औषधीय पौधों की खेती के लिए जिला ऊना में चिन्हित किए जाएंगे क्लस्टरः डीसी

by
रसायन मुक्त औषधीय पौधों की खेती से किसानों को मिलेगा लाभः राघव शर्मा
संजीवनी पायलट परियोजना के संबंध में उपायुक्त राघव शर्मा ने की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता
ऊना (18 फरवरी)- जिला ऊना के प्रत्येक उप-मंडल में औषधीय पौधों की खेती के लिए स्वयं सहायता समूहों की मदद से किसानों के क्लस्टर चिन्हित किए जाएंगे। यह बात उपायुक्त ऊना राघव शर्मा ने संजीवनी पायलय परियोजना के संबंध में आज डीआरडीए सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए कही।
बैठक में उपायुक्त ने कहा कि चिन्हित किए जाने वाले क्लस्टर को जिला प्रशासन ऊना की ओर से भरपूर मदद प्रदान की जाएगी, ताकि अधिक से अधिक औषधीय पौधे उगाने के लिए प्रोत्साहित हो सकें। उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस के संक्रमण के दौर में प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली आयुर्वेदिक औषधीयों की मांग बढ़ी है और जिला ऊना में भी कुछ औधषीय पौधों की खेती के लिए उपयुक्त वातारण है। उन्होंने कहा कि जिला में सर्पगंधा, अश्वगंधा, खसखस व काली गेंहू इत्यादि की खेती की जा सकती है, जिससे किसान लाभान्वित हो सकते हैं।
उन्होंने कहा कि किसानों को औषधीय पौधों की खेती के लिए प्रोत्साहित करने के लिए उन्हें प्रशिक्षण तथा तकनीकी सहायता प्रदान की जाएगी। अगर किसान औषधीय पौधों की खेती रसायन मुक्त तथा प्राकृतिक खेती के रूप में करते हैं, तो इससे उन्हें काफी लाभ मिल सकता है। औषधीय पौधों को बाजार उपलब्ध करवाने के लिए कई संस्थान तैयार हैं, ऐसे में उन्हें मार्केटिंग के लिए किसी प्रकार की परेशानी नहीं आएगी। औषधीय पौधों की नर्सरी मनरेगा के माध्यम से तैयार की जा सकती है साथ ही पौधारोपण के लिए भी मनरेगा से मदद की जा सकती है।
डीसी राघव शर्मा ने कहा कि बेहड़ जसवां में औषधीय पौधों की खेती करने वाला एक कलस्टर बेहतर ढंग से कार्य कर रहा है। किसान खाली पड़ी भूमि पर औषधीय पौधे लगा सकते हैं। जून माह में अधिकतर औषधीय पौधे लगाए जाते हैं तथा ऐसे में पौधारोपण से पहले पटवारियों को निर्देश दिए जाएंगे कि किसानों की पूरी मदद करें, ताकि उन्हें बैंक से ऋण इत्यादि की सुविधा लेने में किसी प्रकार की असुविधा न हो।
राघव शर्मा ने कहा कि राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत किसानों को वित्तीय सहायता प्राप्त करने के लिए समूह बनाने होंगे, जिसमें एक किसान समूह के पास कम से कम 20 कनाल भूमि होनी चाहिए। एक समूह में किसान 15 किलोमीटर के दायरे में तीन गांव भी शामिल हो सकते हैं। गिरवी रखी गई भूमि पर भी औषधीय पौधों की खेती करने के लिए आवेदन किया जा सकता है। इस संबंध में अधिक जानकारी के लिए किसान जिला आयुष अधिकारी के कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं।
बैठक में एडीसी डॉ. अमित कुमार शर्मा, जिला आयुष अधिकारी डॉ. राजेश कुमार शर्मा, पीओ डीआरडीए संजीव ठाकुर सहित सभी बीडीओ तथा अन्य उपस्थित रहे।
Share
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

You may also like

article-image
पंजाब , हिमाचल प्रदेश

स्कूटर पर सेब ढोए जाते थे आज से पहले – अब तो पानी भी ढोया जाता : ठियोग पानी कांड में यह चीज स्पष्ट – डॉ राजीव बिंदल

एएम नाथ। शिमला :  भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ राजीव बिंदल ने कहा कि कांग्रेस की आपसी खैंचतान और लड़ाई से हिमाचल प्रदेश की जनता को भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। अब...
article-image
हिमाचल प्रदेश

एकीकृत सड़क सुरक्षा डेटाबेस में डाटा अपडेट करने बारे एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित

सोलन  :  सड़क सुरक्षा माह 2024 के तहत क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी कार्यालय सोलन में एकीकृत सड़क सुरक्षा डेटाबेस (आई.आर.ए.डी) को लेकर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला की अध्यक्षता परिवहन अधिकारी सुरेन्द्र...
article-image
हिमाचल प्रदेश

दस-दस लाख खातों में हैं जमा, कोविड के दौरान हुए निराश्रित : तीन निराश्रित बच्चों को प्रदान की डाकघर खातों की पासबुक

18 वर्ष पूर्ण करने पर संयुक्त से एकल खाता में किया परिवर्तित धर्मशाला, 11 सितम्बर। उपायुक्त कांगड़ा डॉ. निपुण जिंदल ने आज “प्रधानमंत्री देख रेख योजना” के तहत 18 वर्ष की आयु पूर्ण कर...
हिमाचल प्रदेश

हिमालयन क्षेत्र की जनजातियों के इतिहास और समस्याओं पर की चर्चा

धर्मशाला, 27 अक्तूबर। हिमााचल प्रदेश विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय केंद्र मोहली खनियारा में इतिहास विभाग एवं ग्लोबल सेंटर फाॅर इंडिजियस पीपल के से सौजन्य से हिमालयन जनजातियों का इतिहास एवं संस्कृति सामाजिक स्थिति तथा निरंतरता...
Translate »
error: Content is protected !!