ची के शरीर पर बाहरी चोटों के निशान नहीं मिले।
DEO का दावा—11 अगस्त को बच्ची स्कूल नहीं आई थी
मामले को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी हरजिंदर कौर ने कहा कि विभाग द्वारा जांच करवाई गई है और रिपोर्ट उच्च कार्यालय को भेज दी गई है।
उन्होंने बताया कि विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार, जिस दिन 11 अगस्त को कथित घटना होने की बात कही जा रही है, उस दिन बच्ची स्कूल नहीं आई थी, जबकि संबंधित शिक्षक की उपस्थिति दर्ज थी।
डीईओ ने यह भी कहा कि केवल पुरुष शिक्षकों की मौजूदगी के आधार पर स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था पर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
2 सितंबर को अदालत में दर्ज हुए बच्ची के बयान
पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता संदीप शर्मा ने आरोप लगाया कि पुलिस की ओर से बच्ची के बयान अदालत में दर्ज कराने की प्रक्रिया में देरी हुई। उन्होंने बताया कि 2 सितंबर को बच्ची के बयान अदालत में दर्ज कराए गए।
अधिवक्ता के अनुसार, पीड़ित पक्ष को इसके लिए अदालत में आवेदन देना पड़ा। उन्होंने दावा किया कि अदालत ने मामले में देरी को लेकर पुलिस को भी फटकार लगाई।
बार एसोसिएशन ने पुलिस कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
होशियारपुर बार एसोसिएशन के प्रधान एवं अधिवक्ता पीएस घुम्मण ने भी पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मामले में आरोपी को बचाने का प्रयास किया गया और पीड़ित बच्ची पर दबाव बनाने की कोशिश की गई।
घुम्मण ने कहा कि मामले में निष्पक्ष जांच और पीड़ित बच्ची को पूरा न्याय मिलना आवश्यक है।
जांच जारी, आरोपों की पुष्टि के बाद ही स्थिति होगी स्पष्ट
इस मामले में पुलिस द्वारा आरोपी को गिरफ्तार किए जाने के बाद जांच और कानूनी प्रक्रिया जारी है। पीड़ित पक्ष, पुलिस, शिक्षा विभाग और अन्य संबंधित पक्षों की ओर से अलग-अलग दावे सामने आए हैं।
मामले से जुड़े सभी आरोपों और तथ्यों की जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी। प्रशासन और पुलिस से अपेक्षा की जा रही है कि मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित कर पीड़ित बच्ची को न्याय दिलाया जाए।
